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मंजिल के लिए पैरों की नहीं हिम्मत की आवश्यकता होती हैं, जानिए व्हीलचेयर यूजर गर्ल प्रतिष्ठा देवेश्वर को

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*यूके के प्रतिष्ठित ‘द डायना अवार्ड’ से हुई सम्मानित
*ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में मिला एडमिशन

मोटीवेशनल: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रही भारतीय छात्रा प्रतिष्ठा देवेश्वर को यूके का प्रतिष्ठित ‘द डायना अवार्ड’ सम्मान प्राप्त हुआ हैं। ‘द डायना अवार्ड’ युवाओं को सामाजिक कार्य और मानवीय जीवन के सुधार के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। प्रतिष्ठा देवेश्वर को यह अवार्ड दिव्यांगजनों की शिक्षा, सुविधा और उनके लिए किए गए कार्यों की वजह से प्राप्त हुआ है। वह भारत की पहली व्हीलचेयर यूजर गर्ल हैं। जिन्हें प्रतिष्ठिति ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिला है।

कौन हैं प्रतिष्ठा:

पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली प्रतिष्ठा शरू से टॉपर रहीं हैं। 10वीं और 12वीं की पढाई होशियारपुर से की है। दशवीं और बारहवीं में 90% अंक लाकर उन्होंने अपने हौसलों की उड़ान भरी। दिल्ली यूनिवर्सिटी से उन्होंने अपना ग्रेजुएशन किया। प्रतिष्ठा को दिल्ली की राष्ट्रीय स्तर की यूनिवर्सिटी द्वारा भी 2020 में नेशनल रोल मॉडल के तौर पर सम्मानित किया गया था। पंजाब के होशियारपुर जिले की प्रतिष्ठा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबेसेडर भी हैं।

प्रतिष्ठा भारत की पहली ऐसी लड़की हैं, जो व्हीलचेयर पर होकर भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने जा रही हैं। इनका चयन पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स डिग्री के लिए हुआ है। इस समय प्रतिष्ठा दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम लेडी कॉलेज में अपनी पढाई कर रही हैं। वे एक मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं।

व्हीलचेयर पर होकर भी नहीं हारी हिम्मत:


प्रतिष्ठा बताती हैं की 13 साल की उम्र में होशियारपुर से चंडीगढ़ जाते समय उनकी कार का भीषण हादसा हो गया था। इसी हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी बुरी तक चोटिल हो गई थी। इस हादसे के बाद वो काफी दिनों तक बेड पर रही। बेड पर होकर भी प्रतिष्ठा ने हिम्मत नहीं हारी। 12वीं के बाद दिल्ली जाकर पढ़ाई करने का मन बना लिया। प्रतिष्ठा ब्रिटिश हाई कमीशन, हिंदुस्तान यूनिलीवर और यूनाइटेड नेशंस में महिला मुद्दों पर अपनी बात रख चुकी हैं।

प्रतिष्ठा ने दिव्यांगजनों की रक्षा व अधिकारों के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई। उन्होंने यूनाइटेड नेशंस की तरफ से होने वाले कई देशों के कार्यक्रमों में जाकर भी अपनी आवाज दुनिया की महान हस्तियों के बीच बेबाकी से रखती रहीं हैं।

प्रतिष्ठा भारत लौट कर अपने जैसे दिव्यांग लोगों के जीवन में सुधार लाना चाहती हैं। उनके हित और अधिकार के लिए काम करना चाहती हैं।

प्रतिष्ठा के अनुसार, भारत में जो एजुकेशन पॉलिसी है, उसमें विकलांग लोगों के अनुसार अभी बहुत सुधार की ज़रूरत है। समाज में दिव्यांग जनों के प्रति समाज का नजरिया भी बदलने की भी ज़रूरत हैं। प्रतिष्ठा बताती हैं कि मैंने ऑक्सफोर्ड जाने का फैसला भी इसीलिए किया क्योंकि पब्लिक पॉलिसी पर आधारित इस यूनिवर्सिटी के कोर्स का दुनिया में कोई जवाब नहीं है। प्रतिष्ठा कहती हैं – ”सपने देखों और उन्हें पूरा करने के लिए खूब मेहनत करो। देखना एक दिन आपके वो सारे सपने पूरे होंगे”।

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