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शौर्य, साहस, स्वाभिमान और वीरता के प्रतीक थे महाराणा प्रताप : अभय

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शिवहर/रविशंकर सिंह। जिला शिक्षक न्याय मोर्चा के तत्वावधान में महाराणा प्रताप के 423 वीं पुण्यतिथि मनाते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस दौरान उनकी तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

इस अवसर पर मोर्चा के प्रदेश महासचिव अभय कुमार सिंह एवं जिला संयोजक राधेश्याम सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप परम प्रतापी, प्रचंड शक्तिशाली, मेधावी, कठोर से कठोर आघात को वीरता पूर्वक सहने की अद्भुत क्षमता के प्रतीक हैं। सिसोदिया वंश के सूर्य, भारत भूमि के गौरव महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को मेवाड़ प्रांत में हुआ था।

महाराणा प्रताप की वीरता , युद्ध कौशल , अपार शक्ति के धनी एवं उनके युद्ध कौशल में प्रवीण सहयोगी चेतक को दुनिया आज भी सलाम करती है। संपूर्ण मुगल सल्तनत एवं मुगल सम्राट अकबर भी महाराणा प्रताप की वीरता के प्रशंसक थे। महाराणा प्रताप का जीवन परिचय एवं चरित्र चित्रण अद्वितीय है, जो इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है।

उन्होंने कहा कि महाराणा हारे नहीं, अकबर जीता नहीं। जब बड़े-बड़े राजे महाराजे इनका साथ देने नहीं आए, तब आदिवासी समाज से भील झाला सरदार और वैश्य समाज से भामाशाह जैसे राष्ट्रभक्तों ने मुगलों से लोहा लेने के लिए महाराणा प्रताप का साथ दिया और हल्दीघाटी के मैदान में मात्र 25 हजार सैनिकों को लेकर अकबर के 85 हजार सैनिकों के परखच्चे उड़ा दिए।

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आज हमें भी इन जैसे राष्ट्रभक्त बनने और बनाने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। मौके पर सुनील कुमार सिंह, आशीष रंजन, हर्ष रंजन, शिवम सिंह समेत अन्य ने भी महाराणा प्रताप के तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पितकिया।

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