शहीदों को श्रद्धांजलि, आतंकियों को खत्म करने की मांग

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सेंट्रल डेस्क: पुलवामा आतंकी हमला से पूरा देश आक्रोशित र् गम में है। जगह जगह शहीदों को श्रद्धांजलि व आक्रोश मार्च निकाले जा रहे हैं। 42 सैनिकों का एक साथ शहीद होना कहीं न कहीं लापरवाही का नतीजा है व इनके जत्थे के जाने के मार्ग का सूचना यह सोचने पर मजबूर करता है कि कहीं तो गड़बड़ी हुई है यही सत्य है। सरकार को सुरक्षा एजेंसियों को आदेश दे कर इसमें हुई गलती को ढूंढ निकाला जाए। ट्राइडेंट सेवा बिहार प्रदेश के अध्यक्ष विवेकानन्द ठाकुर का कहना है कि आज एक तरफ जहाँ संपूर्ण राष्ट्र खून के आंसू रो रहा है वहीं दूसरी तरफ बहावी विचारधारा के समर्थक इस दुःख के घड़ी को जश्न की तरह मना समाज को क्या दिखाना चाहते हैं?

इनकी ऐसी प्रतिक्रिया से कैसे हमारा समाज इनको स्वीकार करेगा। भोजन-जल-भवन तक हमारे देश का उपयोग करते हैं वहीं समय-समय पर हमें सोचने को मजबूर करते हैं कि इनके रक्त में कितनी मिलावट है व इनकी मानसिकता कितनी दूषित है। सबसे पहले समाज इनको बहिष्कृत करे तभी कुछ संभव है। कबतक हम अपने सीने को छल्ली कराते रहेंगे यह चिंता का विषय है। हो सकता है सरकार किसी मजबूरी बस इसको मजबूती से नहीं कर सकती पर हम युवाओं को इन असमाजिक तत्वों के आर्थिक बहिष्कार के लिए आवाज बुलंद करना चाहिए।