बीजेपी के विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल के गांव में छिपा था मधुबनी नरसंहार का मुख्य आरोपित

स्टेट डेस्क/पटना: बेनीपट्टी नरसंहार के आरोपित जिस रघौली गांव से गिरफ्तार किये गये हैं, उसी रघौली गांव में बिस्फी से बीजेपी के विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल का घर है। रघौली से आरोपितों की गिरफ्तारी से विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल चर्चा के केंद्र में आ गये हैं! नरसंहार का मुख्य आरोपित प्रवीण झा बजरंग दल का जिला अध्यक्ष और रावण सेना का कर्ताधर्ता भी है। रावण सेना को कथित तौर पर ब्राह्मण हितैषी माना जाताहै। चर्चा है कि पुलिस जिस अशोक महतो के घर से आरोपितों की गिरफ्तारी दिखा रही है, उस नाम का कोई व्यक्ति रघौली में है ही नहीं ! सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस किसी को बचाना चाह रही है?


मधुबनी जिले के बेनीपट्टी के महमदपुर गांव में होली के दिन 29 मार्च को छह लोगों की हत्या के बाद बिस्फी के विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल पर अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तो बिस्फी के विधायक पर बेनीपट्टी नरसंहार में लिप्त होने के भी आरोप लगाये हैं। हालांकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल दलील दे रहे हैं कि घटना स्थल पर सबसे पहले उनकी पार्टी के विधायक और नीतीश सरकार में मंत्री नीरज कुमार बब्बू पहुंच थे। अपराधियों पर कार्रवाई की मांग सबसे पहले हमने की थी। ऐसे में किसी को बचाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।लेकिन जायसवाल बिस्फी के विधायक के बारे में कुछ बोलने से कन्नी काट गये।

मालूम हो कि नरसंहार का नामजद आरोपित प्रवीण झा सहित छह लोग दरभंगा-मधुबनी सीमा के बिस्फी थाना क्षेत्र के रघौली पंचायत के लालपुर गांव से गिरफ्तार किये गये हैं। मधुबनी एसपी डा सत्यप्रकाश के मुताबिक प्रवीण झा , भोला सिंह, चन्दन झा, कमलेश सिंह और मुकेश साफी जिस मकान में आरोपी छिपे थे , उस मकान के मालिक अशोक महतो को भी गिरफ्तार किया गया है।

इस मामले में पहले 10 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, जिनके नाम हैं, देवेंद्र नाथ ठाकुर, निखिल कुमार झा, अभिषेक कुमार झा ,ऋषिकेश कुमार झा, राजा शोभा कांत महतो, गणेश झा, घनश्याम झा, सुनैना देवी, सोनू चौधरी और प्रभात झा। बेनीपट्टी थाने में दर्ज इस कांड (संख्या 67/21) में 35 लोग नामजद हैं जबकि 12 अज्ञात लोगों को आरोपित किया गया है।

बेनीपट्टी में तैनात रह चुके एक पुलिस पदाधिकारी ने बताया कि बिस्फी के विधायक अपराधियों को संरक्षण देते हैं, इसकी सूचना सरकार तक भी पहुंचती रही है। लेकिन सत्ता का संरक्षण मिलने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। उन्होंने बताया कि मोहम्मदपुर नरसंहार का पॉलिटिकल कनेक्शन भी है और इसमें पुलिस की भी संलिप्तता है। अगर पुलिस इस मामले में निष्पक्ष होती तो नरसंहार की नौबत नहीं आती।