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यूपी में एंट्री मारने वाले बिहार के मंत्री मुकेश सहनी भाजपा के एजेंट: पूर्व विधायक रामकुमार

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-बिहार में आरक्षण दिला नहीं पाए, यूपी का बयाना लिए हैं
-डेढ़ सौ
सीटों पर निर्णायक हैं अति पिछड़ा समाज
-टिकट बंटवारे में सपा ने इस वर्ग का हमेशा ध्यान रखा है

न्यूज़ डेस्क/ महेश शर्मा: धन के बूते व्यापक प्रचार के माध्यम से यूपी की राजनीति में एंट्री मारने वाले बिहार सरकार के मंत्री मुकेश सहनी ने आरक्षण का लॉलीपॉप दिखाया है। खुद को सन ऑफ मल्लाह बताते हुए दो जुलाई को सहनी ने विकासशील इंसान पार्टी का दफ्तर लखनऊ में खोला। पेपरों में बड़े-बड़े पेजवन विज्ञापन छपवाकर मुकेश सहनी ने निषाद सहित यूपी के अति पिछड़ी जातियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है, तो अखिल भारतीय लोधी, निषाद, बिंद कश्यप एकता समता महासभा के अध्यक्ष समाजवादी पार्टी से पूर्व विधायक रामकुमार ने मुकेश सहनी को फर्जी नेता बताते हुए ललकारा है। सहनी पर यूपी में राजनीति जमाने की कोशिश के चलते अति पिछड़ों को झूठा आश्वासन देने व बरगलाने का आरोप लगाया।

मुकेश सहनी बिहार सरकार के मन्त्री

रामकुमार का दावा है कि यूपी में सौ से 150 ऐसी सीटें हैं जहां पर अतिपिछड़ा वर्ग के वोट एकजुट होने पर निर्णायक साबित होने की स्थिति में हैं। वह कहते हैं कि मुकेश सहनी सपा के लिए एकजुट हुए अतिपिछड़े वोटों को विभाजित करने का षड़यंत्र कर रहे हैं। यही नहीं सहनी दरअसल भाजपा के एजेंट हैं। भाजपा के पैसे की दम पर महंगा प्रचारतंत्र के बूते सक्रिय हैं। अतिपिछड़ा वर्ग के नेता रामकुमार कहते हैं कि बिहार में निषाद समुदाय को आरक्षण दिला नहीं पाएं जहां वह खुद मंत्री हैं, तो फिर यूपी कैसे आरक्षण दिलाएंगे।

नीतीश सरकार में मंत्री मुकेश सहनी ने प्रचार माध्यमों में कहा है कि निषादों ने ललकारा है, बिहार ही नहीं यूपी में भी सरकार बनाना है। आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं। अभी उनकी पार्टी ने एंट्री मारी ही है कि यह कह देना आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं, राजनीतिक हल्कों में हंसी का मसाला बताया जाने लगा है। सहनी का बड़ा फोटो और उनके बगल में उपाध्यक्ष राजाराम बिंद का छोटा फोटो और नीचे जगह में 21 नेताओं के फोटो छपे हैं। चार नारे लिखे हैं। निषाद समाज जिंदाबाद, मुकेश सहनी जिंदाबाद, फूलनदेवी अमर रहें, जुब्बा सहनी अमर रहें…।

मुकेश सहनी पर आक्रामक हुए सपा के पूर्व विधायक वरिष्ठ सपा नेता रामकुमार ने एक बयान जारी किया कि उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए निषाद समुदाय के बहुत से तथाकथित स्वयंभू नेतागण अपने को निषाद समुदाय का मसीहा बताते हुए अवतरित हो रहे हैं! इन नेतागणों द्वारा निषाद समुदाय के हित में विगत वर्षो में कोई भी कार्य नहीं किया गया है। और मेरा यह प्रश्न इन सभी नेतागणों से है कि उनके लम्बे चौड़े भाषणों में निषाद समुदाय के 17 जातियों के आरक्षण की बात की जाती है जब कि केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निषाद समुदाय की 17 जातियों के आरक्षण को लेकर दो बार प्रस्ताव भेजे गए।

वह कहते हैं कि प्रस्ताव को रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया सेन्सस भारत सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया है और यदि किसी राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार को आरक्षण हेतु भेजे गए प्रस्ताव को रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया सेन्सस भारत सरकार द्वारा दोनों बार निरस्त कर दिया जाता है, उसके पश्चात यदि पुनः राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार को आरक्षण हेतु भेजा जाता है तो उस पर कोई विचार नहीं किया जाता है ! उक्त के सन्दर्भ में माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री भारत सरकार द्वारा लोक सभा/राज्य सभा में दिया गया बयान स्थित को स्पष्ट करता है।

कब तक निषाद समुदाय के भोले भाले लोग इन तथाकथित नेताओं के निषाद समुदाय की 17 जातियों के आरक्षण के बहकावे में आकर अपने मतों का दुरप्रयोग करते रहेंगे। तथाकथित नेता जिसका लाभ लेकर अपने एवं अपने परिवार को मजबूत करते रहेंगे और भोले भाले निषाद समुदाय के लोग आरक्षण के स्वप्नों में रहते हुए भटकते रहेंगे। रामकुमार आगे बयान में कहते हैं कि आइये हम सब लोग मिलकर विचार करें कि जो निषाद समुदाय को सही दिशा में ले जा रहा हो उसके कंधे से कन्धा मिलाकर उसको आगे बढ़ाये और इन तथाकथित नेताओं से निषाद समुदाय को बचाएं।

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