29.1 C
Delhi
Homeट्रेंडिंगमोदी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार, सबका साथ सबका विकास

मोदी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार, सबका साथ सबका विकास

- Advertisement -

-जातीय समीकरण, प्रशासनिक अनुभव और युवा को प्राथमिकता
-यूपी से 4-5 नये चेहरे शामिल किए जा सकते हैं मंत्रिमंडल में
-दावाः भाजपा 17 सांसद पांच मंत्री, जदयू 16 में एक भी नहीं
-ओडिशा से बैजयंत पांडा, अश्वनी वैष्णव, विश्वेश्वर टुरू की चर्चा

सेंट्रल डेस्क/ महेश शर्मा: मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर अटकलों का बाजार गरम है। सबसे ज्यादा सियासी गरमाहट बिहार और उत्तर प्रदेश में है। बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा बैलेंस करके चलेंगे। दलित, ओबीसी और ब्राह्मण चेहरे के साथ ही अनुभवी और प्रशासनिक कौशल को भी मौका दिया जा सकता है। यूपी, बिहार, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, असम के साथ ही नार्थ-ईस्ट राज्यों से भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया जाने पर विचार किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में तो अगले साल के पहले तिमाही में विधानसभा चुनाव हैं। लेकिन बिहार में दो क्षेत्रीय दल राजनीतिक सौदेबाजी पर अड़े हैं। पहला जनता दल (यू) तो दूसरा है लोकजनशक्ति पार्टी। खबर है कि बुधवार तक 5 बजे से 6 बजे के बीच मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा। उत्तर प्रदेश से कौन-कौन से चेहरे मंत्रिमंडल में बर्थ पाते हैं यह देखने की बात है पर कानपुर और अकबरपुर से सांसद क्रमशः सत्येदव पचौरी और देवेंद्र सिंह भोले, लखीमपुर खीरी से अजय मिश्रा, सुलतानपुर से वरुण गांधी का नाम चर्चा में हैं। पचौरी व भोले में से किसी एक को जगह मिल सकती है।

आरएसस पर तगड़ी पकड़ और ब्राह्मण चेहरा होने के कारण पचौरी की संभावनाएं अधिक बतायी जाती हैं। भोले भाजपा में ठाकुर लॉबी के नेताओं मे मजबूत हैं। हालांकि उनकी बहू नीरजा सिंह गौर को उन्होंने कानपुर देहात जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जितवाया है। इस सीट पर भाजपा का कोई प्रत्याशी नहीं था। भोले की बहू निर्दलीय प्रत्याशी थीं। यह उनके निगेटिव जा सकता है। कौशांबी से सांसद विनोद सोनकर भी दिल्ली बुलाए गए हैं।

बिहार में रूलिंग पार्टी जनता दल (यू) ने अपने चार सांसदों को मंत्री बनाने की मांग रखने के लिए तानाबाना तैयार किया है। सीएम नीतीश कुमार ने पार्टी अध्यक्ष आरसीपी सिंह को भाजपा केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत के लिए अधिकृत किया है। इस पार्टी से दो कैबिनेट और दो राज्य मंत्री भी बनाए जाने की मांग है। जद (यू) का फार्मूला यह है कि बिहार में भाजपा के 17 सांसद हैं और जद (यू) के 16 सांसद। पर भाजपा के तो पांच मंत्री हैं पर जदयू का एक भी नहीं। ऐसे में चार मंत्री बनाए जाने की मांग पार्टी के अनुसार जायज है। सुशील मोदी के नाम की चर्चा भी तेज़ हैं।

लोकजन शक्ति पार्टी में आपसी रार चल रही है। चिराग पासवान आशीर्वाद यात्रा में बहुत ज्यादा भाजपा नेतृत्व को प्रभावित नहीं कर पाए। यदि चिराग मंत्री बनाए जाते हैं तो चौंकाने वाली बात होगी। उनके पशुपति पारस चाचा चिराग को पार्टी से ही बाहर कर दिया है। पारस चाचा बाजार में कुरता खरीदते देखे गए तो मीडिया ने सवाल पूछ लिया, बोले, राज को राज ही रहने दो। दूसरी तरफ चाचा की तैयारी देखकर सांसद चिराग पासवान ने बयान दे दिया कि असली लोजपा उनके नेतृत्व वाली है। चाचा को मंत्री बनाया गया तो वह कोर्ट में जाएंगे क्योंकि असली लोजपा तो चिराग पासवान की है। चिराग पासवान ने धमकी दी की चाचा को मंत्री बनाया गया तो वे कोर्ट का सहारा लेंगे। लोजपा पार्टी के असली अध्य्क्ष वो खुद है, यदि उनके चाचा को मंत्री बनाया जाता है तो पहले उनको जदयू में शामिल करा दे।

नंबर वन पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिराकर भाजपा की सरकार बनाने में सिंधिया की महती भूमिका का रिवार्ड मिल सकता है। उन्हें एक साल तक इंतजार भी करना पड़ा। ओ़डिशा से दो चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। पहला है बैजयंत जय पांडा और दूसरा बीजू जनता दल के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे भाजपा के अश्वनी वैष्णव जिनके चांसेज मंत्री बनने के ज्यादा बताए जाते हैं। दूसरी तरफ पूर्वसांसद बैजयंत जय पांडा का नाम मंत्रिपद के लिए ज्यादा चर्चा में है। तीसरा नाम ओडिशा की राजनीति में अचानक चर्चा में है। यह नाम है मयूरभंज से भाजपा सांसद विश्वेश्वर टुरू का है। ओडिशा से हालांकि धर्मेंद्र प्रधान और प्रताप षाड़ंगी पहले से ही मंत्री हैं पर इन तीनों में से एक को कैबिनेट बर्थ मिल सकती है। महाराष्ट्र से पूर्व सीएम नारायण राणे और देवेंद्र फणनवीस का नाम चर्चा में है। असम से सर्वानंद सोनेवाल का मंत्री बनना तो लगभग तय माना जा रहा है।

बताते हैं कि सात जुलाई को शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। सरकार में 28 मंत्रिपद खाली हैं। 20 से 22 लोगों को शपथ दिलायी जा सकती है। इस बाबत मंथन चल रहा है। अमित शाह ने कमान संभाली है। वह संगठन मंत्री बीएल संतोष के साथ बराबर बैठकें कर रहे हैं। थावरचंद गहलोत के राज्यपाल बनाए जाने के बाद तो रिक्त हुई राज्यसभा की सीट पर कैलाश विजयवर्गीय, जितिन प्रसाद, दिनेश त्रिवेदी की दावेदारी मजबूत हुई है। उनके मंत्रिपद की जगह सिंधिया तय बताए जाते हैं।

- Advertisement -



- Advertisement -
- Advertisement -
- Advertisement -
Related News
- Advertisement -