BIG NEWS : दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी- कार में अकेले होने पर भी मास्क लगाना अनिवार्य

सेंट्रल डेस्क/नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी में कहा है कि कार में अकेले होने पर भी मास्क पहनना अनिवार्य है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह की पीठ ने कहा कि कई बार ऐसा होता है जब कार में अकेले होने के दौरान भी बाहर से संक्रमित होने का खतरा बना रहता ह है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि व्यक्ति कार में अकेले सफर कर रहा है तो कार सार्वजनिक स्थल नहीं है। कार में अकेले जाते वक्त भी वायरस से संक्रमित हुआ जा सकता है। इसलिए कार में अकेले होने पर भी मास्क लगाना अनिवार्य हैैं।


पीठ ने मास्क नहीं लगाने पर चालान काटे जाने के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उपरोक्त टिप्पणी की। अधिवक्ता सौरभ शर्मा, आदित्य कौशिक, दीपक अग्रवाल व सुदेश कुमार ने इस संबंध में याचिका दायर की थी। इसमें दावा किया था कि अपनी निजी कार में अकेले होने के बाद भी मास्क न पहने होने पर पांच सौ रुपये का जुर्माना किया गया। लिहाजा, न केवल चालान की राशि वापस दिलाई जाए, बल्कि मानसिक उत्पीडऩ के लिए दस लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाए।

पीठ ने कार में अकेले होने पर भी मास्क लगाने के दिल्ली सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया और याचिकाएं खारिज कर दी। पीठ ने सार्वजनिक स्थल की व्याख्या करते हुए कहा कि यह नहीं कहा जा सकता है कि व्यक्ति कार में अकेले सफर कर रहा है तो कार सार्वजनिक स्थल नहीं है। संभव है कि कार में बैठने से पहले वह बाजार, कार्यालय, अस्पताल गया हो। कार को ट्रैफिक सिग्नल पर भी रोककर लोग शीशा नीचे कर सामान खरीदते हैं। इस दौरान मास्क नहीं पहनने पर चालक स्ट्रीट वेंडर को संक्रमित कर सकता है या उससे संक्रमित हो सकता है।

जुर्माना लगाने के अधिकार पर पीठ ने कहा कि अधिकृत व्यक्तियों की परिभाषा समावेशी और व्यापक प्रकृति की है। जिला मजिस्ट्रेट के पास व्यापक अधिकार हैं कि वे किसी अन्य अधिकारियों को चालान जारी करने के लिए नामित कर सकते हैं। अधिकारियों की सूची पर अदालत की राय है कि इसी विस्तृत रूप से व्याख्या की जानी चाहिए न की प्रतिबंधात्मक रूप में। सभी चालान विधिवत अधिकृत अधिकारियों द्वारा किए गए हैं और चालान को रद करने की मांग आधारहीन है।

पीठ ने कहा कि सभी चार याचिकाकर्ता अधिवक्ता हैं और उन्हें सवाल उठाने के बजाय महामारी के नियमों को लागू करने में सहयोगी बनना चाहिए। अधिवक्ताओं को कानूनी प्रशिक्षण मिलता है और उन्हें महामारी जैसी परिस्थितियों में इससे जुड़े नियमों के अनुपालन में अपने सर्वाेच्च कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। मास्क पहनना अहम का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने दलील दी थी कि ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है कि कार में अकेला होने पर भी चालक के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है। वहीं, दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया था कि अप्रैल, 2020 में जारी कार्यालय आदेश के तहत आधिकारिक या व्यक्तिगत वाहन चलाते समय मास्क पहनना अनिवार्य किया गया था और यह लागू है।

चुनाव प्रचार में मास्क पहनना किया जाए अनिवार्य
इसी बीच विभिन्न राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों में मास्क पहनना अनिवार्य करने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई है, जिस पर मुख्य पीठ में सुनवाई होगी। अधिवक्ता विराग गुप्ता के माध्यम से याचिका दायर कर विक्रम सिंह ने मांग की कि निर्वाचन आयोग को मास्क लगाने के संबंध में लोगों को जागरूक करना चाहिए। जब मास्क लगाना और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है, तो फिर चुनावी राज्यों में प्रचार करने वालों को भी इसका पालन करना चाहिए।