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पश्चिम चंपारण : संगोष्ठी में ‘उपेक्षित एवं पिछड़े उत्तर बिहार’ के विकास की रणनीति पर की गयी परिचर्चा

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बेतिया/अवधेश कुमार शर्मा। पश्चिम चम्पारण मुख्यालय बेतिया स्थित एक होटल के सभागार में ‘बिहार विमर्श’ नामक संस्था ने ‘उपेक्षित एवं पिछड़े उत्तर बिहार’ के विकास की रणनीति पर परिचर्चा सह संगोष्ठी आयोजन बुधवार को किया। उत्तर बिहार के पिछड़ेपन और गरीबी के कारण पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। संयोजक डॉ. शंभू शरण श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार तो पिछड़ा है, उसमें उत्तर बिहार की स्थिति अतिदयनीय है।

खेती, बाढ़, सुखाड़ और सरकारी उदासीनता के चलते और अलाभकारी साबित होते जा रहे हैं। बाढ़ की विभीषिका मुख्यत: बांधों के चलते हैं। बिहार के श्रम व बौद्धिक संपदा का पलायन 2005 से आजतक नहींरुक सका है। पलायन को मुद्दा बनाकर सत्ता पर कब्जा जमाने वाले नीतीश कुमार पलायन रोकने में नाकाम साबित हुए हैं।

बिहार से 3 करोड़ का पलायन होता है, यह बिहार की आर्थिक स्थिति का आईना है। दो तिहाई आबादी उत्तर बिहार में है, लेकिन दो तिहाई बजट दक्षिण बिहार पर खर्च होता है। प्रोफेसर अनिल मिश्र ने कहा कि भारत में बिहार पिछड़ेपन का टापू बन गया है। ‘बिहार विमर्श’ ने कहा कि क्षेत्र की जनता मांग पत्र को सांसद विधायकों को दे।

उनसे 1 वर्ष में आय एवं व्यय का रिपोर्ट कार्ड मांगे। नागरिक समाज के अनिल सिन्हा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की कोई भी बात राष्ट्रीय हो जाती है, श्री सिंह ने पूर्व सिंचाई मंत्री के समय बिहार के विकास पर बनी कमेटी को लागू करने की मांग की। कई वक्ताओं ने खेती उद्योग और शिक्षा स्वास्थ्य सेवा की कुव्यवस्था पर प्रश्न उठाया।

बिहार के लोगों को ध्यान देकर स्कूल अस्पताल के संचालन को ठीक कराना होगा। बिहार की दो तिहाई आबादी उत्तर बिहार है, फिर भी बजट दक्षिण बिहार से कम क्यों ? पत्रकार राजीव रंजन ने कहा कि बिहार की सरकार भी मीडिया को वर्तमान सरकार ने परोक्षतः प्रतिबंधित कर सही समाचार नहीं आने देती।

आरजीएफ के राजीव रंजन ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि कुपोषित बच्चे और स्त्रियां उत्तर बिहार में सबसे अधिक है। वक्ताओं ने बंद चीनी मिलों के संचालन पर सत्कार को घेरा, उन्होनको कहा कि , बिहार के 22 चीनी मिलों में मात्र 10 कार्यरत हैं, शेष चीनी मिलों को बीमारु या मृत चीनी मिलकहा जा सकता है। प्रो रवींद्र कुमार चौधरी ने मुख्यतः उच्च शिक्षा की व्यवस्था सुदृढ़ करने पर बल दिया।

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संगोष्ठी में जिला के प्रत्येक क्षेत्र के लोग शामिल रहे। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से राजनीतिक सामाजिक सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि आर्थिक पिछड़ेपन ने समाजिक संस्कृति विकृतियाँ पैदा की है। उपर्युक्त गोष्ठी में शामिल वक्ताओं में प्रेम कुमार मणि पूर्व विधान पार्षद सह-संयोजक, विजय प्रताप सह- संयोजक, शाहिद कमाल सह- संयोजक, विजय प्रताप सह- संयोजक, इरशाद अहमद, मोहम्मद कमरान, प्रभुराजनारायण राव, शिवजी प्रसाद, ओमप्रकाश क्रांति, सुरैया साहब, तबस्सुम, अशोक प्रियदर्शी, पंकज चौधरी, योगेंद्र सिंह, जगदेव प्रसाद, अमरेन्द्र श्रीवास्तव, मो. आलमगीर हुसैन व कई बुद्धिजीवी ‘बिहार विमर्श’ की परिचर्चा में शामिल हुए।

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