Bihar: सरकार पंचायत प्रतिनिधियों का बीमा नहीं करायेगी, कार्यकाल में सामान्य मृत्यु होने पर पांच लाख सहायता राशि भी नहीं देती!

हेमंत कुमार/पटना : सरकार पंचायत प्रतिनिधियों का न बीमा करायेगी,न सामान्य मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये सहायता राशि देगी! पंचायतीराज मंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधान परिषद में यह जानकारी दी। चौधरी शुक्रवार,19 मार्च को बीजेपी के एमएलसी रजनीश कुमार और जेडीयू की एमएलसी मनोरमा देवी के गैर सरकारी संकल्प का जवाब दे रहे थे। अपने जवाब के दौरान मंत्री ने चुटकी भी ली और कहा,’ हम आपकी भावना समझ रहे हैं, पंचायत प्रतिनिधि आपके वोटर हैं। सामने आपका चुनाव भी है।’ मंत्री की इस चुटकी पर सदन में ठहाके भी लगे। मालूम हो कि बिहार में पंचायत चुनाव होने वाला है। पंचायत चुनाव के बाद बिहार विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र से जुलाई माह में एमएलसी का भी चुनाव होना है। परिषद में स्थानीय प्राधिकार से 24 सदस्य चुन कर आते हैं।


चौधरी ने सदन को बताया कि कार्यकाल के दौरान दुर्घटना में पंचायत प्रतिनिधियों की मौत होने पर पांच लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने का प्रावधान है। लेकिन सामान्य मृत्यु होने पर अनुग्रह अनुदान नहीं दिया जाता है। इस तरह का कोई प्रावधान देश के किसी भी राज्य में नहीं है। मंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों का बीमा कराने के प्रस्ताव पर कहा कि जब सरकार दुर्घटना में मृत्यु पर अनुग्रह अनुदान पांच लाख रुपये देती ही है तो अलग से बीमा कराने की जरूरत नहीं है।

मंत्री के इस जवाब पर रजनीश ने कहा, त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण देने वाला बिहार पहला राज्य है। इसकी शुरूआत बिहार से ही हुई थी। लिहाजा कार्यकाल में सामान्य मृत्यु होने पर भी पांच लाख सहायता राशि देने का प्रावधान होना चाहिए। मनोरमा देवी ने भी पंचायत प्रतिनिधियों का बीमा कराने की नजीर पेश करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को मानदेय भी बहुत कम मिलता है।

‘चर्म मित्र’ नहीं सफाईकर्मी की नियुक्ति होगी

पंचायतीराज मंत्री ने पंचायत स्तर पर मृत पशुओं का निष्पादन करने के लिए ‘चर्म मित्र’ बहाल करने के प्रस्ताव के जवाब में कहा, सरकार पंद्रहवां वित्त आयोग की सिफारिशों के आलोक में पंचायत स्तर पर सफाईकर्मी नियुक्त करने जा रही है। चर्म मित्र’ बहाल करने का प्रस्ताव परिषद में बीजेपी के सदस्य सुमन कुमार लेकर आये थे। सुमन की दलील थी कि मरे हुए पशुओं का निष्पादन परंपरागत रूप से जिस जाति के लोग करते आ रहे थे, उन्होंने अब यह काम छोड़ दिया है। अगर सरकार इसे रोजगार से जोड़ देती तो उस जाति के लोग फिर से इस काम में लग जायेगी। पशुओं की खाल और हड्डियों का कारोबार व्यवस्थित हो जायेगा।

कैसे होगा रामनगर-लक्षमणनगर पंचायत में चुनाव

मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड के रामनगर-लक्षमण नगर पंचायत का परिसीमन करा कर वहां वर्ष 2021 में वहां पंचायत चुनाव सुनिश्चित कराने के प्रस्ताव पर पंचायतीराज मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, यह मामला बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के विचाराधीन है, इस पर सरकार आयोग को निदेशित नहीं कर सकती है। यह मामला डा संजीव कुमार ने गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से उठाया था। डा सिंह ने कहा कि 24.01.19 को जिला गजट में इसका प्रकाशन हो चुका है। लेकिन आज तक परिसीमन नहीं हुआ है। जबकि सामने पंचायत का चुनाव है।