संपूर्ण लॉकडाउन को लेकर उद्योग जगत व डॉक्टर्स आमने-सामने

पिछले वर्ष लॉकडाउन की हुई थी कड़ी आलोचना


पिछले साल हालात अलग थे : डॉ. जुगल किशोर

फैसला राज्य सरकारों को लेना है: डॉ. श्रीवास्तव

नई दिल्ली : कोरोना वायरस की दूसरी लहर से देश में हाहाकार मचा हुआ है। प्रतिदिन संक्रमण के लाखों नए मामले सामने आ रहे हैं। हजारों मौतें हो रही हैं। ऐसे में देश में फिर से संपूर्ण लॉकडाउन की मांग के बीच उस पर बहस छिड़ गई है। उद्योग संगठन सीआईआई ने सरकार से कहा-सीमित करें आर्थिक गतिविधियां।

सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर ये मुद्दा गर्माया हुआ है कि ऐसी स्थिति में देश में फिर से पूरी तरह लॉकडाउन लगा देनी चाहिए। एक तरफ देश के सबसे बड़े उद्योग चैंबर सीआईआई ने भी सरकार से कहा है कि आम लोगों की परेशानी को कम करने के लिए व्यापक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को सीमित करने का कदम उठाएं। 

डॉक्टरों की यह दलील संपूर्ण लॉकडाउन प्रभावी नहीं
वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर्स संपूर्ण लॉकडाउन लगाने को उचित नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर हम युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाएं और लोगों को टीका दें तो इस महामारी पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। संपूर्ण लॉकडाउन जैसे विकल्प अब प्रभावी नहीं हैं। पिछले वर्ष लगाए गए कोरोना लॉकडाउन के फैसले की कड़ी अलोचना हुई थी। लेकिन इस बार सरकार पर फिर से संपूर्ण लॉकडाउन लगाने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि है कि हम केंद्र और राज्य सरकारों से गंभीरता से आग्रह करते हैं कि वे किसी भी तरह की भीड़ एकत्रित होने या सुपर स्प्रेडर समारोहों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करें। 

सफदरजंग अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन के डायरेक्टर, प्रोफेसर और हेड डॉ.जुगल किशोर का कहना है कि पिछले वर्ष संपूर्ण लॉकडाउन का मुख्य उद्देश्य देश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना था। आज हमारे पास वैक्सीन है। जरुरत के अनुसार पीपीई किट, मास्क और वेंटिलेटर्स हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन जैसे कदम उठाने के बजाए सरकार युवाओं के टीकाकरण अभियान तेजी से चलाए तो कुछ माह में ही इस बीमारी पर अंकुश लगाया जा सकता है।

पहले लॉकडाउन ने देश को बदतर हालत से बचा लिया, लेकिन अब उस विकल्प को फिर से चुनेंगे तो इसका कोई फायदा नहीं होगा। दिल्ली आईसीएमआर में शोध प्रबंधन, नीति योजना और संचार विभाग के प्रमुख डॉ रजनीकांत श्रीवास्तव ने कहा कि लॉकडाउन लगाना है या नहीं, ये पूरी तरह से राज्य सरकार पर निर्भर करता है। राज्य सरकार को पता है कि लॉकडाउन लगाने से उनके राज्य की अर्थव्यवस्था कितनी प्रभावित होने वाली है। या अगर वे लॉकडाउन लगाने का फैसला लेते हैं, तो उन्हें कितनी सुरक्षा मिलती है।