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पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा मौसी के घर के रास्ते पर

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करीब ढाई किलोमीटर दूर है गुंडिचा मंदिर में मौसी का घर
www.beforeprint.in ने की सजीव प्रसारण की व्यवस्था
हमारी साइट के फेसबुक पेज व यूट्यूब चैनल में देखिए

सेंट्रल डेस्क,12 जुलाई 2021 : महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा गुंडिचा मंदिर के रास्ते पर है। गुंडिचा मंदिर की मान्यता महाप्रभु के मौसी के घर के रूप में है। देश और विदेशों के कई हिस्से में महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की परंपरा है। चारो धाम में से एक पुरी में रथयात्रा का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है।

महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा के विग्रह श्रीमंदिर से बाहर लाकर रथ पर स्थापित किए जाने के बाद रथयात्रा का शुभारंभ हुआ। www.beforeprint.in ने आपके लिए रथयात्रा का सजीव प्रसारण की व्यवस्था की है जिसे आप हमारे फेसबुक पेज व यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं। भक्तों को वहां पर जाने की अनुमति न होने के कारण भीड़ का माहौल नहीं है। कुल तीन रथों को आगे पीछे रखते हुए खींचा जाएगा।

पहला रथ बलभद्र, दूसरा देवी सुभद्रा व तीसरा महाप्रभु जगन्नाथ का रथ है। प्रत्येक रथ के लिए 50 सेवायतों यानी 1500 सेवायतों की सेवा ली जा रही है। महाप्रभु के कुल 36 निजोग यानी सेवाएं होती हैं जिनमें सबके अलग-अलग सेवायत होते हैं। रथयात्रा का नियोग संपादित करने वाले सेवायतों को दइतापति कहा जाता है। महाप्रभु की रथयात्रा को गुंडिचा यात्रा, पतितपावन यात्रा, जनकपुरी यात्रा, नवदिवसीय यात्रा तथा दशावतार यात्रा के नाम से जाना जाता है।

इस साल शास्त्र सम्मत तिथि के मुताबिक रथयात्रा 12 जु. से शुरू होकर 20 जुलाई तक चलेगी। बताते हैं कि पद्मपुराण के अनुसार अषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि के दिन जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाती है। सात दिन तक माता गुंडिचा के मंदिर में विश्राम कर देवशयना एकादशी यानी 20 जुलाई के दिन वापस घर लौटते हैं। गुंडिचा मंदिर उनकी मौसी का घर है।

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