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‘पीरियड इंड ऑफ सेंटेंस’ ने जीता ऑस्कर, निर्माता गुनीत ने कहा, 10 साल की मेहनत का नतीजा

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सेंट्रल डेस्क : ऑस्कर 2019 में भारत के हाथ बड़ी सफलता लगी है. निर्माता गुनीत मोंगा ने भारत को गर्व करने का मौका दिया है। उनकी को प्रोड्यूस की गई फिल्म पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस ने शॉर्ट सब्जेक्ट केटेगरी में ऑस्कर का खिताब जीता है। पीरियड जैसे टैबू पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ”पीरियड इंड ऑफ सेंटेंस” ने 91वें एकेडमी अवॉर्ड्स में बेस्ट डॉक्यूमेंटी का अवॉर्ड जीता है.

फिल्म की कहानी, सब्जेक्ट और स्टारकास्ट भारतीय है. ये डॉक्यूमेंट्री उत्तर प्रदेश के हापुड़ में रहने वाली लड़कियों के जीवन पर बनी है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे आज भी हमारे समाज में गांवों में पीरियड्स को लेकर शरम और डर है. माहवारी जैसे अहम मुद्दे को लेकर लोगों के बीच जागरुकता की कमी है. ये डॉक्यूमेंट्री 25 मिनट की है. फिल्म की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर गुनीत मोंगा हैं. वे इस डॉक्यूमेंट्री मेकिंग से जुड़ी इकलौती भारतीय हैं. इसे Rayka Zehtabchi ने डायरेक्ट किया है.

ऑस्कर अवॉर्ड जीतने के बाद गुनीत मोंगा बेहद एक्साइटेड हैं. उन्होंने ट्वीट कर लिखा-” हम जीत गए, इस दुनिया की हर लड़की, तुम सब देवी हो. अगर जन्नत सुन रही है.” इस बारे में एक स्टेटमेंट जारी करते हुए गुनीत ने कहा है कि अकादमी को बहुत बहुत धन्यवाद हम सभी की मेहनत को सम्मान देने के लिए। यह फिल्म लास एंजेलिस से लेकर उत्तर प्रदेश के कथिकेरा तक की लड़कियों की कहानी है और मेहनत है। पीरियड एक सामान्य सी प्रक्रिया है और इससे किसी को भी अपने अचीवमेंट को हासिल करने से रोका नहीं जा सकता है।

यह लगभग दस साल की मेहनत है, गौरी चौधरी ने यहां इन लड़कियों को एजुकेट किया है। हर लड़की को इसके बारे में जानना चाहिए और पढ़ना चाहिए। यह फिल्म एक तरह से एक अहम बात कहती है। मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रही हूं। मेलिसा और रायका के साथ यह फिल्म बना पाई। सिख्या प्रोड्कशन के जरिए फिल्म को फ्लोर पर पूरा किया। साथ ही नेटफ्लिक्स को भी शुक्रिया। गर्ल पावर की जय। मैं चाहती हूं कि हर महिला को देवी के रूप का दर्जा मिला। अब हमारे पास ऑस्कर है। आओ दुनिया बदल दें।

क्या है फिल्म की कहानी

डॉक्यूमेंट्री की शुरूआत में गांव की लड़कियों से पीर‍ियड के बारे में सवाल पूछा जाता है. पीरियड क्या है? ये सवाल सुनकर वे शरमा जाती हैं. बाद में ये सवाल लड़कों से किया जाता है. जिसके बाद वे पीरियड को लेकर अलग-अलग तरह के जवाब देते हैं. एक ने कहा- पीरियड वही जो स्कूल में घंटी बजने के बाद होता है. दूसरा लड़का कहता है ये तो एक बीमारी है जो औरतों को होती है, ऐसा सुना है.

कहानी में हापुड़ की स्नेहा का अहम रोल है. जो पुल‍िस में भर्ती होना चाहती है. पीरियड को लेकर स्नेहा की सोच अलग है. वे कहती है जब दुर्गा को देवी मां कहते हैं, फिर मंदिर में औरतों की जाने की मनाही क्यों है. डॉक्यूमेंट्री में फलाई नाम की संस्था और र‍ियल लाइफ के पैडमैन अरुणाचलम मुरंगनाथम की एंट्री भी होती है. उन्हीं की बनाई सेनेटरी मशीन को गांव में लगाया जाता है.

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