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मुलायम की भीष्म प्रतिज्ञा : कुनबे में अब कोई राजनीतिक दंगल नहीं होगा

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कहा- बेटे अखिलेश के अलावा किसी अन्य को राजनीतिक आशीर्वाद नहीं
कमल दुबे/लखनऊ।
पिछले विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सपा के दंगल का केन्द्र बिन्दु रहे नेता जी यानी कि मुलायम सिंह यादव ने भीष्म प्रतिज्ञा की है। उन्होने बेटे अखिलेश यादव को इस बात का भरोसा दिलाया है कि वे ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएंगे, जिससे चुनाव में पार्टी को किसी तरह का नुकसान हो। न तो वह अपनी दूसरी पत्नी के कहने पर कोई राजनीतिक बयान देंगे और न ही बेटे सरीखे भाई शिवपाल को किसी तरह का राजनीतिक आशीर्वाद देंगे।

इतना ही नहीं, मुलायम सिंह यादव ने अपने कुनबे को साफ संकेत दे दिया है कि किसी भी तरह का पारिवारिक दंगल नहीं होना चाहिए। बताते हैं कि बदले हालातों में मुलायम सिंह यादव चाहते हैं कि पूरा परिवार राजनीतिक रूप से एक मंच पर हो लेकिन शिवपाल द्वारा अपनी कुछ मजबूरियां गिनाये जाने के बाद यह संभव नहीं हो सका है। हालांकि कुनबे में यह ‍तय हुआ है कि कोई भी किसी के लिए विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होने देगा। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले देश के सबसे बडे राजनीतिक कुनबे में जबर्दस्त दंगल हुआ था।

इस दंगल में तत्कालीन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के अलावा ‍प्रोफेसर राम गोपाल यादव शिवपाल सिंह यादव अखिलेश यादव तथा दिवंगत नेता अमर सिंह अहम किरदार में थे। कुनबे के इस दंगल की पटकथा के कई एपिसोड चले थे और सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। सही मायने में कहा जाये तो पूरे देश की ध्यान चुनाव के बीच सपा में चले इस दंगल पर था। खैर इस दंगल में राज्य की सत्ता से बाहर होने के साथ-साथ मुलायम सिंह यादव को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हाथ धोना पड़ा था। इसके अलावा भी इस दंगल में बहुत कुछ हुआ था।

अतीत के इन कडुवे अनुभवों को देखते हुये सपा का परिवारिक कुनबा पूरी तरह एलर्ट है। वैचारिक मतभेद भले ही हो लेकिन कुनबे का कोई भी सदस्य ऐसा कदम नहीं उठायेगा जिससे पार्टी को नुकसान हो। सपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक सत्ता की बागडोर फिर से अपने हाथ में करने के लिए मुलायम सिंह यादव कुनबे के संरक्षक की भूमिका में होगे। पार्टी के मुख्यधारा से अलग होकर राजनीति करने की कुनबे को लोगों को छूट तो होगी लेकिन कोई एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश नहीं करेगा।

हालांकि चाचा शिवपाल सिंह यादव को साथ लाने की अभी भी कोशिश चल रही है लेकिन बात न बनने पर मुलायम सिंह पूरी तरह बेटे के साथ खड़े दिखेंगे। दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव से पहले सपा के दंगल के पीछे की बड़ी वजह मुलायम सिंह यादव का स्पष्ट फैसला न होना भी था। वे भाई और बेटे के मोह में कभी इस पाले में तो कभी दूसरे पाले में दिखते थे। कुल मिलाकर बेटे से ज्यादा भाई शिवपाल की तरफ उनका झुकाव था। इस झुकाव की खास वजह अखिलेश यादव द्वारा समय-समय पर पिता मुलायम को नीचा दिखाना था।

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सपा में अखिलेश यादव के बेहद करीबी नेता और सरकार में मंत्री रहे एक नेता की मानें तो पूरा कुनबा मान चुका है कि सत्ता में वापसी का रास्ता सपा से होकर ही जाता है। अगर परिवार को पुराना रुतबा वापस लाना है तो सभी को साथ होकर चलना होगा। इसी रणनीति के चलते मुलायम सिंह यादव ने पूरे परिवार के सामने अपने इरादे स्पष्ट कर दिये हैं। बताते है कि अखिलेश यादव ने भी पिता मुलायम सिंह यादव को भरोसा दिया है कि वे पार्टी को एक बार फिर सत्ता में वापस लाकर उन्हें उनकी राजनीतिक विरासत की वापसी का गिफ्ट देंगे।

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