AES पर सोशियो इकोनॉमी सर्वे रिपोर्ट- रात में खाली पेट सोये थे बच्चे, खाद्य आपूर्ति मंत्री ने किया इंकार

स्टेट डेस्क : मुजफ्फरपुर में AES से बच्चों के मौत मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक जांच टीम लगाई थी. यह पता करने के लिए कि जो बच्चे चमकी बुखार से मर रहे हैं. उनके घर की और आस पास की स्थिति कैसी है. इस मामले में अब सोसियो इकोनॉमी सर्वे रिपोर्ट आ गई है.


मुजफ्फरपुर में सोशियो इकनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक जिस रात में भी AES ने बच्चों पर अटैक किया उस रात बच्चे भूखे पेट सोए। 289 बच्चों में से 61 बच्चें बीमार पड़ने से पूर्व रात में खाली पेट सोए थे।

इस मामले में अब बिहार के खाद्य आपूर्ति मंत्री मदन साहनी ने सफाई दी है. मदन साहनी ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान मुजफ्फरपुर में AES से बच्चों की मौत पर आए सोशियो इकोनॉमी सर्वे रिपोर्ट को पर कहा कि मुझे नहीं लगता बच्चों के पास अनाज नहीं पहुंचा होगा।

बच्चों की मौत की जानकारी मिलते ही मैंने मामले की जांच का आदेश दिया था। मामले की जांच खुद खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव कर रहे हैं। अगर इस मामले में कोई भी दोषी पाया जाएगा तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मदन साहनी ने कहा कि मैं खुद मुजफ्फरपुर जाकर सर्वे किया हूं.

इधर रिपोर्ट आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि खाद्य आपूर्ति विभाग में पैसे का खेल चल रहा है. विपक्ष इस मुद्दे को मजबूती से विधानसभा में उठाएगा.

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री के आदेश पर मुजफ्फरपुर जिले के 14 प्रखंडों में यह सर्वे किया गया है। जिसके अनुसार बीमार बच्चों में से 136 बच्चों के परिजन ऐसे मिले हैं जिन्हें मुफ्त एम्बुलेंस सेवा 102 की जानकारी नहीं है। 205 बच्चे ऐसे मिले जो बीमार पड़ने से पूर्व धूप में खेलने गए थे। यह स्थिति तब रही जब पूरे साल जागरूकता अभियान का दावा किया जाता रहा। 289 पीड़ितों में 170 के घर शौचालय नहीं है। वहीं अभी 500 से अधिक परिवारों का सर्वे होना बाकी है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी सोशियो इकोनॉमिक सर्वे की प्रारंभिक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. सर्वे के मुताबिक जो रिपोर्ट सामने आई है. इसमें कहा गया है कि अधिकांश पीड़ित बच्चों का परिवार गरीबी रेखा (बीपीएल) के नीचे हैं.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, अभी तक विभाग ने 287 पीड़ित परिवारों से मिला है जिसमें यह खुलासा हुआ है कि मरने वाले बच्चों के माता-पिता काफी गरीब हैं. इन परिवारों की मासिक आमदनी करीब 4,465 रुपये है.

सर्वे के मुताबिक कई परिवार की सलाना आमदनी मात्र 10 हजार रुपये है. सर्वे में एक और बात का खुलासा हुआ है जिसमें कहा गया है कि पीड़ित परिवारों में से करीब 77 प्रतिशत परिवार में 6-9 सदस्य हैं. पीड़ित 235 मरीजों के परिवार मजदूरी कर अपना भरण पोषण कर रहे हैं. बता दें कि बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों को लेकर कई डॉक्टर कह चुके हैं कि एइएस की एक बड़ी बजह कुपोषण भी है.