पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि काबू नहीं हुआ तो ट्रक मालिक वाहनों की चाबियां कलेक्टरों को सौंप देंगे

सेंट्रल डेस्क: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से आशंका है कि यह रेट 100 रुपये प्रति लीटर के पार भी जा सकता है। इससे नाराज ट्रक मालिकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि वह पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अंकुश लगाएं, नहीं तो 15 दिन बाद सभी ट्रक मालिक अपने वाहनों की चाबियां जिला कलेक्टरों को सौंप देंगे। इसके बाद 3700 संगठन सरकार को पत्र लिखेंगे।


ट्रक चालकों के संगठन सरकार से मांग करेंगे कि उनका माल भाड़ा भी ऑटो-टैक्सी की तरह प्रति किलोमीटर की दर से तय किया जाए। यह किराया तेल कीमतों से लिंक होना चाहिए। तेल कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ इसमें भी बढ़ोतरी की जानी चाहिए। इससे देश के करोड़ों ट्रक मालिकों-चालकों को तेल की बेलगाम तरीके से बढ़ती कीमतों की मार से बचाया जा सकेगा। ट्रक मालिक-चालक इस समय भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।


ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रवक्ता राजेंद्र कपूर ने बताया कि संस्था की शनिवार को हुई एक बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि सभी संगठन पहले केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर काबू पाने की अपील करेंगे। यदि सरकार 14 दिनों में यह मांग पूरी नहीं करती है तो वे चक्का जाम की बजाय कामबंदी करेंगे। एक निश्चित दिन पर वे अपने-अपने वाहनों की चाबियां क्षेत्र के जिलाधिकारी को सौंपकर अपना विरोध जताएंगे।


राजेंद्र कपूर के मुताबिक किसी भी मालभाड़े में लगभग 65 फीसदी तक का खर्च पेट्रोल-डीजल का होता है। ईंधन की कीमतों की बढ़ोतरी से ट्रक चालकों का घाटा बढ़ता जा रहा है, क्योंकि डीजल की कीमतों में वृद्धि के कारण उनकी लागत बढ़ती जा रही है और उनके पास ट्रकों की EMI चुकाने तक के पैसे नहीं बच रहे हैं।

ट्रक चालकों के अनुसार दिल्ली-मुंबई के बीच ट्रकों का मालभाड़ा औसतन 27-30 हजार रूपये के बीच होता है। यही भाड़ा तब भी मिलता था जब बाजार में डीजल की कीमतें 56 रूपये प्रति लीटर होती थीं। लेकिन आज जब डीजल की कीमतें 82-85 रूपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी हैं, तब भी उन्हें इतना ही माल भाड़ा मिल रहा है। जाहिर है कि ट्रक चालकों का घाटा बढ़ता जा रहा है, जबकि महंगाई के दबाव में कम खरीदी की आशंका से माल खरीदने वाले इससे ज्यादा कीमतें देने को तैयार नहीं हो रहे हैं।