रूबैला वायरस से हो जाएं सावधान

– खसरे के खतरे से बचाती हैं होम्योपैथी की मीठी गोलियां
– श्वशन तंत्र पर हमला कर गंभीर परिणाम हो सकते है 

कानपुर/दिवस पाण्डेय : खसरा जिसे मीजल्स के नाम से भी जाना जाता है, बच्चों की एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। यदि इसका समय से उपचार न किया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकती है। ये जानकारी कानपुर के जाने माने वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ हेमंत मोहन व वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवम स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ आरती मोहन ने दी है।उन्होंने बताया कि खसरा किसी भी मौसम में हो सकता है परंतु इस बदलते मौसम में इसके होने की संभावना ज्यादा होती है, इसलिए इस मौसम में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। वैसे तो टीकाकरण से इस पर रोक अवश्य लगी है परंतु अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे और बड़े इससे ग्रसित हो रहे हैं।

बच्चों में जल्दी फैलता संक्रमण

डॉ हेमंत व डॉ आरती ने ये भी बताया कि खसरा किसी को भी हो सकता है परंतु बच्चों में इसके संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है।युवाओं, कुपोषित बच्चों, टीके से वंचित बच्चों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसके फैलने की संभावना ज्यादा होती है। इसमें कुछ प्रमुख लक्षण ये हैं की चार से पांच दिन पहले बुखार होना, जुखाम होना, नाक से पानी बहना, सिरदर्द, मिचली, जोड़ो में दर्द जैसे लक्षण होते हैं।

– दवाई खाने से पहले चिकित्सक की ले सलाह

उन्होंने बताया की खसरे का टीकाकरण समय से करवाना चाहिए और खसरे से प्रभावित लोगों को अलग रखना चाहिए। बिना चिकित्सक की सलाह लिए भी दवा लेना खतरनाक हो सकता है, और होम्योपैथी में इसका पूरी तरह से उपचार संभव है ये जानकारी आरोग्य धाम के दोनो डॉक्टर्स ने दी।