नाटक ‘अर्थ दोष’ का मंचन- ‘जो सही हैं उनकी जीत हो और जो बुरे हैं उनकी हार हो’

0
644

पटना/ उदीप्त निधि : अल्बर्ट कामु लिखित नाटक Le Malentendu के हिंदी रूपांतरण ‘अर्थ दोष’ का मंचन पटना के प्रेमचंद रंगशाला में हुआ। हर व्यक्ति को खुशियों की तलाश होती है, पर वह खुशी गलत रास्ता अख्तियार करके हासिल करना जायज नहीं।

गलत तरीके से हासिल खुशी अंततोगत्वा परेशानी और विनाशकारी ही होती है। इस नाटक की अभिव्यक्ति भी कुछ ऐसी ही है. आज लोगों में वैभवपूर्ण जीवन जीने की लालसा और इस लालसा में पथभ्रष्ट हो रहे लोगों की संवेदनहीनता को जीवंत करता है नाटक ‘अर्थ दोष’।

विभिन्न भूमिकाओं का निर्वहन सभी कलाकारों ने न्याययोचित किया है. विशेषकर मां के किरदार में मोना झा उल्लेखनीय रहीं. वंही सशक्त अभिनेता जावेद अख्तर खान कुछ Rhythm में नहीं दिखे।
प्रकाश संयोजन बहुत ही शानदार थी.

निर्देशक परवेज अख्तर ने Low Key लाइटिंग का बेहद खूबसूरत कल्पना रचा है, जो इस नाटक को भव्यता देता है। नाटक की गति जान बूझ कर थोड़ी धीमी रखी गयी जो कंही कंही उबाऊपन का एहसास कराती है।

नाट्य संक्षेप:

एक व्यक्ति काफी वर्षों बाद मां और बहन की तलाश में अपने घर आता है। उसकी मां उस घर को अपनी जीविका चलाने के लिए गेस्ट हाउस में परिवर्तित कर देती है और अपने गेस्ट हाउस में ठहरने वाले अतिथियों का खून कर देती है और माल असबाब लूट कर विलासिता वाली जीवन जीने का सपना देखती हैं।

जब उसका बेटा जय काफी वर्षों बाद उस गेस्ट हाउस में आता है तो उसकी मां-बहन पहचान नहीं पातीं तो वो अपना परिचय एक सैलानी के रूप में देता है और अतिथि बनकर ठहरता है। गेस्ट हाउस में मां-बेटी अपने एक सहयोगी के साथ मिल कर उसका कत्ल कर देती है और उसकी लाश को दरिया में बहा देती हैं. जब मां-बहन को इसका पता चलता है, कि वह उनका अपना है तो वे भी सुसाइड कर लेती हैं।

Le Malentendu / अर्थ दोष Absurd विचार पर केंद्रित नाटक है जिसका मूल है कि मानव की इच्छा एक ऐसी दुनिया के साथ सतत संघर्ष में है जो अतार्किक और अनुचित है। इस नाटक का केंद्रीय विषय यह है कि जीवन उन लोगों के बीच अंतर नहीं करता है ‘जो सही हैं उनकी जीत हो और जो बुरे हैं उनकी हार हो’।