डॉ. अमित किशोर: बिहार के छोटे से गाँव से बेस्टसेलर लेखक तक का सफर

मोटिवेशनल: सरल भाषा, प्रामाणिक पाठ्य सामाग्री एवं छात्रों की जरूरत को समझते हुए उपयोगी लेखन, डॉ. अमित किशोर की पुस्तकें पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के छात्रों के लिए किसी अनमोल तोहफे से कम नहीं । शानदार विषय वस्तु वाली उनकी किताबें बेस्ट सेलर भी बनती हैं, उनकी पिछली पाँच पुस्तक अमेज़न और अन्य ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान कटेगरी में बेस्टसेलर साबित हुई है और पिछली तीन पुस्तक तो लॉचिंग के दिन ही बेस्टसेलर पुस्तक में शामिल हो गई जिससे उनकी पुस्तकों की लोकप्रियता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।


पुस्तकालय विज्ञान विषय में प्रति वर्ष सैंकड़ों लेखक किताबें लिखते हैं, लेकिन कुछ खुशकिस्मत पुस्तकें और लेखक ही होते है जो पाठकों के बीच जगह बना पाती हैं। ऐसे ही खुशनसीब लेखक है डॉ अमित किशोर। उनकी पहली किताब वर्ष 2011 में प्रकाशित हुई थी और अबतक उनकी 28 पुस्तक (जिसमें 8 संपादित पुस्तक) प्रकाशित हो चुका है। उनकी पुस्तक को न सिर्फ छात्रों ने सराहा, बल्कि हाथोंहाथ लिया है।

डॉ. अमित किशोर से बातचीत के अंश-

अपने बारे में कुछ बताइए?

मैं भागलपुर (बिहार) जिले के एक छोटे से गाँव अकबरपुर (कहलगाँव प्रखण्ड) का निवासी हूँ। मेरे गाँव के लोगों का शुरू से ही शिक्षा और खेल के प्रति लगाव रहा है। मेरे पिता किसान है वहीं मेरी स्वर्गीय माँ शिक्षिका थी। मेरी शिक्षा में मेरी स्वर्गीय माँ और मेरे स्वर्गीय दादा जी जो पेशे से शिक्षक थे, का अहम योगदान रहा है। वर्तमान में पुस्तकालय व्यवसायी के रूप में कार्यरत हूँ और अपने खाली समय या अवकाश के दिनों का उपयोग लेखन में करता हूँ।

आपने पुस्तक लेखन के बारे में कब सोचा?

मैंने कभी नहीं सोचा था कि पुस्तक लिखेंगे, परंतु अपने अध्ययन के दौरान हिन्दी माध्यम में पुस्तकालय और सूचना विज्ञान विषय में अद्यतन पाठ्य सामग्रियों और पुस्तकों के अभाव को देखते हुए वक्त निकालकर मैंने पुस्तक लिखने का मन बनाया। काफी मशक्कत के बाद निर्मल पब्लिकेशन, दिल्ली द्वारा मेरी पहली पुस्तक ‘कृषि सूचना प्रणाली’ प्रकाशित की गई और उस पुस्तक पर पाठकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से धीरे-धीरे लेखन कब जनून बन गया पता ही नहीं चला।

अमेज़न या फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन साइटों पर बेस्टसेलर पुस्तक से लेखकों को क्या फायदा मिलता है ?

मेरी नई पुस्तक “एन औब्जैकटिव अप्रोच टु लाइब्रेरी एंड इन्फोर्मेशन साइंस”’ पुस्तकालय विज्ञान कटेगरी के अमेज़न बेस्ट सेलर में शामिल होने वाली यह मेरी पाँचवीं पुस्तक है। वर्तमान में अमेज़न और फ्लिपकार्ट ने बाजार के एक मानक तय किया है, और इसपर बेस्टसेलर रैंक और समीक्षा पूर्णतया पब्लिक और पारदर्शी होता है जिससे पाठकों को पुस्तक खरीद के पहले ही काफी उपयोगी जानकारी मिल जाती है साथ ही पुस्तक पसंद नहीं आने पर रेपलेसपेंट प्रक्रिया भी काफी आसान है । इसका मतलब साफ है कि आप स्वघोषित बेस्ट्सेलर लेखक नहीं बन सकते और सबकुछ पाठकों पर निर्भर है, जिसके कारण अगर कंटेन्ट अच्छा हो तो नए लेखकों की पुस्तक भी बेस्टसेलर हो रहे हैं और इसका असर पुस्तक के ऑफलाइन मार्केट पर भी पड़ता है ।

बिक्री के लिहाज से आप की किताबों ने 50 हजार का आंकड़ा पार किया है। इसमें कंटेन्ट के साथ-साथ मार्केटिंग का भी बड़ा रोल है। पुस्तक की मार्केटिंग आपने किस प्रकार की?

मेरी पिछली सात पुस्तक काफी पाठक मिले है और प्रायः सभी पुस्तक को पाँच हजार के आस-पास पाठक मिले और कुछ पुस्तक दस हजार से भी ज्यादा बिकी है, पुस्तकालय विज्ञान के पाठक वर्ग की संख्या को देखते हुए यह काफी अच्छा कहा जा सकता है। सोशल मीडिया के आने से नए लेखकों को अपने कंटेन्ट को लोगों तक पहुँचाने का माध्यम मिला है। सोशल साइट्स की वजह से अच्छी कंटेन्ट वाली पुस्तक का वर्चस्व धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है और अब लोग प्रकाशक या लेखक के नाम की जगह कंटेन्ट को प्राथमिकता दे रहे है। मेरी शुरुआती आठ-दस पुस्तक को महज सैकड़ों प्रति बिकी परंतु जिसने पढ़ी उससे तारीफ मिली। पहले लेखक की सोच थी कि उनका काम सिर्फ लिखना है और किताब बेचने का काम प्रकाशक का है। इसे मैंने दूर किया, मेरी राय में मेरी किताब के साथ मेरा एक भावनात्मक रिश्ता है और उसकी वजह से मैं उसकी मार्केटिंग और बेहतर तरह से कर पाऊंगा और मैंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पुस्तकों की मार्केटिंग शुरू की और धीरे-धीरे लोगों की सफलता में योगदान और उनके माउथ पब्लिसिटी से मेरी पुस्तक पाठकों की पसंद बनती गई और अब मुझे मार्केटिंग की ज्यादा आश्वश्यकता नहीं रही क्योंकि सफल छात्रों ने ही मेरी पुस्तकों को अन्य के बीच लोकप्रिय बनाया ।

आप सिर्फ पुस्तकालय विज्ञान विषय पर ही लेखन करते हैं ?

मेरी अबतक सारी पुस्तक पुस्तकालय विज्ञान विषय की रही है और जल्द ही ‘मानवाधिकार’ पर पुस्तक आने वाली है । अपनी किताब के जरिए पुस्तकालय विज्ञान के छात्रों को अद्दतन और उपयोगी पाठ्य सामाग्री उपलब्ध कराना ही मेरे लेखन का एकमात्र उद्देश्य है और जिस तरह से मेरी पुस्तकों को प्यार मिला है उससे साबित होता है कि मैं काफी हद तक इसे पूरा करने में सफल रहा हूँ और आगे भी इस दिशा में कार्य करता रहूँगा।

इन दिनों आप क्या लिख रहे हैं ?

मैं पुस्तकालय विज्ञान के यूजीसी नेट के नवीन पाठ्यक्रमानुसार सैद्धान्तिक पुस्तक लिख रहा हूँ जो कि हिन्दी माध्यम में होगी और इसके बाद प्रयोगिक सूचीकरण और वर्गीकरण पर पुस्तक लिखने कि योजना है ।

पुस्तकालय विज्ञान में रोजगार के क्या अवसर है?

एक प्रोफेशनल कोर्स के रूप में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान रोजगार के विविध अवसर प्रदान करती है और प्रशिक्षित पुस्तकालय विज्ञान डिग्री अथवा डिप्लोमा धारकों के लिए, पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन), प्रलेखन अधिकारी, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, ज्ञान प्रबंधक जैसे पदों पर स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, रेल, बैंक, न्यायालय, सार्वजनिक पुस्तकालयों, आदि जगहों पर नियुक्ति के बेहतरीन अवसर उपलब्ध है।मोटिवेशनल:एक प्रोफेशनल कोर्स के रूप में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान रोजगार के विविध अवसर प्रदान करती है और प्रशिक्षित पुस्तकालय विज्ञान डिग्री अथवा डिप्लोमा धारकों के लिए, पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन), प्रलेखन अधिकारी, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, ज्ञान प्रबंधक जैसे पदों पर स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, रेल, बैंक, न्यायालय, सार्वजनिक पुस्तकालयों, आदि जगहों पर नियुक्ति के बेहतरीन अवसर उपलब्ध है।