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कानपुर : बुढ़वा मंगल के दिन पनकी मंदिर में अमंगल, संतों में हुआ झगड़ा

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अखिलेश मिश्रा/कानपुर। पनकी का श्री पंचमुखी हनुमान का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंदिर में दो महामंडलेश्वर के बीच वर्चस्व की लडाई खुलकर सामने आ गयी है। आज बुढ़वा मंगल के दिन बडी संख्या में भक्त बाबा के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे हैं।

अपने-अपने भक्तों को दर्शन कराने का जिम्मा मंहामडलेश्वर के शिष्य लिए रहते हैं। आज जब पर्व के कारण परिसर में भीड थी। तो अपने-अपने यजमानों को दर्शन कराने की होड शिष्यों के बीच मच गयी। इस बात को लेकर दोनों महामंडलेश्वर के शिष्य आपस में उलझ गये। विवाद तेज आवाज के साथ मंदिर परिसर में होने लगा, जिसे सुनकर दोनों महामंडलेश्वर भी आ गये और अपने-अपने शिष्य का फेवर करते हुए झगडने लगे।

विवाद बढकर मारपीट तक पहुंचने वाला ही था कि स्थानीय थाना फोर्स मौके पर पहुंच गयी और समझाकर मामला शांत कराया। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर कार्यवाही करने का दवाब अधिकारी पर बनाा रहे थे। बुढवा मंगल के दिन आज पनकी पंचमुखी मंदिर में भक्तों की अत्याधिक भीड़ थी। मंगला आरती के बाद दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। शिष्य अपने-अपने भक्तों को दर्शन कराने के लिए मंदिर में पीछे के दरवाजे से अंदर जाने लगे।

इसी बात को लेकर महंत कृष्ण्दास और जितेन्द्र दास के शिष्य आपस में कहासुनी के साथ भिड़ गये। तेज आवाज में कहासुनी होने लगी। झगड़े की आवाज सुनकर दोनों महंत भी बाहर आ गये और आपस में कहासुनी के साथ उलझ गये। मामला मारपीट की तरफ बढने लगा। इसी बात किसी ने मंदिर से थाना पनकी को फोन कर दिया।

चूकि पर्व के कारण मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था देखने के लिए पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात था। तत्काल मंदिर प्रांगण में फोस पहंुच गया और दोनों पक्षों के लोगों को शांत कराया। मंदिर के पीछे वाले रास्ते को भी बंद करा दिया। मंहत कृष्णदास ने बताया कि वेद पाठशाला के कुछ शिष्यों के साथ कुछ अराजक तत्व मंदिर में आकर यहां की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे है, जो पूरी तरह गलत है।

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इस तरह के विवाद होने से मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचती है। जबकि, महाराज जितेन्द्रदास ने कहा कि वेद पाठशाला के बच्चे दर्शन करने गये थे जिनसे यहां पर तैनात सेवादारों ने अभद्र व्यवहार किया, जिस कारण विवाद की स्थिति बनी।

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