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बिहार : पटना हाईकोर्ट ने एडीजे अविनाश कुमार के न्यायिक कार्य करने पर लगाई रोक

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मधुबनी/राजीव। पटना हाईकोर्ट ने बिहार के मधुबनी जिलांतर्गत झंझारपुर सिविल कोर्ट के एडीजे (प्रथम) अविनाश कुमार के न्‍यायिक कार्य करने पर रोक लगा दी है। साफ शब्‍दों में कहें तो हाईकोर्ट द्वारा अविनाश कुमार के पावर सीज करने का आदेश जारी किया गया है।

जमानत देने के लिए अनोखी शर्त रखने वाले मधुबनी जिले के झंझारपुर सिविल कोर्ट के एडीजे अविनाश कुमार अब न्यायिक कार्य नहीं कर सकेंगे। जानकारी के अनुसार बीते दिनों झंझारपुर सिविल कोर्ट के जज अविनाश कुमार ने कुछ ऐसे फैसले सुनाए थे, जो सुर्खियों में हैं। उनके कई फैसले आज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। उन्होंने मधुबनी के एसपी के खिलाफ टिप्पणी करते हुए उन्हें सही ट्रेनिंग दिये जाने का आदेश पारित किया था।

उन्होंने भेजा थाने में दर्ज मामले में चाकू से हमला कर घायल करने के एक आरोपी मोहम्मद सज्जाद को घर में एक कुत्ता पालने एवं गली में घूमने वाले पांच कुत्तों को 45 दिनों तक भोजन कराने की शर्त पर जमानत दी। घर में घुसकर दुष्कर्म का प्रयास करने के आरोपी ललन कुमार साफी को गांव की महिलाओं के कपड़े छह महीने तक मुफ्त धोने एवं आयरन करने की शर्त पर जमानत दी।

मारपीट करने के आरोपी एवं दूध के कारोबारी शिवजी मिश्रा एवं अशोक मिश्रा को गांव के पांच दलित परिवार के कुपोषित बच्चों को छह महीने तक प्रतिदिन आधा आधा लीटर दूध देने की शर्त पर जमानत दी। घर में घुसकर महिला की पिटाई करने के आरोपी महेंद्र यादव को गांव के सार्वजनिक जगहों पर 10 फलदार पौधे लगाने की  शर्त पर जमानत दी।

पानी बहाने के विवाद में मारपीट के आरोपी मोहम्मद रुस्तम को मोहल्ले की नाली सफाई करने की शर्त पर जमानत दी। सरकारी अनाज की कालाबाजारी करने के आरोपी को अपने गांव के 25 गरीब परिवारों को दो दो किलो दाल देने की शर्त पर जमानत दी। अवैध हथियार रखने के आरोपी राज मिस्त्री को अपने गांव के मंदिर में एक महीने तक मुफ्त में काम करने की शर्त पर जमानत दी।

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वहीं भैरव स्थान थाना में दर्ज एक लड़की के अपहरण के मामले में पुलिस की ओर से सही धारा न लगाने पर डीएसपी, एसपी एवं थाना अध्यक्ष के अलावा एक न्यायिक अधिकारी से सवाल पूछा और मधुबनी के एसपी डॉ. सत्य प्रकाश के खिलाफ डीजीपी, होम मिनिस्ट्री, राज्य और केंद्र सरकार को खत लिखा  है। कोर्ट ने इस खत में लिखा है कि मधुबनी के एसपी को कानून एवं सुसंगत धारा लगाने की सही जानकारी नहीं है। उन्हें आईपीएस ट्रेनिंग सेंटर और हैदराबाद में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाए।

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