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कानपुर : विश्व प्रॉस्टेट माह के अवसर पर कानपुर यूरोलॉजी सेन्टर दे रहा है विशेष सुविधाएं

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दिवाकर श्रीवास्तव/स्टेट डेस्क। प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी पूरी दुनिया में विश्व प्रॉस्टेट माह सितम्बर में मनाया जा रहा है। इसमें पूरे माह बुजुर्ग पुरुषों में प्रॉस्टेट ग्रंथि में होने वाली व्याधियों के बारे में आमजनों को जागरूक करने का ध्येय है। यह बात कानपुर यूरोलॉजी सेन्टर के डायरेक्टर वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. वीके मिश्रा ने संवाददाता सम्मलेन में मीडिया को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों से कानपुर यूरोलॉजी सेन्टर प्रति वर्ष हमारे सीनियर सिटीजन के लिये सितम्बर माह में विभिन्न SUBSIDE-SED एवं निःशुल्क सुविधायें, लेक्चर, सोशल मीडिया में जानकारी एवं इत्यादि करता आ रहा है। इस वर्ष पूरे सितम्बर माह में 50 वर्ष से ऊपर के पुरुषों में जिनको प्रास्टेट से सम्बन्धित बीमारी है उनके सभी परीक्षणों पर 25 प्रतिशत तथा आपरेशन पर भी 25 प्रतिशत की छूट देने का निश्चय किया है। ऐसे सभी मरीजों की कम्प्यूटर द्वारा यूरोफ्लो मीटरी जाँच एवं कैथटर इत्यादि डालना या बदलना पूरे सितम्बर माह में नि:शुल्क होगा।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि वास्तव में प्रास्टेट ग्रन्थी का बढना एक नैसर्गिक प्रकिया है, जो कि प्रायः 50 वर्ष की आयु के बाद पुरूषों को प्रभवित करती है। इसके प्रमुख लक्षण पेशाब का रूक-रूक कर होना पतली धारा से होना, देर तक होना, जल्दी जल्दी होना, पेशाब का स्वतः छूट जाना इत्यादि है। उन्होंने बताया कि इससे बार-बार मूत्र संकमण, पेशाब में खून या मवाद आना, मूत्राशय में पथरी होना तथा अचानक या धीरे-धीरे पेशाब रूकना इत्यादि जटिलतायें उत्पन्न हो सकती हैं, जिनसे गुर्दे फेल तक हो सकते हैं।

समय पर परामर्श, परीक्षण एवं उपचार की जरूरत पर जोर देते हुये डॉ. वीके मिश्रा ने बताया कि 40 से 50 प्रतिशत मरीज दवाओं द्वारा, आपरेशन द्वारा और स्वस्थ्य हो सकते है। दूरबीन विधि द्वारा किया जाता है इस आपरेशन को टीयूआर (पी) कहते है। इस आपरेशन में किसी प्रकार का चीरा या टांका नहीं लगाया जाता है तथा सम्पूर्ण आपरेशन मूत्र मार्ग दूरबीन द्वारा होता है। इसमें लगभग तीन से चार दिन अस्पताल में रहना होता है।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि वृद्धा अवस्था में होने वाले अन्य विकारों जैसे- डायबटीज, उच्च रक्त चाप एवम् हृदय रोग इत्यादि से पीडित व्यक्ति भी टीयूआर (पी) विधि द्वारा आपरेशन करवा सकते है। यह एक सुरक्षित विधि है। एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. मिश्रा ने बताया कि शाकाहार से प्रास्टेट की वृद्धि अपेक्षाकृत कम होती है। मांसाहार करने वाले प्रायः इससे अधिक पीडित होते है।

डॉ. मिश्रा ने जोर देते हुए कहा कि आधुनिक जीवन शैली फास्ट फूड, काफी इत्यादि के सेवन से लक्षण जल्दी उत्पन्न हो जाते है तथा संयमित जीवन प्रणाली एवं नियमित व्यायाम द्वारा पुरूष इससे पीड़ित होने से बच सकते है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि इस आपरेशन में बेहोश करने की आवश्यकता नही होती, केवल सुन्न करके ही आपरेशन पूरा जाता है, जिससे मरीज की जान का भी खतरा अपेक्षाकृत कम होता है।

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प्रायः लोग आपरेशन के डर की वजह से नीम हकीमों से इलाज करवाते है क्योकि इस बीमारी में विशेष की राय एवं इलाज महंगा होता है। परन्तु इस कैम्प में नि: शुल्क परामर्श एवं आपरेशन किया जा रहा है। इसका लाभ सभी को विशेषतः गरीब वर्ग को लेना चाहिये। इसके अलावा उचित सलाह एवं परामर्श द्वारा प्रास्टेट कैंसर की सभी प्रारम्भिक अवस्था में चिन्हित किया जा सकता है एवं इलाज द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

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