महिलाओं में माइग्रेन की समस्या ज्यादा, जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव

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माइग्रेन की समस्या इन दिनों काफी आम हो चुकी है। यह एक प्रकार का मस्तिष्क विकार है, जिसमें सिरदर्द होता है। इसमें सिर में एकतरफा दर्द होता है। इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है। यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है। इसमें दर्द 2 से 72 घंटे तक हो सकता है।

केस स्टडी-
स्वीटी सिंह (27) जब मेरे पास आई तो उन्होंने बताया “छह माह पहले बाईं आंख के पिछले हिस्से में दर्द उठा। धीरे-धीर दर्द फैलने लगा। कुछ समय बाद दर्द की तीव्रता इतनी बढ़ गई कि दर्द को कम करने के लिए पेनकिलर का सहारा लेना पड़ा। पूरी शाम दर्द और उबकाई में बीती। दर्द लहर की तरह उठता हुआ महसूस हो रहा था। अगले माह इसी समय फिर यह दर्द उठा। उससे अगली बार भी ऐसा ही हुआ।

ध्यान देने पर दर्द का एक निश्चित पैटर्न देखने को मिला। दर्द हर बार माहवारी से दो दिन पहले उठता था।”मैंने उनका MRI कराया,जो नार्मल था,जिससे मैं कन्फर्म हो गई की स्वीटी को माइग्रेन है। उनके सभी लक्षणों को अच्छे से समझने के बाद मैंने उनका उपचार LACHESIS MUTA 0/1 से शुरू किया। अब 2 सालों के बाद स्वीटी माइग्रेन के दर्द से पूरी तरह सुरक्षित हैं.

कारण:-
माइग्रेन होने के कई कारण हो सकते हैं। अनियमित दिनचर्या, खान-पान की गलत आदतें, तनाव, काम की थकान, धूम्रपान, तेज गंध वाले परफ्यूम, बहुत ज्यादा या कम नींद लेना इसका कारण हो सकते हैं। इसके अलावा मौसम का बदलाव, हार्मोनल परिवर्तन, सिर पर चोट लगना, आंखों पर स्ट्रेस या तेज रोशनी, एक्सरसाइज न करने से भी माइग्रेन हो सकता है। कई लोगों को तेज धूप, गर्मी या ठंड से भी परेशानी होती है। जिन लोगों को हाई या लो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और तनाव जैसी समस्याएं होती हैं उनके माइग्रेन होने की आशंका बढ़ जाती है। महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन की कमी से माइग्रेन की संभावना बढ़ जाती है।

महिलाओं में माइग्रेन के कारण-
मासिक धर्म – मासिक धर्म के दौरान महिलाओं में हार्मोनल(एस्ट्रोजन) परिवर्तन के कारण माइग्रेन की समस्या होती है। सर दर्द मासिक चक्र से दो दिन पहले और तीन दिन बाद के बीच में होता हैं। इसमें महिलाओं को अवसाद, चिड़चिड़ापन, थकान, भूख में बदलाव, सूजन, पीठ में दर्द,उबकाई की शिकायत रहती है।

गर्भधारण – गर्भधारण के दौरान ज्यादातर महिलाओं में माइग्रेन के लक्षणों में सुधार या कमी देखी जाती है। गर्भधारण के दौरान माइग्रेन में कमी आए तो माइग्रेन प्रसव के बाद की अवधि में फिर से होता है।

रजोनिवृत्ति – माइग्रेन से पीडित दो तिहाई महिलाओं में रजोनिवृत्ति में माइग्रेन की स्थिति बिगड़ सकती है या सुधर सकती है। कुछ महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद माइग्रेन शुरू भी हो सकता है। (एस्ट्रोजन के अनियमित या कम श्राव के कारन)।

गर्भनिरोधक गोलियां – गर्भनिरोधक गोलियां खाने का माइग्रेन पर अस्थायी असर होता है। गर्भनिरोधक गोलियां खाने से महिलाओं में माइग्रेन नए सिरे से हो सकता है, पहले से मौजूद माइग्रेन का दर्द और बढ़ सकता है या इसकी आवृत्ति या इसके होने के लक्षण बदल सकते हैं। माइग्रेन से पीडित खास तौर पर उन महिलाओं में इस्कीमिक दौरों का खतरा अधिक हो सकता है, जो गर्भनिरोधक गोलियां खाती हैं, या धूम्रपान करती हैं।

सुबह का नाश्ता ना करना – महिलाओं में ज्यादा देर तक भूखे रहने की प्रवृति माइग्रेन का बहुत बड़ा कारण है। जो महिलाएं ज्यादा व्रत रहती हैं या फिर सुबह का नाश्ता नहीं करतीं उन्हें इसकी समस्या जल्दी हो जाती है।

तथ्य –
• माइग्रने के शिकार लोगों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
• यह एक न्यूरोलॉजिकल रोग है।
• अनियमित खान-पान व तनाव के कारण यह समस्या हो सकती है।
• महिलाओं के जीवन में होने वाले बदलाव इसकी मुख्य वजह हैं।

लक्षण
आम तौर पर इसका शिकार होने पर सिर के आधे हिस्से में दर्द रहता है। जबकि आधा दर्द से मुक्त होता है। जिस हिस्से में दर्द होता है, उसकी भयावह चुभन भरी पीड़ा से आदमी ऐसा त्रस्त होता है कि सिर क्या बाकी शरीर का होना भी भूल जाता है।

माइग्रेन मूल रूप से तो न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें रह-रह कर सिर में एक तरफ बहुत ही चुभन भरा दर्द होता है। ये कुछ घंटों से लेकर तीन दिन तक बना रहता है। इसमें सिरदर्द के साथ-साथ गैस्टिक, जी मिचलाने, उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

इसके अलावा फोटोफोबिया यानी रोशनी से परेशानी और फोनोफोबिया यानी शोर से मुश्किल भी आम बात है। माइग्रेन से परेशान एक तिहाई लोगों को इसकी जद में आने का एहसास पहले से ही हो जाता है।

कैसे बचें माइग्रेन से
थोड़ी सी सावधानी रखकर आप माइग्रेन को खुद से दूर रख सकते हैं।इसके लिए सबसे जरूरी है खुद के लाइफ स्टाइल और खानपान में बदलाव लाना।डिब्बाबंद पदार्थ,जंक फूड और मिर्च-मसाले वाली चीजों का सेवन न करें।

ताजा और सूखे फल,दूध, दही, पनीर, दालें, मांस और मछली, चोकरयुक्त रोटी, चावल या आलू जैसी स्टार्च वाली चीजों के साथ सलाद आदि का सेवन करें। योग और व्यायाम भी काफी हद तक माइग्रेन से छुटकारा दिला सकता है।साथ ही साथ माइग्रेन वाले रोगियों को अच्छी नींद लेना चाहिए।

इसके अलावा आप जब भी दर्द महसूस करें तो अपने मन से कोई दवाई न लें। बल्कि किसी चिकित्सक को इस बारे में बताएँ और उनके बताए निर्देशों के अनुसार ही चलें।ऐसा नहीं कि माइग्रेन लाइलाज बीमारी है,थोड़ी सी सावधानी आपको माइग्रेन से मुक्ति दिला सकती है।

Profile- Dr.Ragini Jyoti
BHMS, CCH, CGO(Mumbai)
Aadarsh superspeciality homoeo Clinic, Rajiv nagar rd no-3