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मुजफ्फरपुर : शहर की नारकीय स्थिति और झुग्गी-झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाने के खिलाफ माले ने निकाला प्रतिवाद मार्च

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मुजफ्फरपुर/ब्रह्मानंद ठाकुर। शहर में अतिक्रमण के नाम पर झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों व फूटपाथ दूकानदारों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई एवं सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ माले ने आज शहर में प्रतिवाद मार्च निकाला। इस दौरान शहर को मौत व तबाही के गढ्ढ़ों में बदल देने के खिलाफ नारे भी लगाए गए।

स्मार्ट सिटी और सौन्दर्यीकरण के बहाने गरीबों को उजाड़ने पर रोक लगाने तथा जो जहां बसे हैं, उन गरीब परिवारों को जमीन का पर्चा देने की गारंटी करने की मांग सरकार से की गई। यह भी मांग की गई कि शहर को मौत व तबाही के गढ्ढ़़ों में बदल देने वाले अधिकारियों व कंपनी पर सख्त कारवाई की जाए तथा दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। इसके लिए जिम्मेवार नगर प्रशासक पर भी कारवाई की मांग की गई।

माले का प्रतिवाद मार्च हरिसभा चौक स्थित माले कार्यालय से निकल कर शहर के कई मुख्य मार्गों से गुजरा। मार्च में माले नगर सचिव सूरज कुमार सिंह, ऐक्टू जिला संयोजक मनोज यादव, शहनवाज हुसैन, अफसना खातुन, बिलकिश बानो, नूरजहां खातुन, जरीना खातुन, सुरेश ठाकुर, विनय कुमार वर्मा, राजकिशोर प्रसाद, विजय गुप्ता, धनंजय कुमार, मुकेश कुमार, मुनिम महतो, दशरथ दास, मो. इरशाद सहित बड़ी संख्या में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले महिला-पुरूष व अन्य लोग शामिल थे।

प्रतिवाद मार्च को संबोधित करते हुए माले नेता सूरज कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली व यूपी की तरह बिहार में भी बुलडोजर राज की साजिश है। अतिक्रमण तो बहाना है वस्तुतः पटना-दिल्ली की सरकार गरीबों व अल्पसंख्यकों के जीने व बसने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों को ही बुलडोजर से ध्वस्त करने में जुटी हुई है। लेकिन बुलडोजर राज को जनता कतई स्वीकार नहीं करेगी। इसके खिलाफ जनप्रतिवाद और तेज होगा।

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अन्य वक्ताओं ने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर के रास्तों को मौत के नालों में बदल दिया गया है। आये दिन लोग मौत के शिकार हो रहें हैं। शहर से गुजरना आफत बन गया है। घंटों-घंटों लोग जाम में फंसे रहते हैं। दूकानदारों का व्यवसाय चौपट हो गया है। लेकिन सरकार व प्रशासन को इसकी परवाह नहीं है। ऐसा लगता है कि ठेकेदारों और कन्स्ट्रक्शन कंपनी के सामने प्रशासन नाम की कोई चीज ही नहीं रह गई है। यह आम नागरिकों के सामान्य जीवन जीने के अधिकारों पर भी हमला है।

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