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हमेशा साये की तरह आखिरी सांस तक दिलीप कुमार के साथ रहीं उनकी पत्नी सायरा बनों

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सेंट्रल डेस्क : हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का निधन हो गया है। वे 98 साल के थे। दिलीप कुमार के साथ उनकी पत्नी और अभिनेत्री सायरा बानो उनकी आखिरी सांस तक साथ रहीं। दिलीप कुमार पिछले काफी समय से फिल्मों से दूर थे और बीमार भी ऐसे में सायरा ही उनका पूरा ख्याल रखती थीं।

दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पाकिस्तान में हुआ था और उनका पहला नाम यूसुफ खान था। बाद में उन्हें पर्दे पर दिलीप कुमार के नाम से शोहरत मिली। एक्टर ने अपना नाम एक प्रोड्यूसर के कहने पर बदला था, जिसके बाद उन्हें स्क्रीन पर दिलीप कुमार के नाम से लोग जानने लगे। यूं तो फ़िल्मी दुनिया में ऑन स्क्रीन बहुत सी जोड़ियां हिट रही हैं, लेकिन दिलीप कुमार और सायरा बानों फ़िल्मी पर्दे और रियल लाइफ में भी हिट रहे.

दिलीप कुमार और सायरा बानो की जोड़ी इंडस्ट्री की सबसे पुरानी जोड़ी में से एक है। सायरा बानो ने 1966 में 22 साल की उम्र में दिलीप कुमार से शादी की थी। उस समय दिलीप कुमार 44 साल के थे। सायरा और दिलीप कुमार की लव स्टोरी बहुत फेमस रही है। 12 साल की उम्र से सायरा दिलीप साहब को दीवानों की तरह चाहती थीं। जब ये चाहत दिलीप कुमार के सामने आई तब दिलीप कुमार को कुछ समझ नहीं आया क्योंकि दिलीप साहब उस वक्त किसी और के प्यार की गिरफ्त में थे।

दो बार प्यार में नाकामयाब रहे दिलीप सायरा में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। उम्र के फर्क के चलते भी दिलीप इस रिश्ते से कतरा रहे थे लेकिन वह इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि सायरा उनसे बेइंतेहा मोहब्बत करती हैं। ये 1966 का साल था। दिलीप कुमार और सायरा बानो ने अपने मोहब्बत के एलान का फैसला कर लिया था। दिलीप कुमार पर वैसे तो देश-विदेश की कई लड़कियां जान छिड़कती थीं, लेकिन उन्हें सायरा बानो पसंद आईं।

23 अगस्त 1966 को सायरा बानो के घर सालगिरह की एक पार्टी में दिलीप कुमार पहुंचे थे और इस दौरान सायरा साड़ी पहनकर तैयार हुई थीं। अगले दिन दिलीप कुमार ने पार्टी के खाने की तारीफ करते हुए सायरा बानो को फोन किया और फिर मुलाकातों का सिलसिला चल पड़ा और ये रिश्ता शादी में बदल गया।

शादी के इतने साल बाद भी सायरा और दिलीप कुमार हर मुश्किल घड़ी में साथ रहे। अल्जाइमर से पीड़ित दिलीप साहब का सायरा बानो ने पूरा ख्याल रखा। जिंदगी के हर मोड़ पर दोनों एक-दूसरे के साथ ऐसे खड़े दिखे जैसे पानी में मछली। सायरा बानो के शब्दों में दिलीप साहब उन्हें कायनात से तोहफे में मिले।

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दिलीप कुमार ने 1947 में आई फिल्म ‘जुगनू’ से उन्होंने पहली बार सफलता का स्वाद चखा फिर उसके बाद उन्हें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। दिलीप कुमार ने देवदास, मुगल-ए-आजम जैसी फिल्मों में अपने शानदार अभिनय को पेश किया है। वह आखिरी बार 1998 में आई फिल्म ‘किला’ में नजर आए थे। दिलीप कुमार को 2015 में उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा गया था।उन्हें 1994 में दादासाहेब फाल्के अवार्ड भी मिल चुका है।

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