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बढ़ रहे हैं महिला विरुद्ध अपराध, दिल दहला गया मुंबई का निर्भया रेप व हत्याकांड

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नम्रता चड्ढा

-11 सितंबर 2021 को मुंबई के साकीनाका क्षेत्र में 30 वर्ष की युवती के साथ रेप किया गया और उसके गुप्तांग पर रॉड से प्रहार किया गया। पीड़िता ने राजावाड़ी अस्पताल में चिकित्सा के दौरान ही दम तोड़ दिया। अब तक एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

-8 सितंबर 2021 को महाराष्ट्र के पुणे में एक नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप किया गया। 14 आरोपियों ने उसे बारी-बारी से अपनी हवस का शिकार बनाया। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। नाबालिग को 31 अगस्त को पुणे स्टेशन से अगवा किया गया था।

-21 अगस्त 2021 को झारखंड के दुमका जिले में एक महिला के रिश्तेदारों ने ही उसे ऐसा दर्द दिया जिसे वो शायद कभी भुला नहीं पाएगी। रानीश्वर थाना इलाके में एक महिला को सरे आम निर्वस्त्र कर जूतों की माला पहनाने के बाद उसे मार-मार कर पूरे गांव के सामने घूमने पर मजबूर किया गया। पुलिस ने अब इस मामले में 6 आरोपियों को शुक्रवार शाम गिरफ्तार कर लिया है।

-3 अगस्त 2021 को सरेआम छेड़छाड़ कर रहे एक मनचले को युवती ने ऐसा सबक सिखाया कि जिंदगी भर याद रखेगा। वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से भागने की कोशिश कर रहे मनचले को युवती ने साहस दिखाते हुए पकड़ा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। दरअसल, छेड़छाड़ के बाद जब युवक ने भागने की कोशिश की, तो लड़की ने झपट्टा मारते हुए उसकी स्कूटी के पिछले टायर को उठाया और फिर उसे नाले में धकेल दिया युवती का नाम भवना कश्यप है।

-30 जुलाई 2021 को छेड़छाड़ जैसी घटनाओं से निपटने के लिए जयपुर की निर्भया टीम ने एक विशेष प्लान बनाया है और प्लान के तहत अब निर्भया टीम मनचलों को सबक सिखाएगी। सुनकर हैरानी होगी राजधानी जयपुर में ऐसे 250 हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां पर सबसे ज्यादा महिला अपराध घटित होते हैं।

-11 अप्रैल 2021 को पुणे में एक कैब ड्राइवर द्वारा महिला आईटी कर्मी से बलात्कार का मामला सामने आया है। 32 वर्षीय पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी कैब ड्राइवर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। महिला का कहना है कि कैब ड्राइवर ने उसके पानी में कुछ मिला दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। उसके बाद एक लॉज में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया गया।

-27 मार्च 2021 को मध्य प्रदेश में बीते 3 सप्ताह के दौरान पतियों द्वारा अपनी पत्नियों के अंग भंग करने के तीन मामले सामने आने के बाद ऐसे मामलों में कठोर कानून बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों के साथ बैठक की। सीएम ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा चिंता का विषय है।

-नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष महिलाओं के खिलाफ (crime against women) 4.05 लाख अपराध दर्ज किए गए हैं। इनमें से 1.26 लाख यानी 30 प्रतिशत से ज्यादा घरेलू हिंसा के मामले थे। सबसे ज्यादा केस राजस्थान में 18,432 केस दर्ज किए गए हैं। यूपी में यह संख्या 18,304 है। कुल दर्ज मामलों में 8 प्रतिशत तो रेप के मामले हैं।

दिल दहलाने वाली ताजी घटना है मुंबई की निर्भया का रेप और हत्या। इस मामले में अबतक एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है। साकीनाका में एक टेंपो के अंदर इस युवती के साथ पहले रेप किया गया और फिर उसपर हमला किया गया। अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार तड़के पुलिस नियंत्रण कक्ष को फोन आया कि खैरानी रोड पर एक व्यक्ति एक महिला की पिटाई कर रहा है। अधिकारी ने बताया कि महिला का पता लगाने के लिए पुलिस टीम मौके पर पहुंची. खून से लथपथ महिला को नगर निगम संचालित राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया।

जहां पर उसकी प्रारंभिक जांच के अनुसार, उसके साथ बलात्कार किया गया और उसके प्राईवेट पार्ट में लोहे की छड़ से हमला किया गया। यह घटना सड़क किनारे खड़े एक टेंपो के अंदर हुई। एक को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 376 (बलात्कार) के तहत गिरफ्तार किया गया और आगे की जांच जारी है। बताते हैं कि प्राइवेट पार्ट में सरिया डालने के कारण महिला की आंत बाहर आ गई थी।

कुछ घटनाएं प्रकाश में आ जाती हैं पर बाकी जो रिपोर्ट नहीं हो पाती हैं वे दबी रह जाती हैं। यही वजह है कि आज भी महिलाओं को घर से लेकर कामकाज तक के मामले में सार्वजनिक स्थानों पर कई तरह की वंचनाओं और भेदभाव का शिकार होना पड़ता है। यह रवैया आगे बढ़ कर हिंसा की अलग-अलग शक्ल में सामने आता है, जिसे समाज में अघोषित तौर पर सहज माना जाता है।

इस मसले पर चिंता तो लगातार जताई जाती रही है, लेकिन आज भी ऐसी संस्कृति नहीं विकसित की जा सकी है, जिसमें महिलाएं अपने अधिकार और गरिमा के साथ सहजता से जी सकें। हालत यह है कि एक ओर देश महामारी के दौर से गुजर रहा है, इससे निपटने के लिए किए जाने वाले उपायों में सबको सहभागिता करनी पड़ रही है, बहुत सारे लोगों को कई तरह की तकलीफें भी उठानी पड़ रही है, दूसरी ओर महिलाओं को बहुस्तरीय उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दरअसल, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ओर से देश के बाईस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए एक ताजा अध्ययन में घरेलू हिंसा में बढ़ोतरी के बीच महिलाओं की मौजूदा स्थिति को लेकर जो तस्वीर उभरी है, वह चिंताजनक है और हमारे अब तक के सामाजिक विकास पर सवालिया निशान है। इस व्यापक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक कई राज्यों में तीस फीसद से ज्यादा महिलाएं अपने पति द्वारा शारीरिक और यौन हिंसा की शिकार हुई हैं।

सबसे बुरी दशा कर्नाटक, असम, मिजोरम, तेलंगाना और बिहार में है। कर्नाटक में पीड़ित महिलाओं की तादाद करीब पैंतालीस फीसद और बिहार में चालीस फीसद है। दूसरे राज्यों में भी स्थिति इससे बहुत अलग नहीं रही है। कोविड-19 महामारी के मद्देनजर ऐसी घटनाओं में तेज इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। यह बेहद अफसोसनाक है कि जिस महामारी की चुनौतियों से उपजी परिस्थितियों से पुरुषों और महिलाओं को बराबर स्तर पर जूझना पड़ रहा है, उसमें महिलाओं को इसकी दोहरी मार झेलनी पड़ रहा है।

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बल्कि कई बार घरेलू हिंसा तक को कई बार सहज और सामाजिक चलन का हिस्सा मान कर इसकी अनदेखी करके परिवार के हित में महिलाओं को समझौता कर लेने की सलाह भी दी जाती है। ऐसे में घरों की चारदिवारी में पलती हिंसा एक संस्कृति के रूप में ठोस शक्ल अख्तियार कर लेती है। दरअसल, यह एक सामाजिक विकृति है, जिससे तत्काल दूर करने की जरूरत है। लेकिन यह तभी संभव है, जब सरकारों की नीतिगत प्राथमिकताओं में सामाजिक विकास और रूढ़ विचारों पर नजरिया और मानसिकता बदलने का काम शामिल हो।
(लेखिका ओडिशाराज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य हैं)

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