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आरएसएस मंथन : योगी की फिर से ताजपोशी का रास्ता वाया चित्रकूट

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मोदी-योगी में मतभेद नहीं, यह प्रचारित करना रणनीति का हिस्सा
धर्म परिवर्नन व पापुलेशन कंट्रोल कानून मैनीफेस्टो में शामिल होगा
अयोध्या के जमीन घोटाले में संघ का स्टैंड, चपंतराय को क्लीनचिट
12 जुलाई 2021,
सेंट्रल डेस्क/महेश शर्मा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की चित्रकूट में चल रही बैठक में यूपी में एक बार फिर योगी आदित्यनाथ की सीएम पद पर ताजपोशी का तानाबाना तैयार किया जा रहा है। पिछले दिनों पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के बीच आई खटास को मिठास में परिवर्तित किए जाने के समीकरण बैठाए जा रहे हैं।

यही नहीं अयोध्या में जमीन घोटाले को लेकर विहिप संगठन मंत्री श्रीराम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के प्रमुख चंपतराय के बचाव में भी संघ खड़ा है। हालांकि चंपतराय ने अयोध्या भूमि घोटाले को लेकर संघ की बैठक में सफाई दी, लेकिन संघ इस पर संतुष्ट नहीं हुआ। चंपतराय को श्रीराममंदिर निर्माण ट्रस्ट से हटाने के फैसले पर हिचकिचाहट के पीछे आगामी विधानसभा चुनाव हैं। अगर चंपत को हटाया जाता तो भाजपा के चुनाव प्रचार में यह फैसला असर डालता।

आरएसएस की पांच दिवसीय प्रांत प्रचारकों की बैठक में यूं तो 50 के अल्ले-पल्ले प्रतिनिधि ही शामिल हुए हैं। पर ढाई सौ वर्चुअल बैठक में जुड़े। इस प्रकरण से साफ निकलना और ट्रस्ट का जनता पर ट्रस्ट बैठाना भी प्रमुख कार्य होगा। राम मंदिर निर्माण शुरू करने का पॉजिटिव मुद्दा जनता के बीच योगी सरकार लेकर जाएगी। बताते चलें कि योगी के पदभार ग्रहण करने के ठीक बाद चित्रकूट के ही पद्मविभूषण रामभद्राचार्य ने योगी से मुलाकात की थी जिसमें योगी ने उनसे वादा किया था कि उनके कार्यकाल में राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा।

संघ की बैठक चित्रकूट के दीनदयाल उपाध्याय रिसर्च फाउंडेशन में कड़ी सुरक्षा के दायरे में चल रही है। इसमें शिरकत वाले तथा वर्चुअल या अन्य किसी भी तरह से शामिल लोगों से कहा गया है कि भीतर की बात बाहर न जाने पाए। खास वजह यह है कि यूपी में योगी की वापसी और मोदी-योगी के बीच मधुर रिश्ते का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना है। इसका असर चुनाव पर बिल्कुल भी न पड़े। यह ध्यान रखा जाएगा। धर्म, संस्कृति, राजनीति के चर्चित विषयों पर मंथन जारी है।

गाजियाबाद में सरसंघ चालक मोहन भागवत का बयान कि हिंदुस्तान में रहने वाले सभी नागरिकों का डीएनए एक है, पर विशेष फोकस है। इस बयान को लेकर राष्ट्रीय बहस छिड़ गयी है। खुद संघ सीनियर लोग असहज सा महसूस कर रहे हैं। ऐसे मे संघ के सामने सवाल है कि क्या उसे अपना चेहरा सेक्युलर दिखाने की कोशिश करनी चाहिए। क्या संघ की यह छवि भाजपा की राज्यों में सरकार बनाने में कारगर साबित हो सकती है। कहीं परंपरागत मतदाता इस छवि के चलते भाजपा से परहेज तो नहीं करेगा।

कोरोना की तीसरी लहर में सेवा भी बैठक में मंथन का विषय है। धर्म परिवर्तन के विरुद्ध केंद्रीय कानून की जरूरत पर बल देने के साथ ही जनसंख्या नियंत्रण पर सख्त कानून पर भी जोर दिया जाए। राय बनने के बाद इसे मैनिफेस्टो में भी शामिल किया जा सकता है।

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