Dharm: तिरुपति बालाजी मंदिर के यह ग्यारह सच जो शायद आप नहीं जानते

देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में तिरुपति बालाजी मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। कई बड़े उद्योगपति, फिल्म सितारे और राजनेता यहां अपनी उपस्थिति देते हैं क्योंकि उनके चमत्कारों की कई कथाएं प्रचलित हैं।


आइए जानें उनके ग्यारह आश्चर्यजनक चमत्कार:

  1. मुख्यद्वार के दाएं और बालाजी के सिर पर अनंताळवारजी के द्वारा मारे गए निशान हैं। बालरूप में बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था, उसी समय से बालाजी के ठोड़ी पर चंदन लगाने की प्रथा शुरू हुई।
  2. भगवान बालाजी के सिर पर आज भी रेशमी बाल हैं और उनमें उलझने नहीं आती और वह हमेशा ताजा लगते है।
  3. मंदिर से 23 किलोमीटर दूर एक गांव है, उस गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। वहां पर लोग नियम से रहते हैं। वहां की महिलाएं ब्लाउज नहीं पहनती। वहीं से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं और वहीं की ही अन्य वस्तुओं को चढाया जाता है जैसे- दूध, घी, माखन आदि।
  4. भगवान बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े दिखते हैं मगर वे दाई तरफ के कोने में खड़े हैं बाहर से देखने पर ऎसा लगता है।
  5. बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है।
  6. गृभगृह में चढ़ाई गई किसी वस्तु को बाहर नहीं लाया जाता, बालाजी के पीछे एक जलकुंड है उन्हें वहीं पीछे देखे बिना उनका विसर्जन किया जाता है।
  7. बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ करो, वहां गीलापन रहता ही है, वहां पर कान लगाने पर समुद्र घोष सुनाई देता है।
  8. बालाजी के वक्षस्थल पर लक्ष्मीजी निवास करती हैं। हर गुरुवार को निजरूप दर्शन के समय भगवान बालाजी की चंदन से सजावट की जाती है उस चंदन को निकालने पर लक्ष्मीजी की छबि उस पर उतर आती है। बाद में उसे बेचा जाता है।
  9. बालाजी के जलकुंड में विसर्जित वस्तुए तिरूपति से 20 किलोमीटर दूर वेरपेडु में बाहर आती हैं।
  10. गर्भगृह मे जलने वाले दीपक कभी बुझते नही हैं, वे कितने ही हजार सालों से जल रहे हैं किसी को पता भी नही है।
  11. बताया जाता है सन् 1800 में मंदिर परिसर को 12 साल के लिए बंद किया गया था। किसी एक राजा ने 12 लोगों को मारकर दीवार पर लटकाया था उस समय विमान में वेंकटेश्वर प्रकट हुए थे ऎसा माना जाता है।

तिरुपति के लड्डू का रहस्य:

तिरुपति में मौजूद बालाजी का मंदिर पूरी दुनिया में मशहूर है, बाबा के दर्शन के लिए आम लोगों से लेकर दुनिया भर के अमीर लोग यहां दर्शक को आते हैं। जितना खास ये मंदिर है उतना ही खास है यहां पर प्रसाद के रूप में मिलने वाला लड्डू। आखिर ये लड्डू क्यों इतना खास है हम आपको बताते हैं उसकी कहानी।

  1. प्रसाद में मिलने वाले इस लड्डू का इतिहास 300 सालों से भी पुराना है। कहा जाता है कि पहली बार 2 अगस्त 1715 में इस लड्डू को प्रसाद के तौर पर दिया गया था, उसके बाद ये लड़्डू इस मंदिर का खास प्रसाद बन गया।
  2. इस लड्डू को बनाने में आटा, चीनी, घृत, इलायची और मेवे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद इन्हें वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा के दौरान भगवान को अर्पित किया जाता है।
  3. इस लड्डू की कीमत की कुछ खास ज्यादा नहीं है। साथ ही ये कई दिनों तक चलता है, इसलिए यहां आने वाला हर शख्स इस लड्डू को यहां से खरीदकर जरूर ले जाता है।
  4. इस लड्डू को बनाने के लिए भी एक खास जगह है, जहां हर शख्स के जाने की इजाजत नहीं हैं। इस लड्डू को बनाने के लिए रसोईया भी खास है। एक दिन में करीब 3 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं और भगवान को प्रसाद में रोज ताजे लड्डू ही चढ़ाए जाते हैं।
  5. यहां मिलने वाले लड्डू का जो स्वाद है हो आपको दुनिया में कही भी नहीं मिलेगा।