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विजया एकादशी व्रत : रावण से युद्ध से पहले भगवान राम ने सेना समेत किया था ये व्रत

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सेंट्रल डेस्क : हिंदू परंपरा में एकादशी के व्रत का बहुत महत्व है। एकादशी को पुण्य कार्य और भक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पुराण में बताया गया है कि फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार यह एकादशी 2 मार्च दिन शनिवार को है। नाम से पता चलता है कि जो भी सच्चे मन से भगवान विष्णु का व्रत करता है, उसको सदा ही विजय मिलती है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले विजया एकादशी का व्रत किया था।

पद्म और स्कन्द पुराण में वर्णन
इस व्रत के विषय में पद्म पुराण और स्कन्द पुराण में वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि जब जातक शत्रुओं से घिरा हो तब विकट से विकट से परिस्थिति में भी विजया एकादशी के व्रत से जीत सुनिश्चित की जा सकती है।

इतना ही नहीं विजया एकादशी के महात्म्य के श्रवण व पठन मात्र से ही व्यक्ति के समस्त पापों का विनाश हो जाता है। साथ ही आत्मबल बढ़ जाता है। विजया एकादशी व्रत करने वाले साधक के जीवन में शुभ कर्मों में वृद्धि, मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और कष्टों का नाश होता है। जो भी साधक इस एकादशी का व्रत विधिविधान और सच्चे मन से करता है, वह भगवान विष्णु का कृपापात्र बन जाता है।

व्रत विधि
इस दिन भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित कर उनकी धूम, दीप, पुष्प, चंदन, फूल, तुलसी आदि से आराधना करें, जिससे कि समस्त दोषों का नाश हो और आपकी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकें।

  • भगवान विष्णु को तुलसी अत्यधिक प्रिय है इसलिए इस दिन तुलसी को आवश्यक रूप से पूजन में शामिल करें।
  • भगवान की व्रत कथा का श्रवण और रात्रि में हरिभजन करते हुए उनसे आपके दुखों का नाश करने की प्रार्थना करें।
  • रात्रि जागकरण का पुण्य फल आपको जरूर ही प्राप्त होगा। व्रत धारण करने से एक दिन पहले ब्रम्हचर्य धर्म का पालन करते हुए व्रती को सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।
  • व्रत धारण करने से व्यक्ति कठिन कार्यों एवं हालातों में विजय प्राप्त करता है।

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