मुख्यमंत्री ने ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु विभिन्न एप्प का किया शुभारंभ

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद में आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 के तहत ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा, अश्विन पोर्टल, वंडर एप्प एवं रेफरल ट्रांसपोर्ट टैªकिंग सिस्टम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री के समक्ष जीविका दीदी की रसोई का राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के साथ एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर किया गया। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री बाला मुरुगन डी0 एवं राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक श्री मनोज कुमार ने एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर किये।




इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि आज उन्होंने अनेक कार्यक्रमों की शुरुआत कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री एवं प्रधान सचिव स्वास्थ्य ने इसके संबंध में विस्तृत जानकारी आपलोगों को दी है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई प्रगति हो रही है, जिससे आप सभी लोग अवगत हुए हैं। वर्ष 2005 में हमलोगों को काम करने का मौका मिला। उसके पहले स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्या स्थिति थी, आप सभी अवगत हैं। वर्ष 2006 के फरवरी में हमलोगों ने पहला सर्वे कराया, जिसमें यह जानकारी मिली कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिमाह इलाज के लिए सिर्फ 39 मरीज पहुंचते हैं। हमलोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए डॉक्टर्स, स्वास्थ्यकर्मियों को पदस्थापित किया। जरुरत के अनुसार नियोजन एवं नियुक्ति की गई। साथ ही मुफ्त दवा का भी प्रबंध कराया गया। उसके बाद वर्ष 2006 के अंतिम माह में पुनः सर्वे कराया गया जिसमें यह जानकारी मिली कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर औसतन प्रतिमाह इलाज के लिए 1 हजार से 15 सौ लोग पहुंचने लगे हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर लैंड लाइन की व्यवस्था करायी गई और मुख्यमंत्री सचिवालय से सभी चीजों की सतत् निगरानी की गई। वर्ष 2018 की रिपोर्ट की अनुसार पूरे बिहार में एक माह में औसतन 10 हजार मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए पहुंचने लगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सर्वे की रिपोर्ट से पता चला कि बिहार के गरीब परिवारों का सबसे ज्यादा खर्च उनके इलाज पर होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोगों के इलाज की बेहतर व्यवस्था के लिए तेजी से काम किया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के रुप में परिणत किया जा रहा है, जहां 30 बेड की व्यवस्था की गई है। अनुमंडल अस्पतालों में 75 बेड की व्यवस्था की गई है। सभी अस्पतालों के भवनों को भी ठीक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 में सभी स्वास्थ्य केंद्रों को अनुमंडल अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों से लिंक कर देंगे और वहीं पर सारी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी और जरुरत के अनुसार मरीजों का बेहतर इलाज किया जाएगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि धीरे-धीरे सभी स्वास्थ्य केंद्रों को और विकसित किया जाएगा। टेलीमेडिसिन के जरिए स्वास्थ्य उपकेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल एवं जिला अस्पताल से जोड़ा जाएगा। टेलीमेडिसिन के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों का इलाज होगा और उनके लिए दवायें भी उपलब्ध रहेंगी। मैं इस बात के लिए आप सबका अभिनंदन करता हूं कि आपलोगों ने इस काम को तेजी से शुरु कर दिया है। लाभार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने इस संबंध में बातचीत के जरिए जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वन्डर एप्प की मदद से गर्भवती महिलाओं को इलाज में काफी सुविधा होगी। इसका शुभारंभ दरभंगा से हो गया है और इसे अन्य जगहों में भी शुरु किया जाएगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं जिसकी जानकारी लोगों को सोशल मीडिया के माध्य्ाम से एवं मीडिया के जरिये दी जाय। पंचायत और प्रखंड स्तर तक अभियान चलाकर लोगों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी दें। उन्हें बताएं कि नई तकनीक की सुविधाएं कैसे प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम की आज शुरुआत हो गई है। इसके माध्यम से एंबुलेंस सेवा का बेहतर लाभ लोगों को अब मिल सकेगा। लोग ससमय अस्पताल पहुंच पाएंगे। एंबुलेंस कहां है, उसमें कौन मरीज है, कहां है, कहां जाना है, किसको ला रहे हैं, कहां ले जाना है सबकी जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अश्विन पोर्टल की भी शुरुआत की गई है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं को समय पर पैसा उनके अकाउंट में चला जाएगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले पूर्णिया के धमदाहा में हमने देखा कि आशा की दीदियां एक मरीज के लिए 100 रुपये में नास्ता एवं खाना उपलब्ध करा रही हैं, हमने कहा कि इसे बढ़ाकर 150 रुपया कर दिया जाए। आज दीदी की रसोई कार्यक्रम के संचालन हेतु एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर भी किया गया है जिससे सभी सदर तथा अनुमंडलीय अस्पतालों में दीदी की रसोई स्थापित की जा सकेगी। इससे लोगों को नास्ता एवं भोजन की सुविधा ससमय उपलब्ध होगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 में मुजफ्फरपुर में दो स्वयं सहायता समूह के लोगों से हमने बात की थी। उसके बाद हमलोगों ने तय किया कि स्वयं सहायता समूह को और बेहतर बनाएंगे। वल्र्ड बैंक से कर्ज लेकर 44 ब्लॉक में हमने जीविका की शुरुआत करायी थी। उसके बाद पूरे बिहार में इसका विस्तार किया गया। गया की जीविका दीदियों से बातचीत की तो बैंक के बारे में ऋण, लेन देन से संबंधित उनकी जानकारी देखकर मैं अचंभित हुआ और मुझे बेहद खुशी भी हुई कि वे पढ़ी लिखी नहीं हैं उसके बाद भी इतनी बढ़िया जानकारी रखती हैं। हम समय-समय पर जीविका समूह के सभी कामों को जगह-जगह जाकर देखते रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 लाख जीविका समूहों का गठन किया गया है। 1 करोड़ 20 लाख परिवार की महिलाएं जीविका से जुड़ गई हैं। बिहार की आर्थिक स्थिति में सुधार में जीविका की दीदियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। तत्कालीन केंद्र की यू0पी0ए0 की सरकार ने बिहार की जीविका को आजीविका नाम से पूरे देश में चलाया। सोशल मीडिया पर भी आपलोग सकारात्मक बातों को बताने का काम कीजिए। स्वास्थ्य विभाग का दायित्व है कि पहले और आज के कामों को नई पीढ़ी को बतायें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन बच्चे-बच्चियों के हार्ट में छेद हो उनके इलाज की व्यवस्था राज्य सरकार कर रही है। राज्य सरकार अपने खर्चे से गुजरात के अहमदाबाद में ऐसे बच्चों के इलाज की मुफ्त व्यवस्था कर रही है। इसके साथ-साथ बिहार के अस्पतालों में ऐसे बच्चे-बच्चियों के इलाज की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब हम सांसद थे तो बिहार के लोगों के लिये एम्स में इलाज और उनके रहने की व्यवस्था करवाते थे। हमलोगों ने संकल्प लिया कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं का ऐसा प्रबंध करेंगे कि किसी को मजबूरी में इलाज के लिए बिहार से बाहर जाना नहीं पड़े। अगर कोई अपनी इच्छा से इलाज के लिए बाहर जाना चाहते हैं तो अलग बात है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के मामले में भी राज्य में बहुत काम हो रहा है। पूरे देश में जितने कोरोना के टेस्ट हुये हैं उसका 10 प्रतिशत टेस्ट बिहार में हुआ है। 10 लाख की आबादी पर जो देश में औसतन कोरोना जांच हो रही है उससे 21 हजार से अधिक जांच बिहार में हो रही है। दो खंडों के लोगों का वैक्सीनेशन शुरु हो गया है। कल नीति आयोग की बैठक थी, प्रधानमंत्री जी से हमलोगों ने चर्चा की। अगले माह से सभी का वैक्सीनेशन शुरु हो जाएगा। अगले चरण में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और 50 वर्ष से कम उम्र के गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों का टीकाकरण कराया जाएगा। सभी से कहूंगा कि टीका जरुर लगवाएं। कोरोना से निश्चिंत होने की जरुरत नहीं है सचेत रहना है, सजग रहना है। उन्होंने कहा कि पल्स पोलियो अभियान बिहार में जिस प्रकार चलाया गया उससे पोलियो से छुटकारा मिला। सभी जगह इसकी प्रशंसा हुई। श्री बिल गेट्स जी ने बिहार के खगड़िया के इलाके में जाकर पल्स पोलियो टीकाकरण का काम देखा था और इसकी प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग बेहतर काम करते हैं उसी का नतीजा है सब काम अच्छा होता है। बिहार आत्मनिर्भर बनेगा और देश को विकसित करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगा।


मुख्यमंत्री का स्वागत स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने पुष्प-गुच्छ भेंटकर किया। मुख्यमंत्री ने ई-संजीवनी के लाभार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की, जिसमें पटना जिले के पैमाल हेल्थ सब सेंटर से ए0एन0एम0 श्रीमती माया कुमारी, पोठही की लाभार्थी श्रीमती रीना सिन्हा, नालंदा जिले के दीपनगर हेल्थ सब सेंटर की ए0एन0एम0 श्रीमती पूनम कुमार तथा सिवान जिले के बरहरिया हेल्थ सब सेंटर की ए0एन0एम0 श्रीमती नीतू कुमारी शामिल हैं।