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SPECIAL REPORT : गायत्री मंत्र से कोरोना मुक्ति का ऋषिकेश एम्स में क्लीनिकल ट्रायल

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-बिना लक्षण और हल्के लक्षण वाले कोरोना मरीजों के दो ग्रुप बनाए गए
-जून के महीने में आईसीएमआर और केंद्र को सौंपी जा सकती है रिपोर्ट

न्यूज़ डेस्क/ महेश शर्मा: कोरोना की तीसरी लहर का खौफ, नयी गाइड लाइंस की तैयारी और सख्ती से पालन कराने का संकल्प। दूसरी लहर का इसी माह संभावित पीक की खबरों के बीच अब गायंत्री मंत्र से कोरोना पॉजिटिव मरीज ठीक किए जाने पर केंद्र सरकार की योजना पर तेजी से काम जारी है।

आप चौकेंगे कि क्या गायत्री मंत्र के जाप से कोरोना पॉजिटिव के रोगी ठीक हो सकते हैं? यह एक टोटके वाला सवाल लगता है। पर केंद्र सरकार इस गंभीर है। इस पर शोध के लिए फंड भी रिलीज किया गया है। इस पर केंद्र सरकार की सहायता से एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ऋषिकेश में रिसर्च वर्क जारी है।

खबर है कि एम्स जून महीने तक अपनी रिपोर्ट विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपेगा। यहां पर सामान्य चिकित्सा के साथ ही गायत्री मंत्र का जाप प्राणायाम का प्रयोग भी मरीजों पर किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार एम्स ने बीस मरीजों पर यह प्रयोग शुरू किया है जिन्हें समान रूप से दो ग्रुपों में बांटा गया है। शोध के लिए तय हुआ कि ग्रुप ए में दस मरीजों का सामान्य कोरोना वायरस का इलाज किया जाएगा। इस दौरान सुबह और शाम को प्राणायाम के एक घंटे के सत्र के अलावा गायत्री मंत्र का जाप करेंगे जबकि दूसरे ग्रुप यानी ग्रुप बी के दस मरीजों को केवल छूत का सामान्य इलाज ही प्राप्त होगा। आउटलुक में छपी रिपोर्ट के अनुसार इस रिसर्च के बाद रिपोर्ट प्रकाशित करने पर निर्णय लिया जाएगा।

सूत्रों से मिली खबर के अनुसार इस पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है जिसे केंद्र को सौंपा जाएगा फिर आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च) व डीएसटी (डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी) से एप्रूवल मिलने के बाद इसे साइंस जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा। बताया जाता है कि इस बात की प्रबल संभावना है कि आशाजनक परिणाम मिलने पर इसे कोविड अस्पतालों में एक थिरेपी के रूप में अनिवार्य भी किया जा सकता है।

बीते 24 घंटों में देश में 4.14 लाख से भी ज्यादा कोरोना पॉजिटिव के मरीज आए हैं। चार हजार लोगों की मौत हो चुकी है। कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 14 लाख 85 हजार 285 हो गयी है। देश में अब तक1,75,97,410 लोग ठीक हुए हैं। कुल 36,53,804 मरीजों का इलाज चल रह है। यह तो सरकारी आंकड़ें हैं पर वास्तविकता इससे कहीं ज्यादा भयावह बतायी जाती है। आईसीएमआर के अनुसार 6 मई तक 29,86,01,699 सैंपल की जांच की गयी जिनमें 18,26,490 सैंपलों की जांच गुरुवार को हुई। लोगों कोविशील्ड और एस्ट्राजेनेका, कोवैक्सीन दी जा रही है।

देश में लगातार तेजी से बढ़ते मामलों के बीच डीएसटी यानी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए गायत्री मंत्री के जाप और प्राणायाम के प्रभावों के क्लीनिकल परीक्षण के फंड दिया है। इसे आईसीएमआर की क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री में दर्ज भी कराया गया है। ठीकठाक लक्षण वाले मरीजों पर गायत्री मंत्र का ट्रायल हो रहा है। जिन दो ग्रुप में मरीजों को रखा गया है उनमें एक ग्रुप को मानक उपचार तथा दूसरे को मानक उपचार के साथ 14 दिन तक गायत्री मंत्र का उच्चारण और योग शिक्षक की देखरेख में सांस संबंधी व्यायाम कराया जाएगा।

दोनों ग्रुपों के मरीजों की हालत में होने वाले सुधार की तुलना की जाएगी। चिकित्सक इस बात का मूल्यांकन करेंगे कि क्या दोनों ग्रुपों के निगेटिव होने कितना अंतर था और वे कितने दिनों तक अस्पताल में रहे। इस बात का भी मूल्यांकन होगा कि क्या उनमें थकान और एंग्जायटी यानी घबराहट कम हुई है। यह परीक्षण कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीजों पर नहीं किया जाएगा। दि हिंदू अखबार में छपी रिपोर्ट ने भी इस क्लीनिकल ट्रायल की पुष्टि की गयी है। एम्स में तैनात श्वास रोग विशेषज्ञ एसोसिएट प्रोफेसर रुचि दुआ ने बताया क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। संस्थान में पर शोध करने वाले एक पोस्ट डाक्टोरल शोधार्थी भी इसमें शामिल हैं। स्वास्थ के विभिन्न मानकों को मापा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जून माह तक में रिपोर्ट तैयार होगी।

क्लीनिकल ट्रायल के लिए फिलहाल तीन लाख का फंड दिया गया है। सफल होने पर इसके प्रचार प्रसार और विशेषज्ञों को कोविड अस्पातलों में रखने के लिए यह राशि बढ़ायी जा सकती है। दवाओं और टीके के साथ ही भारत की कोविड19 के इलाज की रणनीति में आयुर्वेद, योग को भी शामिल किया गया है। विशेषतौर पर उन लोगों के लिए जिनमें लक्षण नहीं हैं या फिर हल्के लक्षण हैं। यहां पर उल्लेखनीय है कि विज्ञान और तकनीक विभाग द्वारा इस संक्रमण पर योग और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करने वाले अध्ययनों को भी फंड दिया गया है।

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