29.1 C
Delhi
HomePolitics74 पूर्व नौकरशाहों ने लिखा खुला पत्र, यूपी में शासन व्यवस्था चरमराने...

74 पूर्व नौकरशाहों ने लिखा खुला पत्र, यूपी में शासन व्यवस्था चरमराने का आरोप

- Advertisement -

12 जुलाई, लखनऊ/दिवाकर श्रीवास्तव। 74 पूर्व नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के एक समूह ने एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उत्तर प्रदेश में शासन व्यवस्था के चरमराने और कानून के खुले तौर पर उल्लंघन किये जाने का आरोप लगाया गया है।

इस पत्र का 200 से अधिक प्रतिष्ठित नागरिकों ने समर्थन किया है। चार पन्नों के पत्र में, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर मनमाने ढंग से हिरासत, यातना और पुलिस हमलों का आरोप लगाया गया है। साथ ही मांग की गई है कि अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं को रोका जाए, गोहत्या और “लव जिहाद” के खिलाफ कानून के नाम पर मुस्लिम पुरुषों को निशाना न बनाया जाए और विरोध करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का दुरुपयोग न किया जाए। 

राज्य में कोरोना से हुई मौतों और बदहाल स्वास्थ्य प्रणाली की ओर इशारा करते हुए पत्र में यह भी मांग की गई है कि राज्य में कोविड संकट को ठीक से संभाला जाए। पत्र में कहा गया है कि यूपी में वर्तमान सत्तारूढ़ शासन ने शासन के एक ऐसे मॉडल की शुरुआत की है जो संविधान के मूल्यों और कानून के शासन से हर गुजरते दिन आगे और दूर होता जाता है।

पत्र में कहा गया है कि यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट और पुलिस सहित प्रशासन की सभी शाखाएं ध्वस्त हो गई हैं। हमें डर है कि यदि अभी जांच नहीं की गई, तो राज्य में राज्य की राजनीति और संस्थानों को नुकसान होगा, जिसके परिणामस्वरूप लोकतंत्र का क्षय और विनाश होगा।

पत्र में कहा गया है कि हम बढ़ते अलार्म के साथ ध्यान देते हैं कि यूपी में वर्तमान सत्तारूढ़ शासन ने शासन के एक मॉडल की शुरुआत की है जो संविधान के मूल्यों और कानून के शासन से हर गुजरते दिन आगे और दूर होता जाता है। यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट और पुलिस सहित प्रशासन की सभी शाखाएं ध्वस्त हो गई हैं। हमें डर है कि, अब तक जांच नहीं की गई, राज्य में राज्य की व्यवस्था और संस्थानों को नुकसान के परिणामस्वरूप लोकतंत्र का क्षय और विनाश होगा।

यह भी पढ़ें…

- Advertisement -



- Advertisement -
- Advertisement -
- Advertisement -
Related News
- Advertisement -