राजद में हताशा रोकने लिए दी जा रही लालू के बाहर आने की दिलासा- सुशील मोदी

पटना: सुशील मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद की राजनीतिक ब्रांड वैल्यू खत्म हो चुकी है, इसलिए 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने अपने पोस्टर से उनकी फोटो तक हटा ली थी। वे जेल में रहें या जमानत पर बाहर आयें, यह एक न्यायिक मामला है। इससे बिहार की मजबूत एनडीए सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसा लगता है कि राजद में बढती घुटन और हताशा से निपटने के लिए पार्टी लालू प्रसाद के जल्द जेल से बाहर आने का दिलासा दे रही है।



लालू प्रसाद के जेल से बाहर रहते बिहार में लोकसभा और विधानसभा के कई चुनाव हुए, लेकिन उनके पक्ष में जिन्न निकलना बंद हो चुका है। मतदाता उनके 15 साल के कुशासन, परिवारवाद, जातीय द्वेष और भ्रष्टाचार को नहीं भूले, इसलिए लालू प्रसाद गरीबों के चित से उतर गए। अब चुनावी हार को स्वीकार करने के बजाय उनकी पार्टी ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है या जोड़तोड़ से जनादेश को पलटने का कुचक्र रचती है।

लालू प्रसाद के जेल से बाहर रहते 2005 और 2010 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी बुरी तरह पराजित हुई और 2014 के संसदीय चुनाव में तो वे अपनी पुत्री मीसा भारती को भी नहीं जिता पाए थे। 2010 के विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद ने 100 चुनावी सभाएँ कीं, जबकि राजद मात्र 22 सीटें जीत पाया। उसके पास विपक्ष का नेता बनाने की भी हैसियत नहीं थी।