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वोट देने में सबसे आगे रहती है आधी आबादी, लेकिन चुनाव में टिकट देने में महिलाओं की होती है उपेक्षा!

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महिला आरक्षण: संसद और विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर महिलाओं ने किया प्रदर्शन

स्टेट डेस्क/पटना: आधी आबादी को संसद में वाजिब प्रतिनिधित्व और 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर बिहार महिला समाज ने शुक्रवार , 9 जुलाई को आयकर गोलंबर पर प्रदर्शन किया। भारतीय महिला फेडरेशन की अपील पर बिहार समेत देश भर में 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।

जैसा की आपको पता है 25 साल हो गये इस बिल को संसद में पेश हुए लेकिन 2010 में राज्यसभा से पास होने के एक सुखद अवसर के अलावा यह बिल उपेक्षा के अंधेरों में ही पड़ा रहने को विवश है.
इन 25 सालों में कई सरकारें आई और चली गई। सभी ने महिलाओं से झूठा वादा किया। कभी विपक्ष की पार्टी रही बीजेपी ने जोरदार ढंग से महिलाओं से ये वादा किया था की उनकी सरकार आने पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। पर सरकार में आने के बाद भी बीजेपी ने इस बिल को पारित कराने के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई।

बिहार महिला समाज की अध्यक्ष सुशीला सहाय ने कहा की ये झूठी और धोखेबाज सरकार है। जिसनें महिलाओं के साथ बड़ा धोखा किया है। उन्होंने कहा कि जिस राज्य की आधी आबादी चुनाव में सबसे ज्यादा मुखर रही है वहीं महिलाओं को टिकट देने में राजनीतिक दलों ने अनदेखी की है। बिहार महिला समाज ये मांग करता है कि महिलाओं को आरक्षण देने की लंबित मांग को पूरा किया जाय।

बिहार महिला समाज की कार्यकारी अध्यक्ष निवेदिता झा ने सभी दलों से अपील की है कि महिला आरक्षण बिल के समर्थन में आएं। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को महिलाएं प्रतिनिधित्व करती हैं इसलिए इस चुनाव में भी उन्हें 50 प्रतिशत टिकट दिया जाना चाहिए था।

बिहार विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित् काफी कम रहा है, महज 11.5% या 28 महिला विधायक है, 2010 में 34 महिला विधायक रही है। राजनीतिक दल महिलाओं को अगर टिकट नहीं देंगे तो राजनीति में उनकी भागीदारी किस तरह सुनिश्चित होगी। जबकि बिहार में मर्दों के मुकाबले मतदान प्रतिशत महिलाओं का ज्यादा रहा है। लोकसभा चुनावों में 59% महिलाओं ने मतदान कर इतिहास रचा, जो अब तक 55% पुरुष मतदान से कहीं अधिक था।

महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि के बावजूद पार्टियों ने वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में केवल 10% महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया। देश में 70 साल बाद महिलाओं की  राजनीति में भागीदारी 15 प्रतिशत से भी कम है! 

बिहार 2006 में पंचायत में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दे के पहला ऐसा राज्य बन गया था जिसके चलते 2 लाख महिलाएं राजनीति में चुन कर आई ,पर आज भी बिहार की विधान सभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मात्र 11 प्रतिशत है. यह हालत इसलिए है क्यूंकि राजनैतिक दल चुनाव दर चुनाव महिलाओं को सिर्फ 9 प्रतिशत ही टिकट देते आये हैं।

बिहार महिला समाज की जिला सचिव अनीता मिश्र ने कहा कि सभी दलों को पार्टी के भीतर महिलाओं को 50 प्रतिशत टिकट देना चाहिए। साथ ही वे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के वादे को पूरा करें। उन्होंने कहा की हम सभी महिला संगठनों से अपील करते हैं कि वे इस मांग को लेकर सड़क पर उतरें।

वरिष्ठ रंगकर्मी मोना झा ने कहा की जो दल महिलाओं को टिकट नहीं दे उन्हें महिलाएं अपना वोट नहीं दें। सरकार को महिलाओं को आरक्षण देना होगा नहीं तो महिलाएं आंदोलन तेज करेंगी।
प्रदर्शन में बिहार महिला समाज से शाइस्ता अंजूम, रिंकू कुमारी, इबराना, नीलू, बेला मल्लिक, वीना देवी समेत कई महिलाओं ने हिस्सा लिया।

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