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कोरोना: बिहार में 48 घंटे में 12 की मौत, IGIMS में हुए जीनोम सीक्वेंसिंग में 32 सैंपल में 27 में ओमिक्रॉन मिले हैं

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स्टेट डेस्क: 48 घंटे में 12 मौत का संकेत ठीक नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर में भी ऐसे ही संकेत के बाद हाहाकर मचा था। इस बार की चुनौती दोहरी है। क्योंकि कोरोना के एक नहीं 2 वैरिएंट से लड़ाई है। इसमें एक डेल्टा है, जिसने दूसरी लहर में तबाही मचाई।

वहीं, दूसरा ओमिक्रॉन, जो संक्रमण की रफ्तार को कम्युनिटी स्प्रेड कर दिया है। ऐसे में अब खतरा बढ़ रहा है। वैक्सीनेशन और कोरोना प्रोटोकाॅल में लापरवाही भारी पड़ सकती है। क्योंकि वायरस का कम्युनिटी स्प्रेड हो चुका है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग भी वायरस को अंडर स्टीमेट करना खतरनाक बता रहा है।

एक्सपर्ट बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में डेल्टा ने तबाही मचा दी थी। इस बार भी वह जानलेवा है। मौत का कारण भी बन रहा है। वैक्सीनेशन नहीं कराने वालों पर इसका बड़ा असर दिख रहा है। जब कोरोना वायरस के दो-दो वैरिएंट से लड़ाई का समय हो तो सावधानी से ही लड़ाई हो सकती है।

कोरोना पर स्टडी करने वाले पटना एम्स के ट्रामा इमरजेंसी के एचओडी डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि अगर वैक्सीनेटेड नहीं है और उसके बाद भी कोरोना को हल्के में ले रहे। बिना मास्क के सोशल डिस्टेंस भी नहीं मान रहे तो यह जान से बड़ा खिलवाड़ है। डेल्टा कभी खत्म नहीं हुआ था और वह आज भी एक्टिव है।

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