सुशांत सिंह राजपूत पर बीजेपी का दोहरा चरित्र, तब फिल्म को बैन कराते थे अब मौत पर कर रहे राजनीति

सेंट्रल डेस्क : बिहार भाजपा के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ ने सोशल मीडिया पर एक स्टीकर जारी किया है, स्टिकर में मुस्कुराते सुशांत की तस्वीर लगी है, हैशटैग जस्टिस फ़ॉर सुशांत के साथ एक स्लोगन लिखा है, “ना भूले हैं! ना भूलने देंगे.”


बिहार बीजेपी के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ ने ऐसे 30 हज़ार स्टिकर्स के अलावा सुशांत के चेहरे की तस्वीर वाले 30 हज़ार फ़ेस मास्क भी पूरे राज्य भर में बांटे हैं. राजनीति के जानकारों की मानें तो इस बात में काफी सच्चाई नजर आती है कि सुशांत सिंह राजपूत केस को लेकर बीजेपी की सारी बेचैनी वोट की राजनीति साधने को लेकर है.

आगामी बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए सोशल मीडिया पर इस स्टिकर को लेकर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं बीजेपी ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत को चुनावी मुद्दा बना दिया है.

इस स्टीकर को लेकर सवाल उठाना लाजमी है. यह स्टीकर सुशांत के प्रति बीजेपी का दोहरा चरित्र दिखाती है. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर लिखा है कि जब तक सुशांत सिंह राजपूत ज़िंदा थे इन्ही भाजपाईयों ने उनकी फ़िल्म केदारनाथ के विरोध में सड़कों पर “नंगानाच” किया था अब देहान्त के बाद वोट की रोटियाँ सेंकने में जुटे हैं।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान अभिनीत फिल्म केदारनाथ 2018 में जब रिलीज होने वाली थी तब भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद् की तरफ से इस फिल्म का भारी विरोध किया गया था. फिल्म को लव जिहाद से जोड़ा गया था, किसिंग सीन और फिल्म के टाइटल पर भी बवाल मचाया गया था.

अब जबसे सुशांत सिंह राजपूत की मौत हुई है तबसे उन्हें इंसाफ दिलाने के नाम पर पॉलिटिक्स और बॉलीवुड में नेपोटिजम के नाम पर कुछ कलाकार अपनी रोटियां सेंक रहे हैं. लेकिन भाजपा इनमें सबसे आगे है. वह बिहार चुनाव में इसे मुद्दा बना रही है साथ ही महाराष्ट्र सरकार पर भी निशाना साध रही है. इसी पूरी लड़ाई में सुशांत के लिए इंसाफ की बात कहीं नहीं है.