Bihar: पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा या चुनाव टलेगा, 6 अप्रैल को पटना हाइकोर्ट करेगा फैसला!

हेमंत कुमार/पटना: बिहार में पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा या चुनाव टलेगा,इस सवाल का जवाब 6 अप्रैल को मिलेगा। उस दिन स्टेट इलेक्शन कमीशन ( SEC) और इलेक्शन कमीशन अॉफ इंडिया (ECI) के बीच ईवीएम (EVM) विवाद पर पटना हाइकोर्ट में निर्णायक सुनवाई है। कोर्ट ने पिछली सुनवाइयों के दौरान दोनों आयोगों से इस मामले को आपसी बातचीत में सुलझा लेने को कहा था। अंतिम सुनवाई 15 मार्च को हुई थी। कोर्ट ने बिहार के एडवोकेट जनरल और भारत के सॉलिसिटर जनरल को विवाद हल करने का जिम्मा दे रखा है। लेकिन स्टेट इलेक्शन कमीशन के सूत्रों ने समझौते की गुंजाइश को खारिज करते हुए कहा है कि इलेक्शन कमीशन अॉफ इंडिया ( ECI) को अपना वह आदेश वापस लेना होगा जिसमें SEC’S को ईवीएम खरीदने के लिए ECI से NOC लेने की शर्त लगाई गयी है। जाहिर है, इस खींचतान का असर पंचायत चुनाव पर पड़ना तय है। पिछली बार 2016 में पंचायत चुनाव की घोषणा 25 फरवरी को हो गयी थी। प्रथम चरण का चुनाव 24 अप्रैल को हुआ था। राज्य में पंद्रह जून से पहले पंचायतीराज संस्थाओं का गठन होना जरूरी है।

स्टेट इलेक्शन कमीशन के सूत्रों ने कहा है कि यह मामला पूरी तरह हमारे अधिकार क्षेत्र के हनन का मामला है। यह दो व्यक्तियों या दो संगठनों के बीच किसी तरह की गलतफहमी का मामला नहीं है, जिसे मिल-बैठकर हल कर लिया जाये। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को अपना वह आदेश वापस लेना होगा जिसमें ईवीएम हासिल करने से पहले सभी स्टेट इलेक्शन कमीशन (SEC’S) को इलेक्शन कमीशन अॉफ इंडिया (ECI) से अनुमति लेने का प्रावधान किया गया है। मालूम हो कि ECI ने 21.7.20 को जारी सर्कुलर में कहा है राज्य निर्वाचन आयोगों को EVM और VVPAT की आपूर्ति/डिजायन से पहले उससे अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा।

सूत्रों ने बताया कि ECI की तरह SEC भी संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है। संविधान की धारा 243(K) में राज्यों में स्थानीय निकायों का स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए स्टेट इलेक्शन कमीशन गठित करने का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट किशन सिंह तोमर केस में स्टेट इलेक्शन कमीशन (SEC) की संवैधानिकता और स्वायत्तता पर मुहर लगा चुका है। ऐसे में ECI को SEC के कामों में हस्तक्षेप करने या निर्देश देने का अधिकार नही है।

SEC के सूत्रों ने बताया कि बिहार में पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल पंचायत चुनाव में होने जा रहा है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में एक साथ छह पदों-पंचायत वार्ड सदस्य, पंच, सरपंच, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए वोट डाले जायेंगे। इसके लिए मल्टी पोस्ट ईवीएम की जरूरत है जिसमें विशेष किस्म की डिटेचेबल मेमोरी चिप लगी होगी। पंचायत चुनाव में ECI के ईवीएम या साफ्टवेयरों का इस्तेमाल नहीं हो सकता है। क्योंकि ECI संसद और विधान सभाओं के चुनाव में जिस ईवीएम का इस्तेमाल करता है, वह सिंगल पोस्ट ईवीएम होता है जिसमें वोटर को केवल एक वोट देना होता है। पंचायत चुनाव में वोटर को छह वोटर देने होंगे। ऐसे में हमारी जरूरत की ईवीएम,डिजायन और साफ्टवेयर को लेकर ECI को निर्देश जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।

बिहार स्टेट इलेक्शन कमीशन ( SEC) का गठन संविधान की धारा 243(K) के तहत किया गया है। स्टेट इलेक्शन कमीशन का गठन और उसके आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। SEC सिंगल मेंबर वाला होता है जिसके मुखिया भारतीय प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी होते हैं। डा दीपक प्रसाद बिहार स्टेट इलेक्शन कमीशन के आयुक्त हैं। आयुक्त की तैनाती छ सालों के लिए होती है। सामान्य परिस्थितियों में सरकार उन्हें उनके कार्यकाल से पहले हटा नहीं सकती है।

इलेक्शन कमीशन अॉफ इंडिया (ECI) लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभाओं,विधान परिषदों के अलाव राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव कराता है। ECI मल्टी मैंबर आयोग है जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के अलावा दो और मैंबर होते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त या आयोग के दो अन्य मैंबर भारतीय प्रशासनिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी होते हैं। केंद्र सरकार में सचिव स्तर का आइएएस अफसर भी सेवा से इस्तीफा देने के बाद ECI में आयुक्त या मैंबर बनाया जा सकता है। ये नियुक्तियां केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति करते हैं।


इलेक्शन कमीशन अरब इंडिया और स्टेट इलेक्शन कमीशन के गठन,दायित्व और अधिकार से स्पष्ट है कि दोनों ही आयोगों का स्वतंत्र अस्तित्व है। उनकी अपनी स्वायत्तता और स्वतंत्रता है। वे किसी के काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं। लेकिन बिहार के पंचायत चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर जारी विवाद संवैधानिक संकट की ओर बढता दिख रहा है।