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देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाएगा पांच राज्यों का चुनाव

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सेंट्रल डेस्क/दिवाकर श्रीवास्तव। देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे देश के अगले राष्ट्रपति चुनाव में काफी अहम होने वाले हैं। जुलाई माह में संभावित राष्ट्रपति चुनाव में इन पांच राज्यों के नवनिर्वाचित विधायक अहम रोल अदा करेंगे।

इन पांच राज्यों के नतीजे ना सिर्फ 690 विधायकों के भविष्य का फैसला करेंगे बल्कि 19 राज्यसभा के सांसदों की भी सीट खाली हो रही है उनके चयन में भी यह नतीजे अहम रहने वाले हैं। बता दें कि चुने हुए विधायक और सांसद राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेते हैं, ऐसे में जिस पार्टी के पास सबसे अधिक विधायक और सांसद होते हैं उसके उम्मीदवार के राष्ट्रपति चुनाव चीतने की संभावना अधिक रहती है।

अगर भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में चुनाव जीतने में विफल रहती है तो भाजपा के लिए अपनी पसंद का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार जिता पाना मुश्किल होगा। 2017 में एनडीए ने आसानी से जीत दर्ज की थी और यूपी में 403 में से 325 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि उत्तराखंड में 70 में से 57 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

यही वजह है कि एनडीए ने आसानी से अपने उम्मीदवार को राष्ट्रपति चुनाव में जीत दिलाने में सफलता हासिल की। उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक विधायक चुनकर आते हैं, यही वजह है कि यहां सबसे अधिक इलेक्टोरल कॉलेज है, जिसकी वजह से राष्ट्रपति चुनाव के लिए यूपी के नतीजे काफी अहम है।

मौजूदा समय की बात करें तो पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, झारखंड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली में विपक्षी दलों की सरकार है। लेकिन यहां क्षेत्रीय दलों की सरकार है और ये राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए विपक्ष को अपना समर्थन दे सकते हैं, बशर्ते विपक्ष एक ऐसे उम्मीदवार को उतारे जो हर किसी की पसंद हो।

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ऐसी स्थिति में 690 विधानसभा सीटें जिनमे यूपी की 403, पंजाब की 117, उत्तराखंड में 70, मणिपुर में 60, गोवा की 40 सीटें हैं। वहीं राज्यसभा में उम्मीदवारों की संख्या इन राज्यों में चुनाव पर निर्भर है। राज्यसभा की 75 में से 73 सीटें इस साल खाली होने जा रही हैं। अप्रैल, जून और जुलाई माह में इन सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है।

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