पत्रकारों को मिल रहे भद्दे मैसेज और अश्लील फोटो, रवीश का सवाल-माँ-बहन की गालियों पर मां-बहन ही चुप हैं, क्यों?

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सेंट्रल डेस्क : पुलवामा हमले के बहाने देश के कई पत्रकारों को उनके व्हॉट्सएप नंबर और सोशल मीडिया पर भद्दी-भद्दी गाली दी जा रही हैं. सिर्फ गालियां ही नहीं पत्रकारों को अश्लील फोटो भी भेजे जा रहे हैं. इस ‘ऑर्गेनाइज्ड हेट क्राइम’ का शिकार हुईं वरिष्ठ महिला पत्रकार बरखा दत्त ने इस मुद्दे को उठाया है.

पुलवामा में 40 जवानों के शहीद होने के बाद देशभर से कश्मीरी लोगों के हैरासमेंट की खबरें आने लगीं. ऐसे में बरखा दत्त जैसे कई सीनियर पत्रकारों ने ट्विटर पर कश्मीरी लोगों की मदद के लिए आह्वान किया. बरखा ने कश्मीरी लोगों को अपने घर में शरण देने की बात ट्विटर पर लिखी, साथ ही उन्होंने वहां अपना फोन नंबर भी शेयर किया. जिसके बाद से उन्हें उनके नंबर पर गालियां दी जाने लगीं.

सोमवार को बरखा दत्त ने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए ट्वीट किया, उन्होंने डीसीपी मधुर वर्मा को भी टैग किया. डीसीपी ने ट्विटर पर जवाब देते हुए लिखा कि पुलिस इसकी जांच में जुटी हुई है.

अभिसार शर्मा, पूर्व एबीपी न्यूज पत्रकार जो अब NewsClick.in के साथ काम कर रहे हैं, उन्होंने भी दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की मांग की. उन्हें भी पर्सनल मैसेज करके गालियां दी जा रही हैं.

रवीश कुमार, अभिसार शर्मा और स्वाति चतुर्वेदी जैसे कई सीनियर पत्रकारों ने व्हॉट्सएप पर मिल रही धमकियों और गालियों को लेकर शिकायत की थी. स्वाति चतुर्वेदी ने एक ट्वीट में कहा कि पत्रकारों की एक ‘हेट लिस्ट’ बनाई गई है जिसमें पत्रकारों के फोन नंबर लिखे हैं और उन्हें टार्गेट बनाते हुए एक साजिश के तहत गालियां दी जा रही हैं.

रवीश कुमार ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि देशभक्ति के नाम पर गालियों पर छूट मिल रही है. दो चार लोगों को ग़द्दार ठहरा कर हज़ारों फोन नंबरों से गालियां दी जा रही हैं. भारत में देशभक्त तो बहुत हुए मगर गाली देने वाले ख़ुद को देशभक्त कह सकेंगे यह तो किसी देशभक्त ने नहीं सोचा होगा.

इन गालियों से मुझे देने वाले की सोच की प्रक्रिया का पता चलता है. माताओं और बहनों के जननांगों के नाम दी जाने वाली गालियों से साफ़ पता चलता है कि उन्हें औरतों से कितनी नफ़रत है. इतनी नफ़रत है कि नाराज़ मुझसे हैं और ग़ुस्सा मां-बहनों के नाम पर निकलता है. कभी किसी महिला ने गाली नहीं दी. गाली देने वाले सभी मर्द होते हैं. ये और बात है कि गाली देने वाले ये मर्द जिस नेता और राजनीति का समर्थन करते हैं उसी नेता और दल को लाखों की संख्या में महिलाएँ भी सपोर्ट करती हैं. पता नहीं उस खेमे की महिला नेताओं और समर्थकों की इन गालियों पर क्या राय होती होगी.

मैंने देखा तो नहीं कि उस खेमे की महिला नेताओं और समर्थकों ने कभी इन गालियों का प्रतिकार किया हो. विरोध किया हो. यहाँ तक कि जब महिला पत्रकारों को गालियाँ दी जाती हैं उसका भी विरोध नहीं करती हैं. इस तरह माँ बहन की गालियाँ देने वालों को उस दल की माँ बहन का भी समर्थन प्राप्त हैं. पहली बार माँ और बहने माँ बहनों के नाम पर दी जाने वाली गालियों का समर्थन कर रही हैं. उस दल की सभी माँ बहनों को मैं अपनी माँ और बहन मानता हूँ.