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बिहार में वायरल बुखार का बढ़ा प्रकोप, हर चौथे घर में मिल रहे मरीज

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दिवाकर श्रीवास्तव/स्टेट डेस्क। कोरोना की दहशत के बीच बिहार में वायरल फीवर के हमले ने समस्याएं बढ़ा दी हैं। स्थिति यह है कि बिहार में हर चौथे घर में परिवार का कोई न कोई सदस्य बीमार है। वहीं अकेले वैशाली जिले में बीते एक हफ्ते में 20 बच्चे वायरल बुखार से पीड़ित हुए। इनमें से एक की मौत हो चुकी है।

उत्तर प्रदेश में वायरल बुखार से लगातार बीमार होते बच्चो की खबर के बीच बिहार में भी खतरे की घंटी बज गयी है। वैशाली जिले में वायरल बुखार के कई मामले सामने आ रहे हैं। बीते छह दिनों में सिर्फ हाजीपुर सदर अस्पताल में 20 से ज्यादा वायरल बुखार के मामले सामने आये हैं, जिसमें एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है।

हाजीपुर और आसपास के इलाकों में बच्चो के बीच वायरल बुखार को लेकर हाजीपुर सदर अस्पताल में बच्चों के लिए स्पेशल वार्ड बनाया गया है। फिलवक्त अस्पताल में सात बच्चे भर्ती हैं, जिनमें से चार को वायरल बुखार के लक्षण बताये गए हैं। अधिकतर बच्चे एक महीने से लेकर 5 साल तक की उम्र के हैं।

पटना एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन के हेड और इमरजेंसी ट्रामा के एचओडी डॉ. अनिल कुमार बताते हैं कि वायरल पहले भी होता था आज भी हो रहा है। बस अंतर यही है कि महामारी के दौरान समान लक्षण वाले बुखार ने दहशत बढ़ा दी है। संक्रमण के फैलने का तरीका लगभग सेम है। कोरोना की तरह ही वायरल भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में उतनी ही तेजी से फैलता है। कोविड की तरह वायरल भी नाक और मुंह से फैलता है। यह हमारी सांस की नली और फेफड़े को प्रभावित करता है।

डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि वायरल के लक्षण कोरोना की तरह ही हैं। इसमें सर्दी, बुखार, खांसी, पूरे शरीर में दर्द, गंध नहीं मिलना शामिल है। अगर किसी व्यक्ति या बच्चे को कोविड जैसे लक्षण मिल रहे हैं, तो लोग उसे वायरल फीवर नहीं समझ पा रहे हैं। हर पीड़ित और उसके परिवार वालों को आशंका के बीच दहशत यही रहती है कि कहीं कोविड तो नहीं हो गया। अच्छी बात सह है कि जब इन बच्चों या बड़ों की कोविड टेस्ट कराई जाती है तो रिपोर्ट निगेटिव आती है।

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डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि आहार व दिनचर्या सही रखें तो वायरल से बचाव संभव है। आंवला और विटामिन सी लें। पानी अच्छे से पीएं, डस्ट वाली जगह से दूर रहें, स्मोक नहीं करें। ऐसा करके हम निश्चित रूप से दोनों संक्रमण से काफी हद तक बचे रहेंगे और संक्रमित हुए भी तो जल्दी ठीक हो जाएंगे। सूझबूझ के साथ बचाव रखना ही सबसे बड़ी दवाई है।

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