हाईकोर्ट का बड़ा फैसला पूर्व मुख्यमंत्रियों को खाली करना होगा सरकारी बंगला

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स्टेट डेस्क : पटना हाई कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक बड़े फैसले में पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सरकारी आवास की आजीवन सुविधा ख़त्म कर दी। पूर्व से सुरक्षित इस फैसले को सुनाते हुए चीफ जस्टिस ए पी शाही की खंडपीठ ने कहा की पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देना असंवैधानिक है और सार्वजानिक धन का दुरूपयोग भी है।

फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा की MLA और MLC की हैसियत से फ्लैट रख सकते हैं लेकिन EX CM की हसियत से मिले बंगले को छोड देना होगा। हाईकोर्ट के फैसले से फिलहाल बिहार के पांच पूर्व मुख्यमंत्री प्रभावित होंगे जिनमें लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, जगन्नाथ मिश्र, जीतन राम मांझी और सतीश प्रसाद सिंह शामिल हैं।

कोर्ट का यह फैसला आते ही राजनीतिक हलको में खलबली मच गयी चूकि कुछ दिन पहले ही बंगला विवाद लेकर कोर्ट ने तेजस्वी यादव पर कदा रूख अख्तियार किया था और उन्हें बंगला खाली करने के आदेश के साथ साथ पचास हज़ार रुपए का जुरमाना भी लगाया था। अंततः तेजस्वी को अपना बंगला खाली करना पड़ा।

अब इस फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी हर हाल में आजीवन के लिए मिली इस सुविधा से वंचित होना पड़ेगा। फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कोर्ट का सम्मान करते हुए बयां दिया कि अगर कोर्ट ने यह फैसला दे दिया है तो बंगला जरूर खाली करेंगे