Big story :एसिड से झुलसी प्रमोदिनी की लवस्टोरी रंग लायी, सरोज से विवाह एक मार्च को

भुवनेश्वर (महेश शर्मा ) : इसी एक मार्च (2021) को प्रमोदिनी राउल और सरोज साहू विवाह के पवित्र बंधन में बंध जाएंगे। इसके बाद उनकी लव स्टोरी को सामाजिक मान्यता मिल जाएगी। इक तरफा प्रेम में पागल उसके पड़ोसी ने चांद सा चेहरा वाली प्रमोदिनी के चेहरे पर छपाक से तेजाब फेंककर बुरी तरह झुलसा दिया था। यह घटना ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले की है।



कटक में इलाज के दौरान प्रमोदिनी उसकी तीमारदारी में लगे सरोज साहू उसे दिल दे बैठे। प्रमोदनी के दिल में भी सरोज के लिए प्यार जाग उठा। दोनों ही इजहार करने के उचित मौके की तलाश में थे। उनका प्यार परवान चढ़ता गया।

प्रमोदिनी इलाज के लिए बेड पर थी। बिना सहारे के दो कदम भी चलना मुश्किल था। इन हालात में सरोज उसके जीवन में रोशनी बनकर आया। इलाज से लेकर हर चीज का ख्याल रखा। चार महीने के भीतर उसे आराम मिला। फिर प्रमोदनी शिरोज के फाउंडर्स के टच में आ गईं।

वर्ष 2018 में दोनों ने शिरोज कैफे लखनऊ में एक समारोह में सगाई कर ली। शिरोज कैफे में उसने काम भी किया। इस दौरान सरोज उसके संपर्क में रहा। दोनों ने कोर्ट मैरिज करके मैरिज सर्टिफिकेट हासिल कर लिया। इस विवाह को सामाजिक मान्यता दिलाने के लिए सोशल वर्कर शुभाश्री दास की पहल पर वैवाहिक कार्यक्रम तदोपरांत रिसेप्शन आयोजन किया जाएगा।

एक मार्च को कटक में विवाह संपन्न होगा और दो मार्च को भुवनेश्वर में विवाहोपरांत पार्टी दी जाएगी। शुभाश्री का दावा है कि इस विवाह में भुवनेश्वर में रहने वाली हस्तियां प्रमोदिनी और सरोज को आशीर्वाद देने को शामिल होंगी। प्रमोदनी और सरोज के विवाह के निमंत्रण कार्ड भी वितरित किए जा रहे हैं। इस विवाह की चर्चा है। प्रमोदिनी को तो जैसे ओडिशा की बेटी मान लिया गया हो। सरोज के भी इस साहसिक कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है। दोनों के प्यार को लोग सैल्यूट कर रहे हैं।

एसिड अटैक से प्रमोदनी का चेहरा बुरी तरह झुलसा है। उसकी नेत्र ज्योति भी 60 प्रतिशत ही बची है। विवाह में दोनों पक्ष से परिवार के सदस्य भी शिरकत करेंगे। प्रमोदिनी जब छोटी थीं तभी उनके पिता गुजर गए थे। हालांकि कहा जाता है कि एसिड अटैक सर्वाइवर होने के कारण उन्हें परिवार से उतना सपोर्ट नहीं मिला जितना मिलना चाहिए था। ऐसे में सरोज ने ही उसे पूरा सपोर्ट किया। सरोज ने भी अपने परिवार में प्रमोदिनी के बारे में बता दिया है। विवाह में उनके परिवार के कुछ सदस्य भी आएंगे।

आपको बताते चलें कि 2009 में जगतसिंह पुर जिले में प्रमोदिनी उर्फ रानी पर उनके पड़ोसी ने एसिड अटैक किया था। वह उनसे एकतरफा प्यार करता था। तब प्रमोदिनी की जिंदगी का सोलहवां साल लगा था और इंटर में पढ़ती थी। बताते हैं कि एसिड से झुलसी प्रमोदिनी कटक के मेडिकल कालेज अस्पतालल में काफी दिनों तक कोमा में रहीं। इंसाफ की लंबी लड़ाई के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था वह जेल में है।

पढि़ए यह रिपोर्ट

एक रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा में एक रिपोर्ट के अनुसार 2011 से 2019 तक ओडिशा में एसिड अटैक के 70 मामले प्रकाश में आए। एसिड सर्वाइवर पर बनी फिल्म छपाक ने इन पीड़िताओं को लेकर राहत एवं पुनर्वासन पर नई बहस छेड़ दी। दीपिका पादुकोण के जबरदस्त अभिनय का असर एसिड पीड़िताओं को राहत पर पड़ा। कई संगठन इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

प्रमोदिनी समेत अन्य एसिड पीड़िताओं को राहत एवं पुनर्वासन के क्षेत्र में सक्रिय इंस्टीट्यूट फॉर सोशल डेवलेपमेंट एंड टीम की निदेशक शुभाश्री दास का कहना है कि यदि सरकार थोड़ी सहायता कर दे तो एसिड सर्वाइवरों को आत्म निर्भर बनाया जा सकता है। शिरोज नाम संस्था दिल्ली में यह काम कर रही है तो ओडिशा में क्यों हो सकता। ऐसे बहुत से संवेदनशील लोग हैं जो मदद करना चाहते हैं।

ओडिशा जैसे राज्य में एसिड पीडि़ताओं के राहत एवं पुनर्वासन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि शुभाश्री दास जैसी सामाजिक कार्यकर्ता इस दिशा में प्रयासरत हैं, लेकिन उचित सहयोग न मिलने के कारण उनका जोश थोड़ा शिथिल पड़ा था पर छपाक की रिलीज और प्रमोदिनी के पुनर्वासन में सफलता ने उनके प्रयासों को नई दिशा दी है।

ओडिशा के लिए बना प्रोजेक्ट

शुभाश्री दास ने भुवनेश्वर शीरोज कैफे खोलने के लिए प्रोजेक्ट बनाया है। शुभाश्री के पास 59 एसिड अटैक की घटनाओं की रिपोर्ट है। उनके अनुसार प्रोजेक्ट रिपोर्ट की प्रतिलिपि नालको, सलमान खान के फाउंडेशन को सौंपी है ताकि उनकी मदद से शीरोज कैफे इन्हीं एसिड अटैक पीडि़ताओं से चलवाकर उन्हें अपने पांव पर खड़ा होने अवसर दिया जाए।

यही नहीं ओडिशा सरकार के समाज कल्याण विभाग के सचिव को भी दी है। यह कैफे एसिड अटैक पीडि़त महिलाएं चलाती हैं। यूपी के आगरा, लखनऊ में संचालित किया जा रहा है। इससे कई पीडि़ता की जिंदगी बदल गयी। उन्हें जीने का सहारा मिल गया। लखनऊ में तत्कालीन अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल शीरोज कैफे के लिए भूमि व अन्य सुविधाएं मिली थीं।

चौंकाने वाले तथ्य

एक रिपोर्ट के अनुसार तेजाबी हिंसा का उन्मूलन (इरेडिकेशन ऑफ एसिड वॉयलेंस) पर परिचर्चा के दौरान एएसडब्ल्यू डब्ल्यू एफ (एसिड सरवाइवर्स एंड वूमेन वेलफेयर फाउंडेशन) ने यह चौंकाने वाला डेटा पेश किया। इस संस्था के ओडिशा चैप्टर के प्रमुख रहे टीएन पंडा कहते हैं कि उनकी संस्था ने 70 एसिड अटैक सरवाइवर्स में से दस को पूरा सपोर्ट दिया है।

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो डेटा के हवाले से बताया गया है कि 44 प्रतिशत एसिड अटैक सरवाइवर्स सिर्फ उत्तर भारत के हैं तो 27 प्रतिशथ पूर्वी भारत के हैं। ओडिशा भी पूर्वी भारत का राज्य है। शुभाश्री कहती हैं कि पुनर्वासन केंद्र हर राज्य में खोलने की आवश्यकता है। ओडिशा राज्य दिव्यांग आयोग की प्रमुख सुलोचना दास कहती हैं कि एसिड अटैक पीडि़ता के लिए दिव्यांगता कानून में भी प्रावधान है। विभाग उन्हें प्राथमिकता देता है। एसिड अटैक पीडि़ताओं के राहत और पुनर्वासन के लिए हर संभव मदद को तत्पर हैं।

2014 से 2018 के बीच 700 से ज्यादा एसिड अटैक

महिला सम्मान को लेकर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों के बीच पूरे देश में साल 2014 से 2018 के बीच 700 से ज्यादा एसिड अटैक की घटनाएं सामने आई है जिसमें उत्तर प्रदेश में 260, वेस्ट बंगाल में 248, दिल्ली में 114, मध्य प्रदेश में 59, उड़ीसा में 52, पंजाब में 50, आंध्र प्रदेश में 47, हरियाणा में 46, बिहार में 39, और गुजरात में 37 मामले एसिड अटैक के सामने आए हैं। हालांकि यह आंकड़े है जो सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हैं. जबकि दावा यह संख्या असल घटनाओं के मुकाबले बेहद कम है।

ये है कानून

एसिड अटैक मामलों में सरकार ने कड़ा रुख नहीं अपनाया. कानून के मुताबिक एसिड अटैक करने वालो को 10 साल की सजा या उम्र कैद हो सकती हैं। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के मुताबिक एसिड सिर्फ उन्हीं दुकानों में मिल सकता हैं जिनको इसके लिए रजिस्टर्ड किया गया हैं।

बजाय इसके बाजार और दुकानों में एसिड धड़ल्ले से बिक रहा है। जबकि ज्यादातर मामलों में अभियुक्तो की तरफ से पीड़िता को और उसके परिजनों को धमकी दी जाती है।. इस वजह से एसिड की शिकार होने के बावजूद पीड़िता के परिजन पुलिस के पास नहीं जाते।.