खान पान में बदलाव और नियमित व्यायाम से कंट्रोल किया जा सकता है युवाओं में बढ़ते हार्ट ब्लॉकेज को

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उदिप्त, पटना : अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के एलसिवीयर रिसर्च इंस्टीट्यूट, अमेरिका द्वारा पब्लिशड एक आर्टिकल के अनुसार 1990 से 2018 तक के बीच जहा अमेरिका में हार्ट डिजीज से मारने वालों की संख्या में 41 % की गिरावट आई है, वही दूसरी ओर भारत में हार्ट डिजीज से मरने वालों की संख्या में 34% की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा चौकाने वाला और एक बुरे भविष्य की ओर इशारा कर रहा है। बात तब और भी बिगड़ जाती है जब इनमें आधे से जादा रोगी युवा पाए जाते हैं। युवा यानी वैसे लोग जिनकी उम्र 40 से कम है ।

युवाओं में हार्ट डिजीज, खास कर ब्लॉकेज की समस्या दिनोदिन गंभीर होते जा रही है। अगर बात ब्लॉकेज की करे भारत में इसके सबसे ज्यादा मरीज पाए जाने लगे हैं। जहां जादातर देशो में ब्लॉकेज के मामले प्राय पांच फीसदी के आसपास देखी जाती है तो वही भारत में यह पंद्रह फीसदी है।

क्या है कारण
डॉ डी सी अमल, जनरल फिजीशियन कहते है कि आजकल के जीवन में आए बदलाव इसकी मुख्य वजह है। युवा अब शारीरिक श्रम से बचना चाहते हैं। सुख सुविधा बढ़ने के चलते युवा अब आलसी हो गये है। जिसके चलते क्लोसटरोल में वृद्धि हो जाती है। और आगे यही ब्लॉकेज का मुख्य कारण है। इसके अलावा आजकल के जीवन में तनाव आम बात है, जिसके कारण ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है। यह भी ब्लॉकेज का कारण बनता है। साथ ही साथ अगर आप युवा है और जंक फूड खाते है तो भी आप हार्ट ब्लॉकेज को नेवता दे रहे हैं।

कैसे बचे हार्ट ब्लॉकेज से
अगर हम कारण समझ जाए तो इलाज़ करने के लिए किसी डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं है। डॉ अमल कहते हैं कि खान पान में बदलाव और नियमित व्यायाम से बढ़िया इलाज़ कुछ भी नहीं है। खाने में हरे फल सब्जी, फल और ताज़ा भोजन जो सुपाच्य हो, विशेष लाभकारी होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई हार्ट डिजीज का रोगी नियमित रूप से प्रातः एक घंटा बस पार्क में टहल भी ले तो उसका आधा रोग तो बिना दवा का ही ठीक हो जाता है।

ब्लड प्रेशर में अनियमितता से बचने के लिए तनाव मुक्त रहना बहुत जरूरी है। और खास कर, अगर कोई हार्ट का मरीज है तो उसे ध्रुमपान से एकदम बचना चाहिए। एक विशेष बात और जो ध्यान देना है कि मरीज कोई भी दवा बिना कोई डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह के ना खाए।