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कानपुर : ‘प्रकृति का विनाश होगा तो मानव जीवन भी समाप्त होगा’

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कानपुर/बीपी प्रतिनिधि। लोक सेवक मण्डल के तत्वावधान में हरिहरनाथ शास्त्री भवन खलासी लाईन, कानपुर में ‘भारत की विरासत के लिए समाज को आगे आना होगा’ विषयक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मौके पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि हमारी विरासत जल, जंगल, जमीन, मिट्टी, हवा, बहती हुई नदी, तालाब, पाखर, झील सभी विरासतों में बिगाड़ हो रहा है।

चारो ओर इन संसाधनों के ऊपर संकट दिखाई दे रहा है। भारत की नदियां धीरे-धीरे सूखकर खत्म हो रही हैं। उनका जीवन आस्तित्व संकट में है। चारो ओर अतिक्रमण, प्रदूषण और शोषण हो रहा है।
हम जानते हैं कि यदि यह प्रकृति का विनाश होगा तो मानव जीवन भी समाप्त होगा। आज आधुनिक शिक्षा के कारण प्रकति में विनाश हो रहा है। इसके लिए हमारे भारतीय ज्ञान तंत्र व विद्या को जोड़कर समझकर अपने शरत को स्वालंबी बनाकर विरासत को बचाना होगा।

इन विरासत को बचाने के लिए पूरे भारत में 22 सितम्बर 2021 मदुरई में विरासत स्वराज यात्रा शुरू की है जिराके तहत अब तक हम भारत में 20 से अधिक राज्यों में यात्रा कर चुके हैं। इस यात्रा का नेतृत्व कर रहे भारत के प्रख्यात पर्यावरणविद, रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित स्टॉक होम वाटर प्राइज विजेता (जल का नॉवेल पुरूस्कार) भारत के जलपुरूष डॉ० राजेन्द्र सिंह आज उत्तर प्रदेश लखनऊ में आए है।

इसके बाद कानपुर, फतेहपुर, प्रतापगढ़, इलाहाबाद और फिर बनारस जाएंगे। जहां समाज के लोगों के साथ संवाद करेंगे और इस साझी विरासत को बचाने के लिए लोगों को जागरूक और आवाहन करेंगे।
हम सब जानते हैं कि भारत को 2050 में अपनी मौजूदा खपत का डेढ़ गुना पानी चाहिए। लेकिन यह जानते हुए भी हम अपने भविष्य की चिंता के प्रति जागरूक नहीं है। हमारा भूगर्भीय जल तेजी से घट रहा है। सतही जल का प्रबंधन ठीक से नहीं हो पा रहा है।

यह आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती है। लेकिन इस तत्व को जानते हुए भी हम सब अनभिज्ञ है। पिछले मनीने जलपुरूष राजेन्द्र सिंह ने साउथ अफ्रीका के नैरोबी, केन्या, सोमालिया, साउथ सूडान आदि देशों की यात्रा की थी। जहां हमने पाया कि बिन पानी लोग उजड़ रहे हैं। गंभीर सखे के कारण जानवर भूख और प्यास से मर रहे हैं। बहुत गंभीर अकाल है। जीवन नष्ट हो रहा है। अब यह जल संकट दुनिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है।

भारत में भी यह संकट आ चुका है लेकिन हमें दिखाई नहीं दे रहा है। हमने इस संकट के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए एक व्यपक जल साक्षरता अभियान शुरू किया है। जिसके तहत विरासत स्वराज यात्रा के माध्यम से हम समाज के सभी वर्गों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। पैसे से पानी का काम नहीं किया जा सकता है, पानी के काम करने के लिए समर्पित और संगठित, सामुदायिक विकेंद्रित प्रबंधन के प्रयास की आवश्यकता है। समाज जब तक पानी के प्रति खड़ा नहीं होगा, तब तक भारत पानीदार नहीं होगा।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता दीपक मालवीय, अध्यक्ष, लोक सेवक मण्डल और संचालन सुरेश गुप्ता, अध्यक्ष, उ.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग महासंघ ने किया। कार्यक्रम में राम किशोर बाजपेयी, अरविन्द भाई, राकेश, राघवेन्द्र, प्रभात बाजपेयी. जगदम्बा भाई, कमलकान्त शशि कौशिक, महेश शर्मा, मोना सूद, कानपुर विश्वविद्यालय के एमएसडब्ल्यू के छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।

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