चंपारण: पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर वेदों से लेकर विनोवा तक का प्रभाव हैं परिलक्षित- मिश्र

मोतिहारी/राजन दत्त द्विवेदी: पं. दीनदयाल उपाध्याय के पुण्यतिथि पर उनके दर्शन पर भारतीय चिंतन का प्रभाव विषय पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो कौशल किशोर मिश्र का विशिष्ट व्याख्यान आयोजित हुआ। कार्यक्रम का आयोजन पं दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ और गांधी शोध केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। प्रो. मिश्र ने बताया कि पंडित जी का समूचा दर्शन भारतीय चिंतन से अनुप्राणित है।



चूंकि भारतीय चिंतन संकीर्णता में नहीं बल्कि विस्तृत रूप में वस्तुओं, परिघटनाओं, व्यक्तियों, समुदाय आदि को देखता है। इसलिए पंडित जी का दर्शन विस्तृत फ़लक लिए हुए है। उन्होंने बताया कि पंडित जी पर वेदों से लेकर विनोवा तक का प्रभाव परिलक्षित होता है। वर्तमान समय में पं दीनदयाल जी के विचारों के महत्व और प्रासंगिकता को भी प्रो. मिश्र ने गहरे से रेखांकित किया। कार्यक्रम की शुरूआत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा के संबोधन से हुई।

विषय प्रवेश विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. जी. गोपाल रेड्डी ने किया। अतिथियों का स्वागत विश्वविद्यालय के सह-आचार्य और पं दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के समन्वयक डॉ नरेंद्र कुमार आर्या ने और धन्यवाद ज्ञापन समाज विज्ञानपीठ के अधिष्ठाता प्रो. राजीव कुमार ने किया। मौके पर विश्वविद्यालय के सभी आचार्य, सह-आचार्य एवं सहायक-आचार्य गूगल मीट के माध्यम से जुड़े रहे। कार्यक्रम का संचालन गांधी शोध केंद्र के समन्वयक डॉ. अम्बिकेश कुमार त्रिपाठी ने किया।