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बस्ती-बस्ती, द्वारे-द्वारे : संघर्ष और विल पॉवर के सहारे हम सारे विकास के काम कराकर ही मानेंगे- अमिताभ वाजपेयी

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कानपुर। Beforeprint.in ने शहर के विकास के लिए ‘बस्ती-बस्ती, द्वारे द्वारे’ नाम से एक सीरीज शुरू की है। इसके तहत आपकी पसंदीदा साइट विकास के तमाम सवाल लेकर जनप्रतिनिधियों, अफसरों और आपके पास पहुंच रही है। इसी क्रम में आज हमारे न्यूज एडीटर पुलिन त्रिपाठी ने बात की आर्यनगर के विधायक अमिताभ वाजपेयी से। पेश हैं बातचीत के कुछ अंश-

Beforeprint.in : शहर की तमाम सड़कें एक बार फिर मरम्मत मांग रही हैं। पानी न आने की समस्या और गर्मी में बिजली गुल होने की बात आम है। ऐसे में आप विपक्ष में बैठ कर कैसे विकास की बात करेंगे?

वि. अमिताभ वाजपेयी : लोकतंत्र में जितना सत्ता पक्ष जरूरी है उतना ही विपक्ष भी। हम अपनी इच्छा शक्ति के दम पर जनता की अपेक्षा पर खरा उतरने का प्रयास करते हैं। जैसा कि हमने पिछले कार्यकाल में किया था। तभी तो जनता ने दोबारा हमें चुना। अगर एक बार में हमारे विकास के प्रस्ताव को नहीं सुना गया तो अनेक प्रयास करेंगे पर जनता की आकांक्षा पर खरे जरूर उतरेंगे। संघर्ष और विल पॉवर के सहारे हम सारे विकास के काम कराकर ही मानेंगे।

Beforeprint.in : ऐसा पाया गया है कि तमाम सरकारी विभाग सत्तापक्ष की तुलना में विपक्ष की बातों को अनसुना कर देता है। ऐसे में आप क्या करेंगे?

वि. अमिताभ वाजपेयी : सत्ता में होने पर नीतिगत फैसले लेने में आसानी तो होती ही है। पर विपक्ष में रहते हुए भी विकास की बात की जा सकती है। हो सकता है विकास प्रस्ताव की स्वीकृति एक बार में न मिले तो हम कई बार मंत्रियों से मिलेंगे पर विकास से कोई समझौता हम नहीं कर सकते। चाहे हमें विधानसभा द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करना पड़े। इसमें कोई अड़चन मुझे महसूस नहीं होती।

Beforeprint.in : कल सपा मुखिया अखिलेश यादव ने जहांगीरपुरी और अलवर में अपने दल का एक प्रतिनिधि मंडल मौका मुआयना करने के लिए भेजना चाहा था। जिस पुलिस ने रोक दिया। इस बारे में आपका क्या कहना है?

वि. अमिताभ वाजपेयी : लोकतंत्र के लिए यह व्यवस्था अच्छी नहीं है। अगर आपने कुछ गलत नहीं किया है तो विपक्ष को भी मौके पर जाने दें। अगर आप नहीं जाने दे रहे तो इसका मतलब है कि आप कुछ छिपा रहे हैं। आपने या आपके तंत्र ने कुछ गलत किया है। यह तानाशाही लोकतंत्र में नहीं चल सकती है।

यदि कोई ऐसी घटना हुई है जिसका सरोकार सीधे तौर पर जनता से है तो विपक्ष या किसी को घटनास्थल पर रोकने का कोई कारण नहीं। सरकार चाहे दिल्ली की हो या राजस्थान की यह रवैया अच्छा नहीं। शायद प्रचंड बहुमत के कारण सरकारें इस बात को भूल गईं हैं और निरंकुश हो गईं हैं।

Beforeprint.in : तो क्या आप कहना चाहते हैं प्रचंड बहुमत मिलना गलत है? क्या आप और सपा मुखिया नहीं चाहते कि उन्हें भी कभी प्रचंड बहुमत मिले?

वि. अमिताभ वाजपेयी : अगर कभी प्रचंड बहुमत मिलता है तो हम तो विपक्ष की भूमिका और गरिमा का भी खास ख्याल रखेंगे। क्योंकि लोकतंत्र में ऐसा करना बहुत जरूरी है। जनता का भरोसा भी कायम रखने की कोशिश की जाएगी।

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