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रक्षा कर्मियों ने हड़ताल, धरना, प्रदर्शन किया तो साल भर की कैद,10 हजार जुर्माना

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*26 जुलाई की हड़ताल अब नहीं होगी, 8 जुलाई को कालाफीता बांधकर काम करेंगे
*देश में 41 आयुध कारखाने हैं जिनमें पांच कानपुर में, कर्मचारी कुल 70 हजार

कानपुर/ महेश शर्मा: केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से देश के 41 आयुध कारखानों के 70 हजार कर्मचारियों द्वारा किसी भी तरह की हड़ताल, धरना, प्रदर्शन आदि पर रोक लगा दी है। बुधवार को लाए गए इस अध्यादेश के बाद अब रक्षा कर्मचारियों की यूनियन संबंधी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है। उल्लंघन करने वाले कर्मचारी या कर्मचारियों को एक साल की जेल व दस हजार रुपया जुर्माना लगाया जा सकता है। अध्यादेश लाने के पीछे देश की 41 आयुध कारखानों के बोर्ड को भंग करके सात कारपोरेशनों विभाजित करने के फैसले के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल, धरना प्रदर्शन पर रोक लगाना है।

प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने कड़ा विरोध किया:

Mukesh General Secretary
All India Pratiraksha Majdoor Sangh

इसके विरोध में संघ परिवार का मजदूर संगठन भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मुकेश सिंह ने कड़ा विरोध किया है और कहा कि यह तो ड्रैकोनियन अध्यादेश लोकतंत्र विरोधी है। मुकेश कहते हैं कि 26 जुलाई की हड़ताल के लिए 8 जुलाई को नोटिस देनी थी पर अब नहीं दे सकेंगे। अध्यादेश के विरोध में उस दिन काले फीते बांधकर काला दिवस मनाएंगे। 26 जुलाई को प्रस्तावित हड़ताल अब नहीं होगी। आपको बताते चलें कि कानपुर में सबसे ज्यादा पांच आयुध कारखाने हैं। स्माल आर्म्स फैक्ट्री, फील्डगन फैक्ट्री, ओईएफ, पैराशूट फैक्ट्री। इसके अलावा सेंट्रल आर्डनेंस डिपो भी है। मैटीरियल साइंस की सबसे बड़ी लैब डीएमएसआरडीई भी यहीं है। हवाई जहाज कारखाना एचएल भी है।

क्या है मामला:

सेंट्रल कैबिनेट की 16 जून की बैठक में एक झटके में 220 साल पुरानी डिफेंस फैक्ट्रीज को सात कंपनियों (कारपोरेशनों) में बांट दिया गया। ये फैक्टरियां आर्डनेंस फैक्टरीज बोर्ड का हिस्सा थी। बोर्ड भंग कर दिया गया। इन्हीं फैक्टरियों के आयुध प्रोडक्शन के बूते देश ने कई लड़ाइयां फतह की और आतंकवादियों से भी बखूबी लड़ाई जारी है। देश में 41 डिफेंस फैक्ट्रीज हैं। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मुकेश सिंह सरकार के इस कदम को भारतीय रक्षा रणनीतिक कौशल और प्रबंधन के खिलवाड़ बताते हैं। वहीं सरकार इसे सुधार प्रक्रिया का हिस्सा बताती है। इन फैक्ट्रीज में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर भी सरकार का उदारवादी रवैया है।

रक्षा से जुड़े प्रत्यक्ष व परोक्ष कर्मचारी होंगे दायरे में:

अभी सरकार के इस कदम के राष्ट्रव्यापी विरोध की तैयारी चल ही रही थी कि बुधवार को एक अध्यादेश के माध्यम से सरकार ने डिफेंस सेक्टर को भी आवश्यक सेवाओं में शामिल करके कर्मचारियों का हड़ताल प्रदर्शन व किसी भी तरह का विरोध करने का अधिकार पर रोक लगा दी है। ऐसा करने वाले पर सीधे बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है। आपको बता दें कि आर्डनेंस फैक्ट्रीज बोर्ड को कारपोरेशन बनाने के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का फैसला कर्मचारियों के महासंघों ने लिया ही था कि सरकार बुधवार को आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021 ले आयी और यूनियन गतिविधियों पर रोक लगा दी। इस राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार रक्षा उपकरण के उत्पादन, सेवा और संचालन में शामिल कर्मचारी ये सेना से जुड़े किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान के उत्पादन में शामिल कर्मचारियों के साथ ही रक्षा उत्पादों की मरम्मत और रखरखाव में कार्यरत कर्मी अध्यादेश के दायरे में आएंगे।

एक साल की जेल व 10 हजार जुर्माना:

कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक कोई भी व्यक्ति जो हड़ताल शुरू करता है या ऐसी किसी भी हड़ताल में भाग लेता है जोकि इस अध्यादेश के तहत गैर-कानूनी है तो उसे एक साल तक की जेल या 10 हजार रुपया जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। यही नहीं गैरकानूनी हड़ताल में शामिल होने या उकसाने वाले को जुर्माना के अलावा दो साल की जेल हो सकती है। हां, यह भी है कि 70 हजार कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर असर नहीं पड़ेगा।

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