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दो-तीन दिन में हो सकता है मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार, 24 नये चेहरे शामिल होने की चर्चा

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सेंट्रल डेस्क/दिवाकर श्रीवास्तव। मोदी कैबिनेट का विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में अगले दो-तीन दिन में विस्तार किया जा सकता है। यह फेरबदल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव और अगले पांच साल में कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

बता दें कि मोदी के दूसरे कार्यकाल (मोदी सरकार 2-0) में अब तक मंडिमंडल विस्तार नहीं हुआ है। वहीं मोदी के मंत्रिमंडल में 24 नये चेहरे शामिल होने की चर्चा है। एक दो नहीं, करीब दो दर्जन नये मंत्रियों के कैबिनेट में शामिल होने की चर्चा चल रही है। दिल्ली से लेकर मुंबई तक, लखनऊ से लेकर पटना और कोलकाता तक, भोपाल से लेकर गुवाहाटी तक सियासी गलियारों में अभी सबसे गर्मागर्म टॉपिक यही है कि कौन बनेगा मंत्री? सियासी हलकों में चर्चा तो कई नामों की है, लेकिन किसके नाम पर लगेगी मोदी की मुहर? ये देखना अभी बाकी है।

मई 2019 में जब से मोदी 2-0 सरकार का गठन हुआ है, तब से एक बार भी मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ। इस बीच शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल के एनडीए से बाहर जाने और लोक जनशक्ति पारी कोटे से रामविलास पासवान के निधन के कारण कैबिनेट में जगह खाली है। जुलाई के पहले सप्ताह में मंत्रिमंडल विस्तार तय माना जा रहा है। इसकी दो मुख्य वजह है, पहली- आने वाले विधानसभा चुनाव और दूसरी- एनडीए कुनबे का विस्तार। अगले साल यानी 2022 में उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत छह राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले नरेंद्र मोदी अपनी टीम को री-शेप कर लेना चाहते हैं। कोरोना की दूसरी लहर कमजोर पड़ने और वैक्सीनेशन प्रोग्राम की रफ्तार बढ़ाने के बाद 7 लोक कल्याण मार्ग और बीजेपी हेडक्वार्टर में बैठक और मंथन के कई राउंड हो चुके हैं। नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों की 2 साल की रिपोर्ट भी ले ली है।

सूत्रों के के मुताबिक इस विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया को शामिल किया जा सकता है। कांग्रेस से उनके मतभेद की वजह से पिछले साल भाजपा को मध्यप्रदेश की सत्ता वापसी में मदद मिली थी। इनके अलावा सर्बानंद सोनोवाल को भी मौका मिल सकता है। उन्होंने असम में भाजपा को जीत दिलाकर हेमंत बिस्वा सरमा को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की राह बनाई थी।

सूत्रों का यह भी कहना है कि इस विस्तार में कई मौजूदा मंत्रियों को हटाया जा सकता है। अभी 9 मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग हैं। इनमें प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, नितिन गडकरी, डॉ. हर्षवर्धन, नरेंद्र सिंह तोमर, रविशंकर प्रसाद, स्मृति ईरानी और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं।

मोदी सरकार में जिन भाजपा नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है कि उनमें उत्तराखंड से अजय भट्ट या अनिल बलूनी। कर्नाटक से प्रताप सिन्हा, पश्चिम बंगाल से जगन्नाथ सरकार, शांतनु ठाकुर या निसिथ प्रामाणिक। हरियाणा से बृजेंद्र सिंह, राजस्थान से राहुल कासवान, ओडिशा से अश्विनी वैष्णव, महाराष्ट्र से पूनम महाजन या प्रीतम मुंडे या हिना गावित शामिल हैं। इस लिस्ट में दिल्ली से परवेश वर्मा या मीनाक्षी लेखी का नाम भी हो सकता है।

बताया जा रहा है कि बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, महाराष्ट्र के नेता नारायण राणे, भूपेंद्र यादव और एक वरिष्ठ नेता जिनके पास बिहार के साथ गुजरात का भी प्रभार है उन्हें भी मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इनके अलावा उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए वरुण गांधी, रामशंकर कठेरिया, अनिल जैन, रीता बहुगुणा जोशी, जफर इस्लाम और अपना दल की अनुप्रिया पटेल भी कतार में हैं।
इस विस्तार में चिराग पासवान को शामिल किए जाने पर उनके चाचा पशुपति पारस रोड़ा बन सकते हैं। दोनों के बीच टकराव चल रहा है। इसकी वजह से लोक जनशक्ति पार्टी दो फाड़ हो गई है। हाल ही में पार्टी के पांच सांसदों के साथ पशुपति अलग हो गए हैं। पिछले साल चिराग के पिता राम विलास पासवान का निधन हो गया था, इसके बाद अब यह फूट सामने आई।

अटकलों के बीच अभी यह साफ नहीं है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू से किसी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी या नहीं। 2019 में नीतीश ने केंद्र में मंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। सूत्रों का कहना है कि नीतीश कम से कम दो मंत्रालयों की उम्मीद कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि उनकी पार्टी से लल्लन सिंह, रामनाथ ठाकुर और संतोष कुशवाहा इस दौड़ में शामिल हैं।

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