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कॉरोनाकाल में जब ऑक्सीजन की हुई किल्लत तो संकटमोचक बनी हनुमान एम्बुलेंस सर्विस

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ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने को संस्थाओं ने हनुमान एम्बुलेंस सर्विस के लिए की क्राउड फंडिंग

स्टटेडेस्क/ पटना : पिछले महीने जब कोरोना संकट गहराया, बड़ी तादाद में लोग अस्पतालों में भर्ती होने लगे और ऑक्सीजन समेत कई चीजों मसलन दवाई, अस्पताल में बेड, एम्बुलेंस, एवं जांच उपकरणों की भारी किल्लत होने लगी, जिसे सभी ने महसूस किया. ऐसी निराशा की घड़ी में कई लोगों ने अपने सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। उन्होंने यथासंभव प्रयास कर कोरोना महामारी से अपनी जंग जारी रखी और हज़ारों लोगों की मदद भी की।

किसी ने रोटी बैंक बना कर लोगों को खाना पहुँचाया, कुछ ने प्लाज्मा की व्यवस्था के लिए कई सोशल मीडिया, वेबसाइट और अन्य माध्यम से लोगों को सहायता पहुंचाई, कुछ ने वाट्सएप ग्रुप के जरिये लोगों को जानकारी देकर मदद पहुंचायी, तो कई लोगों ने ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में अपना दिन-रात एक कर दिया। ऐसी ही एक संस्था है हनुमान, जिसने एम्बुलेंस से वेंडर व्दारा ऑक्सीजन सिलेंडर वापस लेने में आ रही समस्या का निदान किया। यों कह सकते हैं कि हनुमान अपने नाम के अनुकूल ही लोगों के लिए संजीवनी का काम करने में पिछले एक साल से जुटी है।

पिछले साल कोरोना की शुरुआत में ही इस स्टार्टअप कम्पनी का जन्म हुआ और एक साल में इस बिहारी स्टार्टअप ने बिहार के अलावा दिल्ली, मुंबई और झारखण्ड में भी अपनी सेवा प्रारम्भ कर दी। पिछले महीने जब कोरोना की आक्रमकता अपने चरम पर पहुंची तो टीम हनुमान ने नो refusal पॉलिसी के तहत हर तरह की मदद की गुहार को सुना और अपने सीमित सामर्थ्य के साथ ही सब की ज़रूरत पूरी करने में जी-जान से लग गए।

बताते चलें कि हनुमान कम्पनी का व्यवसाय एम्बुलेंस सर्विसेज एवं घरों से जांच सैंपल लेने का है, परन्तु इस मुस्किल की घड़ी में इन्होंने अपने सभी संसाधन, सभी कर्मचारियों और सारा समय कोरोना से लड़ते मरीज़ और उनके पारिवार की सेवा में झोंक दिया।

अपने व्यावसायिक गतिविधि के इतर मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध करने में, अस्पताल में एडमिशन दिलाने में, कोविड मरीजों को जब घरवाले भी नहीं छू रहे थे तो उनको अस्पतालों तक पहुंचाने में, मृत लोगों के अंतिम संस्कार करने में, कोरोना पीड़ित मरीजों के घरों में खाना पहुँचाने में , दवाइयां घरों तक पहुँचने में, दुर्लभ और बाज़ार में नहीं मिल पाने वाली दवाईयों को सरकारी मदद से उपलब्ध करने में और मेडिकल परामर्श देने में भी टीम हनुमान ने 3000 से ज्यादा लोगों को सेवा दी है।

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हनुमान सर्विस के संस्थापक डॉ. नीरज बताते हैं की 15 अप्रैल के आसपास जब अचानक कॉल बढ़ने शुरू हुए तभी से हमने अपनी तैयारी प्रारंभ की , टीम को समझाया कि युद्ध की घड़ी आ गई है, सभी छुट्टी समाप्त, ईश्वर ने सेवा का मौक़ा दिया है और परीक्षा कठिन है, तो हौसला और मज़बूत करना होगा। टीम के सभी सदस्य उत्साह और संकल्प से भरे हुए हैं और कॉल सेंटर पर आने वाले सभी मदद के निवेदन को तुरंत सम्बन्धित टीम को भेजा जाता रहा और सभी तरह की सेवा लोगों तक पहुंचाई गई।

सह संस्थापक संतोष बताते हैं कि सबसे बड़ी समस्या ऑक्सीजन की वजह से हुई और 20 अप्रैल आते-आते अवसाद सा होने लगा था। हर कॉल जो हमारे पास आती थी वो रोते, बिलखते और मदद की गुहार लगते हुए ही होती थी. सामान्य रूप से कस्टमर और सर्विस प्रोवाइडर जैसा कुछ नहीं रह गया था। लोगों को यह समझ नहीं आ रहा था कि कहाँ जाएँ, किस अस्पताल जाएँ जहाँ बेड और ऑक्सीजन मिल जाएगी, एम्बुलेंस में से ऑक्सीजन सिलिंडर खाली हो गए थे और ऑक्सीजन वेंडर्स के लिए प्राथमिकता अस्पतालों को ऑक्सीजन पहुँचाना था। ऑक्सीजन सिलिंडर की कीमत में भारी उछाल आया और 30 हज़ार से 70 हज़ार तक एक सिलिंडर की कीमत हो गई थी। ऐसे में एम्बुलेंस जिनके पास ऑक्सीजन थे उनका किराया सामान्य दिनों से ,20-20 गुना हो गया था। प्राइवेट एम्बुलेंस चालक को हेल्थ वर्कर श्रेणी में टीका नहीं दिया गया था और इसके वजह से भी लोग काफी डरे हुए थे।

ऑक्सीजन की इस गहराती समस्या की वजह से बड़ी संख्या में एम्बुलेंस बंद पड़े थे और केवल शव वाहन की तरह काम कर रहे थे। डॉ। नीरज ने अपने सहयोगियों से परामर्श किया और इससे लड़ने के लिए लोगों से मदद मांगी। करेकेबा वेन्चर्स और मिथिला एंजेल नेटवर्क का साथ मिला और सपना फाउंडेशन की मदद से क्राउड फंडिंग की गई। इकठ्ठा किये गए पैसों से 40 सिलिंडर खरीदे गए और हनुमान सर्विसेस से जुड़े एम्बुलेंस चालकों के बीच इसका मुफ्त वितरण किया गया। ऑक्सीजन की बढ़ी हुई कीमत की वजह से सरकार द्वारा तय किये गए एम्बुलेंस दरों पर एम्बुलेंस चलाना नामुमकिन सा था।

दिल्ली में सरकार ने 100 रुपये प्रति किलोमीटर का दर तय किया है। सामान्य रूप से अस्पतालों में ऑक्सीजन की कीमत 100-200 रूपया प्रति घंटा लिया जाता है। यानी 3.5-3-5 रूपये प्रति मिनट। तेल की कीमत प्रति किलोमीटर रु 10 है. और मेंटिनेंस, ड्राईवर का खर्च, गाड़ी को धुलने का खर्च सब मिला कर देखें तो समझ में आएगा की एम्बुलेंस की दरों को निर्धारित करने में सरकार ने कोई गणित करने की ज़हमत नहीं उठाई और लोकप्रियता बटोरने के लिए फरमान सा ज़ारी किया है।

हनुमान सर्विस ने 40 से अधिक अस्पतालों के डाटा पर काम किया और वहां की सुविधाओं, डॉक्टर्स लिस्ट वगैरह को वेरीफाई किया, मरीजों का रिक्वेस्ट लेने के बाद उचित व्यवस्था के अस्पताल में बेड खाली होने का पता लगा कर मरीज़ के अभिभावकों को उन अस्पतालों से संपर्क करवाया। इस तरीके से वेरिफाइड जानकारी दे कर मरीजों को कम समय में उचित अस्पताल पहुंचा कर सैकड़ों मरीजों की जान बचाई जा सकी।
एम्बुलेंस संचालक और ड्राईवर भी हनुमान सर्विसेस से बहुत खुश हैं और उन्हें बहुत सराहते हैं। राजेंदर नगर के मनोज जी (एम्बुलैंस संचालक) कहते हैं ऑक्सीजन सिलिंडर मुफ्त में मिलना एक सपना सा था। जहाँ लोगों को एक सिलिंडर 70 हज़ार में मिल रहा था, वहां फ्री में मिलने की कल्पना भी नहीं थी। हम भी मरीज़ से उचित दाम ही लेंगे।

पाटलिपुत्रा के एम्बुलैंस संचालक अजीत जी कहते हैं कि हमें जब बताया गया कि आकर सिलिंडर ले लो, तो विश्वास ही नहीं हुआ. लगा कि बुडबक बना रहा है कोई। दो दिन लगातार कॉल करने के बाद वहां गए और 40 लिटर का सिलिंडर फ्री में पाए। जो साथी हनुमान से नहीं जुड़े हैं वो भी अब रिक्वेस्ट कर रहे हैं।

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