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गोमती रिवर फ्रंट की जांच करने इटावा पहुंची सीबीआई ने ठेकेदार पुनीत अग्रवाल का आवास विकास स्थिति आवास को किया सीज

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इटावा/ सुभाष त्रिपाठी: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मे हुए गोमती रिवर फ्रंट घोटाले को लेकर सीबीआई ने ठेकेदार पुनीत अग्रवाल के सिविल लाइन स्थिति आवास को सीज कर दिया। आवास को सीज करने की प्रकिया पुनीत अग्रवाल के परिवार समेत फरार हो जाने के कारण की गई है।

इटावा के एसएसपी डा.ब्रजेश कुमार सिंह ने आज यहाॅ बताया कि गोमती रिवर फ्रंट की जांच को लेकर आज दोपहर सीबीआई टीम के दो सदस्यो ने इस छापेमारी से जुडी हुई जानकारी दी। जिसके बाद पूरी की पूरी टीम छापेमारी की प्रकिया मे जुट गई है। सीबीआई के काम करने का अपना एक अलग तरीका होता है जिसमे जिला पुलिस का कोई दखल नही होता है। सीबीआई टीम अपने हैडक्वार्टर पूरी रिर्पोट देगी उसके बाद कार्यवाही सुनिश्चित करेगी।


छह सदस्यीय टीम ने सोमवार की सुबह शहर के पाश इलाके चैगुर्जी और आवास विकास में ठेकेदार पुनीत अग्रवाल के घर पर छापा मारा। चार घंटे तक घर के अंदर सर्च आपरेशन चला और टीम ने फाइलों को खंगाला।टीम को पुनीत अग्रवाल घर पर नहीं मिले लेकिन कई फाइलें व कागजात कब्जे में लिए हैं।

गोमती रिवरफ्रंट घोटाले में आरंभिक जांच के बाद 2 जुलाई को नया केस दर्ज किया है। इसके बाद घोटाले से जुड़े 190 लोगों को नामजद कर उनके घरों, दफ्तरों और प्रतिष्ठानों में छापामारी का सिलसिला शुरू कर दिया है। इसी क्रम में सोमवार की सुबह टीम इटावा शहर में रहने वाले ठेकेदार पुनीत अग्रवाल के घर पर पहुंच गई। पुनीत अग्रवाल को प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का करीबी बताया जाता है। सीबीआइ की छह सदस्यीय टीम में एक महिला सदस्य भी थी और टैक्सी से आए थे। सुबह सुबह टीम पुनीत अग्रवाल के घर में दाखिल हो गई।

पुनीत अग्रवाल के आवास विकास स्थित नए मकान पर भी टीम गई लेकिन वह बंद मिला था। इसपर टीम ने बाहर लगे ताले पर सील लगाने के बाद दो सिपाहियों का पहरा बिठा दिया।

आरोपी पुनीत अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2012-13 में कांट्रेक्ट के तहत गोमती रिवर फ्रंट लखनऊ में लगभग दो करोड़ रुपये का कार्य किया था, उसने नहर में बंधा बनाने का काम किया है। वह इस समय इटावा से बाहर हैं, वह हालांकि सीबीआई को सारे कागजात पहले ही दे चुके हैं।

अखिलेश यादव की सरकार में राजधानी लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट घोटाले को लेकर सीबीआई ने एफआईआर के बाद उत्तर प्रदेश, बंगाल, राजस्थान समेत 7 राज्योमें छापेमारी की है।

गोमती रिवरफ्रंट घोटाले को लेकर के 2 जून को हुई एफआईआर में 190 लोगों को नामजद किया गया है। सीबीआई की छापेमारी इसी को लेकर के एक साथ की जा रही है । राज्य के 17 शहरों में यह छापेमारी एक साथ की गई है।

सीबीआई टीम पूरे प्रकरण को लेकर के बहुत कुछ तो नहीं बताया लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि सीबीआई टीम पुनीत अग्रवाल के घर से तमाम दस्तावेज संकलित करके ले गई है । और उनके आवास को सील कर दिया। सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पुनीत अग्रवाल ने किस तरह से गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण में भूमिका निभाई है।

सीबीआई की टीम 4 घंटे से अधिक समय तक स्थित चैगुर्जी आवास पर रुकी रही उसके बाद आवास विकास करलोनी स्तिथ मकान पर जाकर मकान को सील की कार्यवाही की।

यह भी जानकारी सामने निकल कर के आ रही है कि सीबीआई की टीम पुनीत अग्रवाल से पूछताछ के लिए 15 सवालों से जुड़ी हुई एक लिस्ट भी लाई थी जिससे माध्यम से कांट्रेक्टर पुनीत अग्रवाल से यह जानने और समझने की प्लांनिग थी कि उन्होंने किस तरह से गोमती रिवर फ्रंट के लिए किस-किस सामग्री की आपूर्ति की है या फिर किस किस निर्माण में भूमिका अदा की है। किसी राजनेता ने तो ठेका दिलाने में मदद की है। कमीशन का स्तर क्या रहा है। इस तरह के कुछ सवाल पुनीत अग्रवाल से पूछे जाने का मन बना करके सीबीआई की टीम आई थी लेकिन पुनीत अग्रवाल के न मिलने से अब यह टीम दोबारा आने की उम्मीद है।

दोपहर बाद सीबीआई टीम ने पुनीत अग्रवाल के आवास विकास वाले आवास को सीज कर दिया है। सीबीआई टीम कार्यवाही के बाद इटावा एसएसपी कार्यालय पर मिलने पहुंची, जानकारी के मुताबिक टीम आज इटावा ही रहेगी और लगातार जांच में जुटी हुई है। सीबीआई टीम ने सिर्फ इतना बताया कि वो सीबीआई से है और यहां लखनऊ गोमती रिवर फ्रंट मामले की जांच करने आये है। इसके अतिरिक्त कोई भी जानकारी आपको नही दे सकते।

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