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रमजान के आखिरी जुमा अलविदा की नमाज आज होगी अदा, जानें इसकी अहमियत

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सेंट्रल डेस्क : रहमतों और बरकतों का महीना अब रुखसत होने वाला है। रमज़ान का पाक महीना अलविदा कहने के लिए तैयार है। आज रमज़ान-उल-मुबारक़ महीने का आखिरी जुमा यानी अलविदा जुमा है। रोज़दारों के लिए यह दिन खास अहिमत रखता है।

रमजान मुबारक के आखिरी जुमा में अलविदा की नमाज के साथ ही शुक्रवार को माहे मुबारक के रुखसत होने का एलान भी हो जाएगा। लॉकडाउन की वजह से यह पहला मौका होगा जब अलविदा जुमे की नमाज रोजेदार मस्जिदों के बजाय घरों में अदा करेंगे।

क्या है अलविद जुमा का मतलब

अलविदा जुमा का मतलब है किसी चीज़ के रुखसत होना, जैसे यहां इसका मतलब रमज़ान के ख़त्म होने से है। रमज़ान के महीने में आखिरी शुक्रवार को ही आखिरी जुमा कहा जाता है। यही वजह है कि इस मौके पर आखिरी जुमें के दिन अल्लाह से खास दुआ मांगी जाती है कि आने वाला रमज़ान हम सबको नसीब हो। अलविदा जुमा मनाने के बाद लोग ईद की तैयारियों में जुट जाते हैं।

कब है ईद

ऐसा मान्यता है कि अलविदा की नमाज़ में जो भी साफ दिल से दुआ मांगी जाती है, वह ज़रूर पूरी होती है। अब ईद आने में महज़ एक-दो दिन रह गए हैं। अगर चांद शनिवार यानी 23 को दिखा भारत में 24 को ईद मनाई जाएगी, नहीं तो 25 को देशभर में ईद का ऐलान होगा।

क्यों है अलविदा जुमा खास?

अल्लाह ने आखिरी जुमे को सबसे खास बताया है। हदीस शरीफ में इस जुमे तो सय्यदुल अय्याम कहा गया है। माहे रमज़ान से प्यार करने वाले कुछ लोग अलविदा जुमे के दिन उदास हो जाते हैं। यूं तो जुमे की नमाज़ पूरे साल खास होती है, लेकिन रमज़ान के दौरान ये दिन और भी खास बन जाता है।

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